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पलामू पुलिस लाइन में शहीद आईपीएस अफसरों की स्मृति में खेल परिसर का उद्घाटन

#पलामू #पुलिस_सम्मान – शहीदों की स्मृति को समर्पित खेल परिसर से पुलिस बल में बढ़ेगी खेल भावना और प्रेरणा
  • पलामू पुलिस लाइन में दो नवनिर्मित खेल परिसरों का उद्घाटन समारोह संपन्न
  • बास्केटबॉल कोर्ट शहीद आईपीएस अजय कुमार सिंह के नाम पर
  • बैडमिंटन कोर्ट शहीद आईपीएस अमरजीत बलिहार की स्मृति में समर्पित
  • एसपी रीष्मा रमेशन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
  • युवाओं और जवानों को खेल के प्रति जागरूक करने का प्रयास

शहीदों की स्मृति को मिली नई पहचान

पलामू पुलिस लाइन परिसर में सोमवार को दो नव-निर्मित खेल परिसरों — बास्केटबॉल और बैडमिंटन कोर्ट — का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन केवल एक बुनियादी सुविधा का शुभारंभ नहीं था, बल्कि शहीदों की अमर स्मृति को ससम्मान जीवित रखने का एक प्रेरणादायक प्रयास भी था।

बास्केटबॉल कोर्ट का नाम शहीद आईपीएस अजय कुमार सिंह के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। वहीं, बैडमिंटन कोर्ट शहीद आईपीएस अमरजीत बलिहार की स्मृति को समर्पित है, जो 2013 में लातेहार में नक्सली हमले के शिकार हुए थे।

गरिमामयी उद्घाटन समारोह

इस उद्घाटन समारोह में पलामू की पुलिस अधीक्षक रीष्मा रमेशन, हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन, एएसपी राकेश कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। समारोह में शहीद अधिकारियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके योगदान को याद करते हुए सभी ने खेलों को अनुशासन और उत्साह का माध्यम बताया।

युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेंगे ये मैदान

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन खेल परिसरों के निर्माण का उद्देश्य न केवल पुलिस बल के भीतर फिटनेस और खेल भावना को बढ़ाना है, बल्कि युवा पीढ़ी को देश सेवा, अनुशासन और प्रेरणा का भी संदेश देना है।
शहीदों की स्मृति में निर्मित ये मैदान आने वाले वर्षों में भावी पुलिस बल और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

न्यूज़ देखो: शहादत को सलाम, खेलों को सम्मान

पलामू पुलिस का यह कदम शहीदों के सम्मान और नई पीढ़ी को दिशा देने का अद्वितीय उदाहरण है।
जब खेलों को शहादत से जोड़ा जाता है, तो वह सिर्फ खेल नहीं रहता — वह एक भावना, एक संकल्प और एक आदर्श बन जाता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

देश के लिए दिए बलिदान को कभी न भूलें

शहीद आईपीएस अधिकारी केवल एक विभाग या राज्य की शान नहीं थे — वे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं।
उनकी स्मृति में बना हर कोना, हर मैदान — देशप्रेम, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल है।
आइए, हम सब मिलकर इन स्मृतियों को सम्मान दें और नई पीढ़ी को प्रेरित करें।

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