
#सिमडेगा #राष्ट्रीयपर्यटनदिवस : कॉलेज परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यटन महत्व पर संवाद।
सेंट ज़ेवियर कॉलेज, सिमडेगा में भूगोल विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पर्यटन के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व से अवगत कराना था। पोस्टर निर्माण, विचार लेखन और संवादात्मक सत्र के माध्यम से पर्यटन उद्योग की भूमिका पर चर्चा की गई। इस आयोजन ने छात्रों में पर्यटन को करियर और अध्ययन के क्षेत्र के रूप में देखने की समझ विकसित की।
- 30 जनवरी 2026 को सेंट ज़ेवियर कॉलेज में राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का आयोजन।
- भूगोल विभाग द्वारा शैक्षणिक व रचनात्मक गतिविधियों का संचालन।
- छात्रों ने पोस्टर निर्माण के माध्यम से पर्यटन स्थलों व सतत पर्यटन को दर्शाया।
- पर्यटन उद्योग के रोजगार और आर्थिक योगदान पर विचार प्रस्तुत किए गए।
- रैनी आल्मा लकड़ा, प्रदीप एक्का, मार्सेल हेंब्रम, नारायण साईं रहे उपस्थित।
- कार्यक्रम का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ।
सिमडेगा स्थित सेंट ज़ेवियर कॉलेज परिसर में राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर शैक्षणिक वातावरण में विशेष उत्साह देखने को मिला। भूगोल विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही, जहां पर्यटन के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। आयोजन के दौरान रचनात्मक गतिविधियों और विचार-विमर्श के माध्यम से छात्रों को पर्यटन के व्यापक महत्व से परिचित कराया गया।
पोस्टर निर्माण के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पोस्टर निर्माण गतिविधि में छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। छात्रों द्वारा बनाए गए पोस्टरों में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, स्थानीय पर्यटन, सतत पर्यटन और पर्यटन उद्योग का बढ़ता महत्व जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। पोस्टरों में रंगों, प्रतीकों और संदेशों के माध्यम से यह दर्शाया गया कि पर्यटन किस प्रकार पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास से जुड़ा है।
इन पोस्टरों ने छात्रों की जागरूकता, सामाजिक समझ और रचनात्मक सोच को स्पष्ट रूप से सामने रखा। कई पोस्टरों में स्थानीय पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और जिम्मेदार पर्यटन अपनाने का संदेश दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि छात्र पर्यटन को केवल वैश्विक नहीं, बल्कि स्थानीय विकास के दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं।
छात्रों के अनुभव और विचारों की प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने व्यक्तिगत भ्रमण अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर मिला। छात्रों ने इस बात पर भी जोर दिया कि भ्रमण से न केवल मानसिक विकास होता है, बल्कि शैक्षणिक दृष्टि से भी यह अत्यंत उपयोगी होता है।
इसके साथ ही छात्रों ने पर्यटन के महत्व और पर्यटन उद्योग के विकास पर अपने विचार लिखित रूप में प्रस्तुत किए। इन विचारों में रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, अंतरराष्ट्रीय और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में पर्यटन की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया। छात्रों ने यह भी रेखांकित किया कि पर्यटन उद्योग युवाओं के लिए करियर के अनेक अवसर प्रदान करता है, चाहे वह गाइडिंग, प्रबंधन, शोध या संरक्षण से जुड़ा क्षेत्र हो।
शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रेरणा
कार्यक्रम में भूगोल विभागाध्यक्ष सहायक प्राध्यापक रैनी आल्मा लकड़ा की प्रमुख भूमिका रही। उनके साथ सहायक प्राध्यापक प्रदीप एक्का, सहायक प्राध्यापक मार्सेल हेंब्रम, सहायक प्राध्यापक नारायण साईं एवं प्रयोगशाला सहायक संदीप कुल्लू उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के महत्व पर विस्तार से जानकारी साझा की।
रैनी आल्मा लकड़ा ने कहा:
“पर्यटन केवल यात्रा तक सीमित नहीं है, यह भूगोल, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का जीवंत अध्ययन भी है। छात्रों को इसे गंभीर अध्ययन और करियर विकल्प के रूप में देखना चाहिए।”
अन्य शिक्षकों ने भी पर्यटन को एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए छात्रों को इसके विविध पहलुओं पर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सतत और जिम्मेदार पर्यटन की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है।
संवादात्मक सत्र से बढ़ी समझ
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें छात्रों ने शिक्षकों से प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। इस सत्र के दौरान पर्यटन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं, भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई। संवादात्मक माहौल ने छात्रों में पर्यटन के प्रति सकारात्मक और व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस सत्र के बाद छात्रों में यह समझ और मजबूत हुई कि पर्यटन केवल घूमने तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम की सफलता इस बात से भी स्पष्ट हुई कि छात्रों ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।
न्यूज़ देखो: शैक्षणिक संस्थानों में पर्यटन चेतना की आवश्यकता
सेंट ज़ेवियर कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि शैक्षणिक संस्थान किस प्रकार राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों को छात्रों से जोड़ सकते हैं। पर्यटन जैसे विषय पर जागरूकता बढ़ाना युवाओं को जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील यात्री बनाने की दिशा में अहम कदम है। यह पहल यह भी बताती है कि पर्यटन को केवल उद्योग नहीं, बल्कि शिक्षा और संस्कृति के माध्यम के रूप में समझना जरूरी है। आगे ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों में करियर और शोध की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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पर्यटन से जुड़कर सीखने और आगे बढ़ने का अवसर
राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का यह आयोजन छात्रों के लिए सीखने, सोचने और संवाद करने का मंच बना। जब युवा पर्यटन को जिम्मेदारी और समझ के साथ अपनाते हैं, तो वे समाज और पर्यावरण दोनों के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
आज जरूरत है कि हम अपने स्थानीय पर्यटन स्थलों को पहचानें, संरक्षित करें और उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ाएं। पर्यटन केवल यात्रा नहीं, बल्कि सीखने और जुड़ने का माध्यम है।







