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नेपाल की अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में संत मरियम विद्यालय के छात्रों ने रचा इतिहास

#मेदिनीनगर #खेल_उपलब्धि : नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में संत मरियम विद्यालय के छात्रों ने पदक जीतकर देश और विद्यालय का मान बढ़ाया।

नेपाल के कंचनपुर स्थित महेन्द्रनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में मेदिनीनगर के संत मरियम विद्यालय के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 24 और 25 जनवरी 2026 को हुई इस प्रतियोगिता में छात्रों ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विभिन्न देशों के कराटेकारों के बीच दमदार मुकाबलों में छात्रों की जीत ने झारखंड के खेल जगत को गौरवान्वित किया। यह उपलब्धि विद्यालय और प्रशिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।

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  • संत मरियम विद्यालय, मेदिनीनगर के तीन छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते।
  • प्रतियोगिता का आयोजन कंचनपुर, महेन्द्रनगर (नेपाल) में हुआ।
  • गौरव कुमार सिंह ने स्वर्ण, रीतिक कुमार सिंह और युवराज कोरवा ने रजत पदक जीता।
  • मुकाबले में बांग्लादेश, मलेशिया, पाकिस्तान, नेपाल सहित कई देशों के खिलाड़ी शामिल।
  • टीम का नेतृत्व क्योशि डॉ. संतोष कुमार ने किया।
  • प्रतियोगिता 24–25 जनवरी 2026 को आयोजित हुई।

नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में संत मरियम विद्यालय, मेदिनीनगर के छात्रों ने जिस तरह से प्रदर्शन किया, उसने न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व का अवसर प्रदान किया। यह प्रतियोगिता जापान कराटे-डू कोहशी-काई शितो-रियू एसोसिएशन ऑफ नेपाल के तत्वावधान में आयोजित की गई थी, जिसमें विश्व के कई देशों के प्रतिभाशाली कराटेकारों ने हिस्सा लिया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय छात्रों का दमदार प्रदर्शन

स्पोर्ट्स इंडोर स्टेडियम, कंचनपुर, महेन्द्रनगर (नेपाल) में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा नेपाल, श्रीलंका, भूटान, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, जापान, चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। इतने बड़े स्तर की प्रतियोगिता में संत मरियम विद्यालय के छात्रों का पदक जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

पदक विजेताओं ने बढ़ाया मान

प्रतियोगिता में गौरव कुमार सिंह ने अपने वेट कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं रीतिक कुमार सिंह और युवराज कोरवा ने कठिन मुकाबलों के बाद रजत पदक अपने नाम किए। तीनों खिलाड़ियों ने बांग्लादेश, मलेशिया, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों के अनुभवी कराटेकारों को पराजित कर अपनी क्षमता साबित की।

कठिन मुकाबलों में दिखाई तकनीक और आत्मविश्वास

चैंपियनशिप के दौरान छात्रों ने अपनी फुर्ती, संतुलन और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। हर मुकाबले में उनकी रणनीति और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से नजर आया। निर्णायकों और दर्शकों ने भी भारतीय खिलाड़ियों की तकनीक और अनुशासन की सराहना की।

टीम नेतृत्व और प्रबंधन की अहम भूमिका

भारतीय टीम का नेतृत्व क्योशि डॉ. संतोष कुमार ने किया, जिनके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी की थी। वहीं टीम मैनेजर के रूप में सेन्साई शमशेर अंसारी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे दौरे के दौरान खिलाड़ियों का मनोबल बनाए रखा और व्यवस्थाओं को संभाला।

क्योशि डॉ. संतोष कुमार ने कहा: “यह सफलता खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। इन बच्चों ने यह साबित कर दिया कि झारखंड के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।”

विद्यालय और अभिभावकों में खुशी का माहौल

छात्रों की इस उपलब्धि पर संत मरियम विद्यालय के प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विद्यालय प्रबंधन ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। अभिभावकों ने भी बच्चों की मेहनत और प्रशिक्षकों के योगदान की सराहना की।

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खेलों के प्रति बढ़ती जागरूकता

इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छात्र भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। कराटे जैसे खेल न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान करते हैं, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं।

न्यूज़ देखो: झारखंड के खेल भविष्य की मजबूत नींव

संत मरियम विद्यालय के छात्रों की यह सफलता झारखंड में खेल प्रतिभाओं की संभावनाओं को उजागर करती है। यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि समर्पित प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। अब जरूरत है कि प्रशासन और खेल संगठनों द्वारा ऐसे खिलाड़ियों को और बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मेहनत, अनुशासन और सपनों की जीत

यह उपलब्धि केवल तीन पदकों की कहानी नहीं, बल्कि उन सपनों की जीत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मंच तक पहुंचे। खेलों को प्रोत्साहन दें, खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएं और सकारात्मक माहौल बनाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस प्रेरक खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और खेल प्रतिभाओं के समर्थन में आवाज उठाएं।

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