
#सिमडेगा #विश्वआर्द्रभूमिदिवस : वेटलैंड्स और पारंपरिक ज्ञान विषय पर संगोष्ठी और वृक्षारोपण अभियान आयोजित।
सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में भूगोल विभाग और एनसीसी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के सेमिनार हॉल में किया गया, जिसके बाद खिजरि पहाड़ी के पास वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर वेटलैंड्स के पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर चर्चा की गई। आयोजन का उद्देश्य छात्रों और युवाओं में आर्द्रभूमि संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।
- सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में विश्व आर्द्रभूमि दिवस का आयोजन।
- भूगोल विभाग और एनसीसी का संयुक्त सहयोग।
- थीम रही “वेटलैंड्स और पारंपरिक ज्ञान – सांस्कृतिक विरासत का उत्सव”।
- सेमिनार हॉल में शैक्षणिक सत्र और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन।
- खिजरि पहाड़ी के पास वृक्षारोपण अभियान।
- छात्रों और एनसीसी कैडेटों की सक्रिय भागीदारी।
सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में आयोजित विश्व आर्द्रभूमि दिवस का कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह पर्यावरणीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से वेटलैंड्स की भूमिका को मानव जीवन, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संदर्भ में विस्तार से समझाया गया।
परिचयात्मक सत्र में वेटलैंड्स के महत्व पर प्रकाश
कार्यक्रम की शुरुआत भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर हेमब्रोम मार्सेल के परिचयात्मक भाषण से हुई। उन्होंने विश्व आर्द्रभूमि दिवस के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय गिरावट के कारण वेटलैंड्स का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि वेटलैंड्स केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, जल सुरक्षा और आजीविका का आधार भी हैं, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।
शैक्षणिक सत्र और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन
कार्यक्रम के शैक्षणिक सत्र के दौरान दूरदर्शन द्वारा निर्मित वेटलैंड्स पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इस डॉक्यूमेंट्री में आर्द्रभूमि की जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया गया। छात्रों और कैडेटों ने इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से वेटलैंड्स के वैश्विक और स्थानीय परिदृश्य को बेहतर ढंग से समझा।
पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा
डॉक्यूमेंट्री के बाद भूगोल विभाग की प्रमुख असिस्टेंट प्रोफेसर रेनी अल्मा लकड़ा ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वेटलैंड्स के पारिस्थितिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व को समझाते हुए विशेष रूप से स्वदेशी समुदायों द्वारा अपनाई गई पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्राकृतिक संसाधनों के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीता आया है और उनकी पारंपरिक प्रथाएं आज भी संरक्षण के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती हैं।
एनसीसी की भूमिका और युवाओं से अपील
सेमिनार सत्र का समापन एनसीसी प्रमुख असिस्टेंट प्रोफेसर रोशन किशोर गिध के समापन भाषण से हुआ। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में अनुशासन, युवा भागीदारी और सामुदायिक सेवा की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने एनसीसी कैडेटों और कॉलेज के छात्रों से अपील की कि वे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए केवल चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि व्यवहारिक स्तर पर भी जिम्मेदारी निभाएं।
असिस्टेंट प्रोफेसर रोशन किशोर गिध ने कहा: “युवाओं की सक्रिय भागीदारी और अनुशासन ही पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन बना सकता है।”
वृक्षारोपण अभियान से जुड़ा व्यावहारिक संदेश
सेमिनार के बाद छात्रों, एनसीसी कैडेटों और संकाय सदस्यों ने खिजरि पहाड़ी के पास एक तालाब के समीप वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया। इस दौरान कई पौधे लगाए गए, जिससे आर्द्रभूमि संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। यह अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यावहारिक प्रतिबद्धता का उदाहरण बना।
छात्रों और कैडेटों में बढ़ी जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान छात्रों और एनसीसी कैडेटों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और वेटलैंड्स के महत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न भी किए। आयोजन ने उनके भीतर पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया और यह समझ विकसित की कि संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी से ही संभव है।
शिक्षा, संस्कृति और पर्यावरण का संगम
सेंट जेवियर्स कॉलेज में विश्व आर्द्रभूमि दिवस का यह आयोजन शिक्षा, संस्कृति और पर्यावरणीय प्रबंधन को जोड़ने वाली एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आया। इसने यह स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थान केवल ज्ञान देने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण इकाई भी हैं।
न्यूज़ देखो: संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल
सेंट जेवियर्स कॉलेज का यह आयोजन दिखाता है कि शैक्षणिक संस्थान पर्यावरण संरक्षण में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का समन्वय वेटलैंड्स संरक्षण के लिए एक प्रभावी मॉडल बन सकता है। सवाल यह है कि क्या ऐसी पहलें अन्य संस्थानों तक भी पहुंचेंगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी साझा करें
आर्द्रभूमि हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
इनका संरक्षण आज नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
युवाओं की जागरूकता ही सतत विकास की सबसे बड़ी ताकत है।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाएं।







