सिमडेगा में उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण: अनुज्ञप्तिधारकों को कड़ी चेतावनी

सिमडेगा में उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण: अनुज्ञप्तिधारकों को कड़ी चेतावनी

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #कृषि_निरीक्षण : किसानों से अधिक दर वसूलने और कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई
  • उपायुक्त सिमडेगा के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम का औचक निरीक्षण।
  • जलडेगा और बानो प्रखंड के उर्वरक, बीज और कीटनाशी प्रतिष्ठान जांचे गए।
  • अनुज्ञप्तिधारकों को निर्धारित दर से अधिक बिक्री न करने की चेतावनी।
  • कालाबाजारी और जमाखोरी पर अनुज्ञप्ति रद्द करने का अल्टीमेटम।
  • प्रतिष्ठानों में नाम, भंडार तालिका और दर तालिका प्रदर्शित करने का निर्देश।

सिमडेगा। जिले में किसानों को पारदर्शी और न्यायपूर्ण ढंग से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला कृषि पदाधिकारी श्रीमती माधुरी टोप्पो और कृषि निरीक्षक श्री शंकर प्रसाद ने अपनी टीम के साथ जलडेगा एवं बानो प्रखंड क्षेत्र में स्थित उर्वरक, बीज और कीटनाशी दुकानों का औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई उपायुक्त सिमडेगा के निर्देश और विभागीय आदेशों के अनुपालन में की गई।

कालाबाजारी पर होगी कठोर कार्रवाई

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सभी अनुज्ञप्तिधारकों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में किसानों से सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री नहीं की जाएगी। यदि कोई दुकानदार कालाबाजारी, जमाखोरी या बिना पॉस मशीन एंट्री के उर्वरक बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत अनुज्ञप्ति रद्द करने सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता और सुविधा पर जोर

टीम ने दुकानदारों को निर्देश दिया कि अपने प्रतिष्ठान पर नाम, भंडार तालिका और दर तालिका स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। साथ ही किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार ही उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करें, ताकि सभी किसानों को आसानी से और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध हो सके।

न्यूज़ देखो: किसानों के हित में सख्ती जरूरी

किसानों की बदहाल स्थिति का सबसे बड़ा कारण अक्सर उर्वरकों और बीजों की कालाबाजारी बनती है। सिमडेगा प्रशासन की यह पहल किसानों को राहत दिलाने और बिचौलियों पर शिकंजा कसने की दिशा में एक ठोस कदम है। सवाल यह है कि क्या आगे भी इसी तरह निगरानी बरकरार रह पाएगी?
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब किसानों की बारी जागरूक होने की

किसानों को भी चाहिए कि वे सरकारी दर से अधिक कीमत पर उर्वरक खरीदने से इनकार करें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। अब समय है कि किसान और प्रशासन मिलकर कालाबाजारी की इस कड़ी को तोड़ें। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि जागरूकता फैले।

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सिमडेगा

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