#सिमडेगा #घोष_प्रशिक्षण : भव्य पथ-संचलन में अनुशासन और राष्ट्रभावना का प्रदर्शन हुआ।
सिमडेगा के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन भव्य पथ-संचलन निकाला गया। श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 18 विद्यालयों के प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया। घोष वाद्यों की मधुर ध्वनि और अनुशासित कदमताल ने नगरवासियों को आकर्षित किया। कार्यक्रम ने संगठन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के संदेश को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाया।
- सिमडेगा में प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन भव्य पथ-संचलन आयोजित हुआ।
- 18 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों के भैया-बहनों ने घोष दल के साथ नगर भ्रमण किया।
- आनक, बिगुल, बंसी और ड्रम की स्वर-लहरियों से पूरा नगर गुंजायमान रहा।
- प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे ने पथ-संचलन का नेतृत्व करते हुए मार्गदर्शन दिया।
- नगरवासियों ने विभिन्न स्थानों पर प्रतिभागियों का स्वागत और उत्साहवर्धन किया।
- बुधवार को प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का विधिवत समापन होगा।
सिमडेगा में इन दिनों सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा परिसर में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन प्रतिभागियों ने भव्य नगर भ्रमण एवं पथ-संचलन का आयोजन कर अनुशासन, संगठन शक्ति और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायी प्रदर्शन किया। घोष वाद्यों की गूंज और सैकड़ों प्रशिक्षार्थियों की एकरूपता ने नगरवासियों को प्रभावित किया तथा पूरे शहर में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना का वातावरण निर्मित कर दिया।
घोष वाद्यों की मधुर ध्वनि से गूंज उठा नगर
श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में भाग ले रहे भैया-बहन पूर्ण गणवेश में सुसज्जित होकर पंक्तिबद्ध हुए। इसके बाद घोष दल ने नगर भ्रमण प्रारंभ किया।
आनक, बिगुल, बंसी और ड्रम की समवेत ध्वनि ने पूरे वातावरण को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया। घोष वाद्यों की स्वर-लहरियों के बीच प्रतिभागियों ने अनुशासित कदमताल करते हुए गांधी मैदान से यात्रा शुरू की और नीचे बाजार पेट्रोल पंप तक पहुंचे। वापसी के दौरान यह संचलन प्रिंस चौक तक एक भव्य शोभायात्रा का रूप लेता दिखाई दिया।
नगरवासियों ने विभिन्न स्थानों पर खड़े होकर इस अनुशासित पथ-संचलन का स्वागत किया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
18 विद्यालयों के प्रशिक्षार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग में श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित 18 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों से आए प्रशिक्षार्थी भाग ले रहे हैं।
इन सभी विद्यालयों के भैया-बहनों ने पथ-संचलन में अपनी सहभागिता निभाते हुए उत्कृष्ट अनुशासन और समन्वय का परिचय दिया। विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि घोष केवल वाद्य यंत्र बजाने की कला नहीं, बल्कि संगठन, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का जीवंत माध्यम है।
व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम है घोष प्रशिक्षण
इस अवसर पर झारखंड के प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे ने स्वयं पथ-संचलन की अगुवाई की और प्रशिक्षार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे ने कहा: “घोष प्रशिक्षण व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, समयबद्धता तथा सामूहिक कार्यशैली को विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है। प्रशिक्षार्थियों को अपने अर्जित कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण वर्ग युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं, जो भविष्य में उन्हें बेहतर नागरिक बनने में सहायता प्रदान करते हैं।
अनुशासन और संस्कृति का अनूठा संगम
नगर भ्रमण के दौरान घोष दल की सुसंगठित पंक्तियां, आकर्षक वेशभूषा और एक समान कदमताल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। घोष वाद्यों की गूंज ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महसूस किया कि भारतीय संस्कृति और संगठन शक्ति का ऐसा सजीव प्रदर्शन आज के दौर में युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर सकता है। प्रशिक्षण वर्ग ने प्रतिभागियों में सामूहिकता, अनुशासन और संस्कारों की भावना को और मजबूत किया।
आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
पथ-संचलन और प्रशिक्षण वर्ग के सफल संचालन में अनेक शिक्षाविदों, प्रशिक्षकों और समिति पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे, जिला निरीक्षक हीरालाल महतो, घोष प्रशिक्षक मनोज पाठक, नंदलाल षाड़गी, सूरज, संकुल प्रमुख संतोष दास, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक, विभिन्न विद्यालयों के आचार्य एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
इसके अलावा विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारी हनुमान बोंदिया, मुरारी प्रसाद, अनिरुद्ध सिंह, कुंवर गोप तथा आचार्य परिवार के सदस्यों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।
आयोजकों ने प्रशासन के सहयोग की भी सराहना की, जिसके कारण पथ-संचलन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
बुधवार को होगा प्रशिक्षण वर्ग का समापन
पांच दिनों से चल रहे इस प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का विधिवत समापन बुधवार को किया जाएगा। समापन समारोह में प्रतिभागियों के प्रशिक्षण अनुभवों का मूल्यांकन किया जाएगा तथा उन्हें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनी दक्षता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार यह प्रशिक्षण वर्ग केवल घोष कला के अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभावना, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का भी महत्वपूर्ण मंच है।
न्यूज़ देखो: संस्कार और संगठन का जीवंत उदाहरण
सिमडेगा में आयोजित यह प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने का सशक्त प्रयास है। जिस प्रकार विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर अनुशासन और समर्पण का प्रदर्शन किया, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। अब यह अपेक्षा की जा सकती है कि प्रशिक्षार्थी यहां सीखे गए मूल्यों को अपने जीवन और समाज में भी उतारेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अनुशासन और संस्कार से ही बनता है मजबूत समाज
युवाओं की ऊर्जा जब सही दिशा में लगती है, तब समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल कौशल नहीं सिखाते, बल्कि जीवन मूल्यों को भी विकसित करते हैं।
यदि हम अपने बच्चों को संस्कृति, अनुशासन और संगठन से जोड़ेंगे तो वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनकर देश का गौरव बढ़ाएंगे।
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