संत जेवियर महाविद्यालय सिमडेगा में वाणिज्य विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय बजट 2026 और डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पर विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित

संत जेवियर महाविद्यालय सिमडेगा में वाणिज्य विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय बजट 2026 और डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पर विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित

author Satyam Kumar Keshri
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#सिमडेगा #शैक्षणिक_कार्यक्रम : वाणिज्य विभाग ने बजट 2026 और डॉ कलाम के जीवन पर वीडियो सत्र आयोजित किया।

संत जेवियर महाविद्यालय, सिमडेगा के वाणिज्य विभाग द्वारा बीकॉम सेमेस्टर सात और सेमेस्टर दो के लगभग 80 विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक वीडियो सत्र आयोजित किया गया। सत्र में केंद्रीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेरक जीवन पर आधारित प्रस्तुतियां दिखाई गईं। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार गुप्ता ने किया।

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  • कार्यक्रम में बीकॉम सेमेस्टर VII एवं सेमेस्टर II के लगभग 80 विद्यार्थी शामिल हुए।
  • संचालन विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार गुप्ता द्वारा किया गया।
  • विद्यार्थियों को केंद्रीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं पर आधारित वीडियो दिखाया गया।
  • सत्र के दूसरे भाग में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन व विचारों पर प्रस्तुति।
  • विद्यार्थियों ने सत्र को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।

संत जेवियर महाविद्यालय, सिमडेगा के वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष शैक्षणिक सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को समसामयिक आर्थिक विषयों और प्रेरक व्यक्तित्वों से जोड़ना था। कार्यक्रम में बीकॉम सेमेस्टर सात और सेमेस्टर दो के लगभग 80 विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। सत्र के माध्यम से छात्रों को आर्थिक नीतियों की समझ के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की प्रेरणा भी प्रदान की गई।

केंद्रीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं पर चर्चा

कार्यक्रम के प्रथम चरण में विद्यार्थियों को भारतीय संघीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं एवं महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित शैक्षणिक वीडियो प्रदर्शित किया गया। वीडियो के माध्यम से छात्रों को सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं, विभिन्न क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित योजनाओं तथा संभावित आर्थिक प्रभावों की जानकारी दी गई।

इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज होता है। वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए यह सत्र विशेष रूप से उपयोगी रहा, क्योंकि इससे उन्हें वित्तीय नीतियों और व्यावहारिक अर्थशास्त्र के बीच संबंध को समझने में मदद मिली।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा

सत्र के दूसरे भाग में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और उनके प्रेरणादायक विचारों पर आधारित वीडियो प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति में उनके संघर्ष, वैज्ञानिक उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रनिर्माण के प्रति समर्पण को रेखांकित किया गया।

विशेष रूप से उनके यूरोपीय संघ में दिए गए संदेश पर चर्चा की गई, जिसमें उन्होंने कहा:

“जब हृदय में धर्म (मजबूत मूल्य, ईमानदारी, सच्चाई और करुणा), तो चरित्र में सौंदर्य होता है। जब चरित्र में सौंदर्य होता है, तो घर में सामंजस्य होता है। जब घर में सामंजस्य होता है, तो राष्ट्र में व्यवस्था होती है। जब राष्ट्र में व्यवस्था होती है, तो विश्व में शांति होती है।”

इस संदेश के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि व्यक्तिगत मूल्यों का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह परिवार, समाज और राष्ट्र तक पहुंचता है।

मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में पहल

विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार गुप्ता के संचालन में आयोजित इस सत्र ने विद्यार्थियों को ज्ञान और प्रेरणा दोनों प्रदान किए। आर्थिक समझ के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश शिक्षा को अधिक सार्थक बनाता है।

विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार के सत्र पाठ्यक्रम से परे जाकर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होते हैं।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में समसामयिकता और मूल्य दोनों जरूरी

यह सत्र दर्शाता है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान ही नहीं, बल्कि समसामयिक आर्थिक विषयों और प्रेरक व्यक्तित्वों को भी स्थान दिया जाना चाहिए। केंद्रीय बजट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समझ विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टि देती है, वहीं डॉ कलाम जैसे व्यक्तित्व उनके भीतर नैतिक आधार मजबूत करते हैं। शिक्षा का यही संतुलन भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

ज्ञान और मूल्यों से ही बनता है उज्ज्वल भविष्य

आर्थिक समझ आपको पेशेवर रूप से सक्षम बनाती है,
और नैतिक मूल्य आपको एक बेहतर इंसान बनाते हैं।
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि दृष्टिकोण देना है।
ऐसे शैक्षणिक प्रयासों को बढ़ावा देना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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