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गिरिडीह में कृषि डेटा संग्रह और फसल बीमा के लिए CCE AGRI APP व DGCES पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

#गिरिडीह #कृषि_बीमा : डिजिटल तकनीक से फसल उपज आकलन और किसानों को त्वरित राहत का प्रयास
  • CCE AGRI APP और DGCES के प्रयोग पर समर्पित प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित।
  • जिला सांख्यिकी पदाधिकारी जितेंद्र कुमार दुबे और क्षेत्रीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी।
  • 13 प्रखंडों के अधिकारी व कृषि प्रसार पदाधिकारी प्रशिक्षित हुए।
  • डिजिटल प्रणाली से रीयल टाइम डेटा संग्रह और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
  • बीमा दावों में तेजी और किसानों तक त्वरित राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी।

गिरिडीह जिले में आज कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक अहम कदम उठाया गया। जिला मुख्यालय में CCE AGRI APP और DGCES के उपयोग को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार दुबे सहित विभिन्न प्रखंडों और क्षेत्रीय स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment – CCE) की डिजिटल प्रक्रिया से अवगत कराना था। पारंपरिक विधियों के बजाय अब यह काम CCE AGRI APP और DGCES के जरिए किया जाएगा। इससे फसल की औसत उपज का आकलन वैज्ञानिक, पारदर्शी और सटीक रूप से किया जा सकेगा।

CCE प्रक्रिया और तकनीक का उपयोग

CCE एक मानकीकृत पद्धति है, जिसके तहत खेत के छोटे हिस्से में फसल काटकर उपज का अनुमान लगाया जाता है। इस प्रक्रिया को अब डिजिटल रूप में संपादित करने से रीयल टाइम डेटा अपलोड, पारदर्शिता और नीति निर्माण में गति आएगी।
इस दौरान BAJAJ ALLIANZ बीमा कंपनी के प्रतिनिधि श्री राजेन्द्र सिंह ने भी निरीक्षण और बीमा दावों से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की।

किसानों के लिए लाभ

CCE AGRI APP और DGCES के प्रयोग से न केवल उपज का अनुमान अधिक सटीक होगा, बल्कि बीमा कंपनियों द्वारा नुकसान का आकलन और मुआवजे की पारदर्शिता भी बढ़ेगी। धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादन स्थिति का ब्लॉक और जिला स्तर पर सही आकलन संभव होगा। इससे किसानों को नुकसान होने की स्थिति में तेज़ी से मुआवजा मिलेगा।

व्यापक भागीदारी

इस कार्यशाला में जिला स्तरीय सांख्यिकी पर्यवेक्षक, कृषि और सहकारिता प्रसार अधिकारी, अंचल निरीक्षक तथा बीमा कंपनी प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने ऐप के प्रयोग, डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया और आंकड़ों की सटीकता बनाए रखने पर विस्तार से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

न्यूज़ देखो: किसानों की राहत के लिए तकनीक का सहारा

यह प्रशिक्षण दिखाता है कि प्रशासन और तकनीक के तालमेल से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और किसानों को त्वरित राहत मिल सकती है। यदि इसे पूरी गंभीरता से लागू किया गया तो आने वाले समय में किसानों का बीमा दावा और फसल आकलन दोनों और ज्यादा प्रभावी हो जाएंगे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

तकनीक से सशक्त किसान

अब समय है कि हम सब इस डिजिटल बदलाव को अपनाकर किसानों की समस्याओं के समाधान में योगदान दें। तकनीक का सही उपयोग ही उनकी मेहनत का सम्मान है। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि अधिक लोग जागरूक हो सकें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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