#गढ़वा #नगरनिकायचुनाव : शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने हेतु प्रशासन का कड़ा फैसला।
गढ़वा जिले में आगामी नगर निकाय चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार द्वारा गढ़वा नगर परिषद एवं मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इस आदेश के तहत चुनाव अवधि में सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और अनावश्यक जमावड़े पर रोक रहेगी। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए मतदाताओं को निर्भय होकर मतदान का अवसर देना है।
- गढ़वा नगर परिषद और मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू।
- बीएनएसएस की धारा 163 के तहत सभा, जुलूस व धरना-प्रदर्शन पर रोक।
- हेट स्पीच, धार्मिक उन्माद और जातीय वैमनस्य को गंभीर अपराध माना जाएगा।
- अस्त्र-शस्त्र, लाठी-डंडा और आपत्तिजनक वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध।
- डीजे, अनावश्यक जमावड़ा और शांति भंग गतिविधियों पर सख्ती।
- उल्लंघन पर विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की चेतावनी।
गढ़वा जिले में नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार द्वारा गढ़वा नगर परिषद एवं मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता, भय या अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
धारा 163 के तहत सख्त प्रतिबंध
जारी आदेश के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के अंतर्गत बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन अथवा रैली पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। चुनावी माहौल में अक्सर भीड़ जुटने और शक्ति प्रदर्शन की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
अस्त्र-शस्त्र और आपत्तिजनक वस्तुओं पर रोक
निषेधाज्ञा के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा अस्त्र-शस्त्र, लाठी-डंडा, हथियार या अन्य आपत्तिजनक वस्तु लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का मानना है कि ऐसे तत्वों की मौजूदगी से भय का माहौल बन सकता है और शांति भंग होने की आशंका रहती है। इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह निर्णय लिया गया है।
हेट स्पीच और धार्मिक उन्माद पर सख्ती
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच), धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर चुनावी लाभ लेने का प्रयास, या जाति-धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने की कोशिश को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विभाजनकारी राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है और शांति भंग करने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीजे और अनावश्यक जमावड़े पर प्रतिबंध
निषेधाज्ञा के तहत डीजे बजाने, तेज आवाज में प्रचार और अनावश्यक भीड़ जुटाने पर भी पाबंदी लगाई गई है। चुनाव के दौरान अक्सर ध्वनि प्रदूषण और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी होती है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।
प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से अपील
अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार ने आम नागरिकों, चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों और सभी राजनीतिक दलों से निषेधाज्ञा का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विधि सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “प्रशासन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना है। सभी नागरिक और प्रत्याशी नियमों का पालन करें, ताकि लोकतंत्र की इस प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास और मजबूत हो।”
भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने की कोशिश
प्रशासन का यह निर्णय मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निषेधाज्ञा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदाता किसी दबाव, डर या प्रलोभन के बिना अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
प्रशासनिक तैयारियां और निगरानी
निषेधाज्ञा लागू होने के साथ-साथ प्रशासन द्वारा निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। पुलिस और दंडाधिकारी लगातार क्षेत्र में गश्त करेंगे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
न्यूज़ देखो: चुनावी शुचिता के लिए जरूरी सख्ती
गढ़वा में निषेधाज्ञा लागू करना यह दर्शाता है कि प्रशासन चुनावी शुचिता को लेकर गंभीर है। हेट स्पीच, धार्मिक उन्माद और शक्ति प्रदर्शन पर रोक लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमों का पालन जमीन पर कितना प्रभावी ढंग से होता है। प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की मजबूती में आपकी भूमिका अहम
चुनाव केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सहभागिता से ही सफल होते हैं। अफवाहों से दूर रहें, नियमों का पालन करें और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें। निष्पक्ष मतदान से ही मजबूत लोकतंत्र का निर्माण होता है। इस जानकारी को साझा करें, लोगों को जागरूक करें और भयमुक्त चुनाव की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।







