
#महुआडांड़ #बिजली_संकट : सोहर ऊपर टोला में दो वर्षों से बिजली आपूर्ति ठप रहने से 250 से अधिक ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित — विभागीय उदासीनता पर बढ़ा आक्रोश
- महुआडांड़ प्रखंड के सोहर ऊपर टोला में दो वर्षों से बिजली पूरी तरह बंद।
- 40 से अधिक परिवार, कुल 250+ जनसंख्या लगातार अंधेरे में जीवन यापन कर रही है।
- बिजली पोल और घर-घर कनेक्शन मौजूद, फिर भी आपूर्ति शुरू नहीं हुई।
- ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग, प्रखंड कार्यालय और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की।
- पढ़ाई, पानी, मोबाइल चार्जिंग, रात की सुरक्षा सहित सभी दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित।
- बरसात में अंधेरे के कारण सांप-बिच्छू का खतरा और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ी।
सोहर पंचायत के सोहर ऊपर टोला के ग्रामीणों का जीवन पिछले दो वर्षों से पूर्ण अंधकार में बीत रहा है। महुआडांड़ प्रखंड के इस गांव में बिजली पोल लगे हैं, तारें खिंची हैं और अधिकांश घरों में कनेक्शन भी कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद बिजली आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो पाई है। 40 से अधिक परिवारों और लगभग 250 से ज्यादा लोगों की यह समस्या लगातार अधिकारियों और प्रतिनिधियों तक पहुंचाई गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, पानी की उपलब्धता, मोबाइल चार्जिंग और रात के समय सुरक्षा जैसे बुनियादी पहलू बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीण बरसात में सांप-बिच्छू के खतरे से भी जूझते हैं।
बिजली कनेक्शन पूरा, पर सप्लाई शुरू न होने से बढ़ी समस्या
ग्रामीणों के अनुसार सोहर ऊपर टोला में बिजली व्यवस्था के लिए सारे सरकारी कार्य पूरे हो चुके हैं। बिजली पोल, लाइन, और घर-घर कनेक्शन निर्माण कई साल पहले कर दिया गया था। इसके बावजूद दो वर्षों से एक भी बल्ब नहीं जला है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय स्तर पर फाइलें महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय में लंबित हैं और अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों की पीड़ा: पढ़ाई से लेकर सुरक्षा तक सब प्रभावित
बिजली नहीं होने का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। परीक्षा के दिनों में बच्चे मिट्टी के तेल या टॉर्च के सहारे पढ़ने को मजबूर हैं। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोग कई किलोमीटर दूर जाने को विवश हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में संपर्क साधना भी कठिन हो जाता है।
रात में अंधेरे के कारण महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। बरसात के दिनों में सांप-बिच्छू और जंगली जीवों का खतरा और अधिक बढ़ जाता है, और अंधकार के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
परेशान ग्रामीणों की आवाज: “कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं”
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बिजली विभाग, प्रखंड कार्यालय, और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समस्या बताई गई है, लेकिन आश्वासन के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
एक ग्रामीण ने कहा: “हम दो साल से अंधेरे में जी रहे हैं। पोल और तार सब लगे हैं, फिर भी बिजली नहीं आती। बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें सब प्रभावित हैं। अब हमें जल्द समाधान चाहिए।”
ग्रामीणों ने बताया कि समस्या प्रखंड कार्यालय में वर्षों से लंबित है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
यह मामला गांव में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और सरकारी सिस्टम की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ऐसे समय में, जब सरकार हर गांव तक बिजली पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं सोहर ऊपर टोला जैसे इलाके उपेक्षा के शिकार बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।
न्यूज़ देखो: अंधेरे में जीना कोई विकल्प नहीं
सोहर ऊपर टोला की यह स्थिति बताती है कि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर तभी मिलता है, जब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाए। दो वर्षों से 250 लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं, यह विभागीय लापरवाही की स्पष्ट तस्वीर है। स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि ग्रामीणों का भरोसा कायम रह सके।
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समाधान की लौ जलाएं, बदलाव की राह अपनाएं
अंधेरे से उजाले की यात्रा सिर्फ बिजली आने से नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता और नागरिक अधिकारों की रक्षा से पूरी होती है। ग्रामीणों की इस समस्या को सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है ताकि व्यवस्था सही ढंग से काम करे।







