
#सिमडेगा #मानवीय_पहल : रक्त की कमी से जूझ रही बच्ची के लिए पुलिसकर्मी ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी।
सिमडेगा जिले में एक बार फिर पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया है, जहां थैलेसीमिया से पीड़ित 9 वर्षीय बच्ची को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाई गई। यह पहल पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक आरक्षी द्वारा की गई, जब ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध नहीं था। यह घटना समाज में पुलिस की संवेदनशील भूमिका को दर्शाती है। समय पर की गई मदद ने एक मासूम को नया जीवन दिया।
- थैलेसीमिया पीड़ित 9 वर्षीय रोनिका कुल्लू को तत्काल रक्त की आवश्यकता।
- ओ-पॉजिटिव रक्त ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं था।
- आरक्षी देव कुमार दास ने आगे बढ़कर किया रक्तदान।
- सदर अस्पताल, सिमडेगा के ब्लड बैंक में हुआ रक्तदान।
- पुलिस अधीक्षक ने की सराहना, बताया प्रेरणादायक कार्य।
सिमडेगा जिले में एक थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्ची के लिए समय पर मदद पहुंचाकर पुलिस ने समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है। यह मामला पिथरा नवाटोली निवासी बिनोद कुल्लू की 9 वर्षीय पुत्री रोनिका कुल्लू से जुड़ा है, जो गंभीर रक्त विकार बीमारी थैलेसीमिया से पीड़ित है और जिसे नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से पुलिस तक पहुंची सूचना
जानकारी के अनुसार, बच्ची की स्थिति गंभीर होने पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात कुमार ने इस समस्या से पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि रोनिका कुल्लू को तत्काल ओ-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता है, लेकिन सिमडेगा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में उस समय रक्त उपलब्ध नहीं था। परिजनों की आर्थिक स्थिति और संसाधनों की सीमितता के कारण स्थिति और भी चिंताजनक बन गई थी।
पुलिस अधीक्षक ने दिखाई त्वरित संवेदनशीलता
सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक, सिमडेगा ने मामले को गंभीरता से लिया और बिना देरी किए आवश्यक निर्देश जारी किए। पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार अपर समाहर्ता के अंगरक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त आरक्षी/502 देव कुमार दास ने आगे बढ़कर स्वयं रक्तदान करने का निर्णय लिया। यह निर्णय केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक मानवीय संवेदना का परिचायक था।
सदर अस्पताल में किया गया रक्तदान
निर्देश मिलते ही आरक्षी देव कुमार दास सिमडेगा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे और वहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रक्तदान किया। उनके रक्तदान से थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका, जिससे उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई गई।
आरक्षी देव कुमार दास का सराहनीय कदम
आरक्षी देव कुमार दास द्वारा किया गया यह कार्य न केवल एक बच्ची के लिए जीवनदान साबित हुआ, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बना। उन्होंने यह साबित किया कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह समाज के हर वर्ग के लिए मददगार बन सकती है।
पुलिस अधीक्षक ने की प्रशंसा
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने आरक्षी देव कुमार दास की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा:
पुलिस अधीक्षक ने कहा: “आरक्षी देव कुमार दास का यह मानवीय कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे कार्यों से पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग और अधिक मजबूत होता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सिमडेगा पुलिस केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
थैलेसीमिया जैसी बीमारी और रक्तदान का महत्व
थैलेसीमिया एक गंभीर अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें मरीज को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों के लिए समय पर रक्त उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकता है। इस घटना ने यह भी उजागर किया कि रक्तदान जैसी छोटी-सी पहल किसी के लिए जीवनदान बन सकती है।
समाज और पुलिस के बीच बढ़ता भरोसा
इस मानवीय पहल से यह संदेश भी गया कि जब समाज और प्रशासन एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात कुमार की सक्रियता और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने मिलकर एक मासूम की जान बचाई।
सिमडेगा पुलिस की प्रतिबद्धता
सिमडेगा पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह आगे भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती रहेगी। चाहे वह आपातकालीन स्थिति हो, स्वास्थ्य से जुड़ा मामला हो या सामाजिक सहायता—पुलिस हर संभव मदद के लिए तैयार है।

न्यूज़ देखो: जब वर्दी बनी इंसानियत की पहचान
यह घटना बताती है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि संकट के समय समाज की मजबूत ढाल भी है। आरक्षी का रक्तदान यह सवाल भी उठाता है कि क्या हम सब भी जरूरत पड़ने पर ऐसे मानवीय कदम उठाने को तैयार हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म
रक्तदान जैसे कार्य किसी भी समाज को मजबूत बनाते हैं और जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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