
#सिमडेगा #शिक्षा_तकनीक : गैर-शिक्षकेतर कर्मियों को डिजिटल युग के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
संत जेवियर महाविद्यालय, सिमडेगा में गैर-शिक्षकेतर कर्मियों के लिए ‘युवा एआई फॉर ऑल’ ऑनलाइन पाठ्यक्रम पर अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार की इस पहल के माध्यम से कर्मियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना और दैनिक कार्यालयीन कार्यों में तकनीक के उपयोग को सरल बनाना रहा। यह पहल शैक्षणिक संस्थानों में तकनीकी समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- संत जेवियर महाविद्यालय, सिमडेगा में गैर-शिक्षकेतर कर्मियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम।
- ‘युवा एआई फॉर ऑल’ भारत सरकार की निःशुल्क ऑनलाइन पहल।
- संसाधन व्यक्ति डॉ. अमित कुमार गुप्ता, सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग।
- फ्यूचरस्किल्स प्राइम पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण व प्रमाण-पत्र की जानकारी।
- डिजिटल सशक्तिकरण और सतत सीखने पर विशेष जोर।
डिजिटल युग में तेजी से बदलती कार्यप्रणाली को देखते हुए संत जेवियर महाविद्यालय, सिमडेगा द्वारा गैर-शिक्षकेतर कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की गई। भारत सरकार के ‘युवा एआई फॉर ऑल’ ऑनलाइन पाठ्यक्रम को लेकर आयोजित इस अभिमुखीकरण कार्यक्रम में तकनीक को सरल और उपयोगी रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में कर्मियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल ज्ञान के प्रति उनकी रुचि लगातार बढ़ रही है।
कार्यक्रम का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
इस अभिमुखीकरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-शिक्षकेतर कर्मियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की बुनियादी समझ प्रदान करना था। आज के समय में एआई केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कार्यालय प्रबंधन, डेटा संधारण, संचार और निर्णय प्रक्रिया जैसे क्षेत्रों में भी इसकी भूमिका बढ़ती जा रही है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय ने यह कार्यक्रम आयोजित किया, ताकि कर्मी बदलते तकनीकी परिवेश के साथ स्वयं को जोड़ सकें।
संसाधन व्यक्ति का मार्गदर्शन
कार्यक्रम के संसाधन व्यक्ति डॉ. अमित कुमार गुप्ता, सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग रहे। उन्होंने एआई की अवधारणा को सरल, सहज और गैर-तकनीकी भाषा में समझाया, जिससे सभी प्रतिभागी आसानी से विषय को समझ सकें।
डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने कहा:
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोई जटिल विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन और कार्यालयीन कार्यों को आसान बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।”
उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार एआई आधारित टूल्स समय प्रबंधन, दस्तावेज़ीकरण, डेटा विश्लेषण और संवाद प्रणाली को बेहतर बना सकते हैं।
‘युवा एआई फॉर ऑल’ पाठ्यक्रम की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ‘युवा एआई फॉर ऑल’ ऑनलाइन पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। यह पाठ्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न वर्गों को एआई के प्रति जागरूक करना है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह पाठ्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क है और इसे फ्यूचरस्किल्स प्राइम पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा, जो भविष्य में उनके कौशल विकास के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
पंजीकरण और नामांकन की प्रक्रिया
अभिमुखीकरण सत्र के दौरान पाठ्यक्रम में पंजीकरण एवं नामांकन की प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को लॉगिन प्रक्रिया, मॉड्यूल चयन, अध्ययन सामग्री और मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी दी गई। इससे गैर-शिक्षकेतर कर्मियों में तकनीकी झिझक कम हुई और वे आत्मविश्वास के साथ पाठ्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए।
प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में शामिल गैर-शिक्षकेतर कर्मियों ने इस सत्र को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल नई तकनीकों से परिचित कराते हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। कई कर्मियों ने यह भी कहा कि वे भविष्य में एआई आधारित अन्य पाठ्यक्रमों से भी जुड़ना चाहेंगे।
डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कदम
कार्यक्रम का समापन डिजिटल सशक्तिकरण और सतत सीखने के महत्व पर जोर देते हुए किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना आज की आवश्यकता है।
यह भी जानकारी दी गई कि इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो यूट्यूब चैनल ‘akgeclass’ पर उपलब्ध है, जिससे अन्य इच्छुक लोग भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में तकनीक का समावेशन जरूरी
संत जेवियर महाविद्यालय का यह प्रयास दर्शाता है कि शिक्षा संस्थान अब केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि कर्मचारियों के कौशल विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं। गैर-शिक्षकेतर कर्मियों को एआई से जोड़ना संस्थान की दूरदर्शिता को दर्शाता है। यह पहल कार्यक्षमता बढ़ाने और डिजिटल अंतर को कम करने में सहायक साबित हो सकती है। सवाल यह है कि क्या अन्य संस्थान भी इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सीखते रहना ही प्रगति की कुंजी है
डिजिटल युग में ज्ञान ही सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे कार्यक्रम न केवल तकनीकी समझ बढ़ाते हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जाते हैं। यदि आप भी नई तकनीकों को सीखने के इच्छुक हैं, तो ऐसे अवसरों का लाभ जरूर उठाएं।
इस पहल पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं। खबर को साझा करें और डिजिटल जागरूकता को अपने आसपास तक पहुंचाने में सहयोग करें।







