बानो स्टेशन रोड पर सोलर लाइटें तीन माह से खराब, अंधेरे में सफर को मजबूर ग्रामीण और यात्री

बानो स्टेशन रोड पर सोलर लाइटें तीन माह से खराब, अंधेरे में सफर को मजबूर ग्रामीण और यात्री

author Shivnandan Baraik
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#बानो #जनसमस्या : स्टेशन रोड पर खराब सोलर लाइटों से सुरक्षा और आवागमन प्रभावित।

बानो में बिरसा मुंडा चौक से रेलवे स्टेशन तक सड़क किनारे लगी सोलर लाइटें पिछले तीन महीनों से खराब पड़ी हैं। लगभग दो दर्जन लाइटें बंद होने से रात के समय यात्रियों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या पर न तो संबंधित विभाग और न ही जनप्रतिनिधियों की ठोस पहल नजर आ रही है। स्थानीय भाजपा नेताओं ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द समाधान की मांग की है।

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  • बिरसा मुंडा चौक से रेलवे स्टेशन रोड पर सोलर लाइटें तीन माह से खराब।
  • करीब दो दर्जन सोलर लाइटें बंद, कुछ पोल से लाइटें गायब।
  • रात्रि ट्रेनों के यात्रियों को अंधेरे में पैदल आवागमन की मजबूरी।
  • विभाग और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सवाल।
  • भाजपा वरिष्ठ सदस्य सुरेंद्र तिवारी ने लापरवाही पर नाराजगी जताई।
  • पूर्व भाजपा प्रखंड अध्यक्ष कामेश्वर सिंह ने जल्द नई लाइट लगाने की मांग की।

बानो प्रखंड मुख्यालय के अंतर्गत बिरसा मुंडा चौक से रेलवे स्टेशन तक जाने वाली सड़क कभी रोशनी से जगमगाने की उम्मीद का प्रतीक बनी थी। सड़क किनारे सोलर लाइटें लगाए जाने पर ग्रामीणों और यात्रियों में खुशी थी कि अब रात के समय आवागमन सुरक्षित और आसान होगा। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। लाइटें लगने के महज एक महीने के भीतर ही स्टेशन रोड पर लगी लगभग दो दर्जन सोलर लाइटें खराब हो गईं, जो अब तक दुरुस्त नहीं की जा सकी हैं।

तीन महीने से अंधेरे में डूबी स्टेशन रोड

स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन रोड पर सोलर लाइटें खराब पड़े हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं। कई पोलों पर लगी लाइटें पूरी तरह बंद हैं, वहीं कुछ पोलों से लाइटें खोलकर ले जाने की भी बात सामने आई है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से न मरम्मत कराई गई और न ही नई लाइटें लगाई गईं।

रात के समय यह सड़क पूरी तरह अंधेरे में डूबी रहती है, जिससे पैदल चलने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। अंधेरे के कारण असामाजिक गतिविधियों का भी खतरा बना रहता है।

विभाग और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार मौखिक रूप से शिकायत की गई, लेकिन न तो विभाग की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता दिखाई। तीन माह बीत जाने के बावजूद लाइटों का नहीं बनना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

लोगों का सवाल है कि जब सरकारी खर्च से सोलर लाइटें लगाई गई थीं, तो उनकी देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की जाती, तो ऐसी योजनाओं का लाभ जनता तक कैसे पहुंचेगा।

भाजपा नेताओं ने जताई नाराजगी

इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ सदस्य सुरेंद्र तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि तीन महीने से लाइटें खराब पड़ी हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है।

सुरेंद्र तिवारी ने कहा: “तीन माह से सोलर लाइटें खराब पड़ी हैं, फिर भी इन्हें क्यों नहीं बनाया जा रहा है। कुछ पोल से लाइटें खोलकर ले जाई गई हैं, लेकिन विभाग आंख मूंदे बैठा है।”

उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।

इसी तरह भाजपा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष कामेश्वर सिंह ने भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

कामेश्वर सिंह ने कहा: “महीना भर से ज्यादा समय बीत गया, फिर भी खराब लाइटें नहीं बनाई गईं। रात में ट्रेनों के आने पर यात्रियों को अंधेरे में आने-जाने में भारी परेशानी होती है।”

यात्रियों की बढ़ती परेशानी

बानो रेलवे स्टेशन पर रात्रि समय में कई ट्रेनों का ठहराव होता है। ऐसे में दूर-दराज के गांवों से आने वाले यात्री रात में स्टेशन से उतरकर पैदल बिरसा मुंडा चौक की ओर जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अक्सर देखा जा सकता है कि यात्री मोबाइल की रोशनी या टॉर्च के सहारे अंधेरे में चलने को मजबूर हैं।

अंधेरे में सड़क पर चलने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। स्टेशन रोड पर वाहनों की आवाजाही भी रहती है, लेकिन पर्याप्त रोशनी नहीं होने से चालक और पैदल यात्री दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

सुरक्षा और विकास के दावों पर असर

सोलर लाइटें ऊर्जा संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती हैं। लेकिन बानो स्टेशन रोड का यह मामला दर्शाता है कि योजनाएं कागजों पर तो बेहतर दिखती हैं, पर जमीनी स्तर पर उनका रखरखाव कमजोर है। इससे न केवल जनता को परेशानी होती है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खराब लाइटों की मरम्मत कर दी जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अब लाइटें लंबे समय से खराब रहने के कारण पोल और अन्य उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने की भी आशंका है।

जल्द समाधान की मांग

ग्रामीणों और भाजपा नेताओं ने एक स्वर में मांग की है कि स्टेशन रोड पर सभी खराब सोलर लाइटों को जल्द दुरुस्त किया जाए। साथ ही जिन पोलों से लाइटें गायब हैं, वहां नई लाइटें लगाई जाएं। इसके अलावा भविष्य में नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी जरूरत बताई जा रही है।

लोगों का कहना है कि बानो जैसे क्षेत्र में रेलवे स्टेशन एक महत्वपूर्ण स्थान है और यहां सुरक्षा और रोशनी की अनदेखी नहीं की जा सकती।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी उजागर

बानो स्टेशन रोड पर सोलर लाइटों की खराब स्थिति स्थानीय प्रशासन और विभागीय लापरवाही को उजागर करती है। सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और विभाग को मिलकर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि यात्रियों और ग्रामीणों की परेशानी दूर हो सके। अब सवाल है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब संज्ञान लेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

रोशनी सिर्फ पोल पर नहीं, व्यवस्था में भी जरूरी

सड़क पर रोशनी होना केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की बुनियादी शर्त है। यदि छोटी-छोटी समस्याओं को समय पर सुलझाया जाए, तो बड़े हादसों से बचा जा सकता है। बानो के नागरिक अब ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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