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बगोदर में हूल दिवस पर भाकपा माले का विशेष कार्यक्रम — सिदो-कान्हू और वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

#बगोदर #हूलदिवससम्मान : समानता, अधिकार और न्याय की लड़ाई के प्रेरणास्त्रोत हैं संथाल विद्रोह के वीर, भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने लिया संघर्ष का संकल्प
  • भाकपा माले द्वारा हूल दिवस पर आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
  • सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो समेत शहीद वीरों को किया गया नमन
  • ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आदिवासी विद्रोह को बताया गया ऐतिहासिक प्रेरणा
  • कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई को जारी रखने का लिया संकल्प
  • कार्यक्रम में आदिवासी गौरव और संघर्ष की विरासत को किया गया सम्मानित

आदिवासी अस्मिता का प्रतीक है हूल दिवस: भाकपा माले

बगोदर में हूल दिवस के अवसर पर भाकपा माले ने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें संथाल विद्रोह के महानायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
वक्ताओं ने उनके बलिदान को औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध एक ऐतिहासिक और जन-प्रेरक आंदोलन बताया, जो आज भी वंचित वर्गों के हक और अधिकारों की लड़ाई में मार्गदर्शक बना हुआ है।

सामाजिक न्याय की लड़ाई में आज भी प्रासंगिक है आदिवासी विद्रोह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि:

“सिदो-कान्हू का संघर्ष सिर्फ इतिहास नहीं है, बल्कि वह चेतना है जो आज भी हमें समानता, सम्मान और सामाजिक अधिकारों की लड़ाई में ताकत देता है।”

उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासियों के सामूहिक संघर्ष को जन आंदोलन की मिसाल बताया और कहा कि आज जब समाज में नए-नए शोषण के रूप सामने आ रहे हैं, ऐसे में संथाल विद्रोह की विरासत को जीवित रखना अत्यंत जरूरी है।

शहीदों के सपनों को साकार करने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि वे शहीदों के बताए रास्ते पर चलकर सामाजिक असमानता, अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान तब सार्थक होगा जब देश में हर नागरिक को न्याय और अधिकार की गारंटी मिलेगी।

न्यूज़ देखो: आदिवासी चेतना के प्रतीक दिवस पर प्रेरणादायक पहल

हूल दिवस सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि वह चेतावनी है कि जब अन्याय बढ़ता है, तो जन चेतना जागती है।
न्यूज़ देखो इस पहल को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि शहीदों की यह चेतना हर गांव, हर शहर और हर दिल में जीवित रहेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

याद रखिए, संघर्ष के बीज कभी नहीं मरते

समानता और अधिकार की लड़ाई में इतिहास से जुड़ना हमें शक्ति देता है।
अगर आप भी मानते हैं कि शहीदों की विरासत आज के भारत के लिए प्रासंगिक है, तो इस खबर को साझा करें, अपनी राय दें और संकल्प लें कि न्याय और समानता की इस राह में आप भी सहभागी बनेंगे।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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