#Sisai_ChhathMahaparv: कुदरा तालाब में छठव्रतियों ने अर्पित किया अर्घ्य, पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा :
- सिसई प्रखंड के कुदरा तालाब में हुआ चैती छठ का भव्य आयोजन
- अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को व्रतियों ने दी संध्या अर्घ्य
- चार दिवसीय लोक आस्था का पर्व पूरे श्रद्धा और शुद्धता से मनाया गया
- गर्मी के बावजूद उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, भक्ति गीतों ने बांधा समा
- आज सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ छठ महापर्व का समापन
सिसई प्रखंड क्षेत्र में चैती छठ महापर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कुदरा तालाब में कल संध्या को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया, जहां भक्तों की भीड़ और भक्ति का माहौल देखते ही बन रहा था।
चार दिवसीय यह पर्व नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के रूप में सम्पन्न होता है। पहले दिन व्रती नदी तालाब में स्नान कर शुद्धता के साथ नहाय-खाय करते हैं, फिर दूसरे दिन खरना का प्रसाद बनता है। कल अस्ताचलगामी सूर्य और आज चौथे दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया गया।
भक्तिमय माहौल और आयोजन की भव्यता
पूरे इलाके में छठ पूजा को लेकर गजब की श्रद्धा देखी जा रही है। भीषण गर्मी के बावजूद व्रतियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। छठ गीतों की मधुर ध्वनि ने आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी।
“छठ गीतों में एक अलग ही शक्ति होती है, जिससे मन पूरी तरह प्रभु की भक्ति में रम जाता है।”
— स्थानीय व्रती महिला, सिसई
आज उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ समापन
छठ महापर्व का समापन आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। इसके साथ ही व्रती 36 घंटे के कठिन उपवास को तोड़ा।
श्रद्धा, स्वच्छता और संयम का यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी दर्शाता है।
न्यूज़ देखो — आस्था की हर खबर सबसे पहले
छठ महापर्व जैसे लोक आस्था के पर्व हमें हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाते हैं। सिसई में दिखा यह भव्य आयोजन श्रद्धा और समर्पण की मिसाल है। ‘न्यूज़ देखो’ ऐसे हर सामाजिक और आध्यात्मिक घटनाओं को सबसे पहले और सबसे सटीक रूप में आप तक पहुंचाता है — “हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।”
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