
#सिमडेगा #स्वामीविवेकानंदजयंती : सलडेगा स्थित विद्यालय परिसर में बच्चों और आचार्यों ने प्रेरक वातावरण में जयंती मनाई।
सिमडेगा जिले के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में स्वामी विवेकानंद जयंती श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ मनाई गई। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित इस विद्यालय में विद्यार्थियों और आचार्यों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम और आत्मविकास की भावना को सुदृढ़ करना रहा।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में हुआ आयोजन।
- स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन।
- वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई द्वारा संचालित विद्यालय।
- आचार्य-आचार्याओं ने जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण पर विचार रखे।
- भैया-बहनों ने अनुशासन, सेवा भाव और सकारात्मक सोच का संकल्प लिया।
सिमडेगा जिले के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सोमवार को स्वामी विवेकानंद जयंती का आयोजन पूरे श्रद्धा और अनुशासन के वातावरण में किया गया। विद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सभी आचार्य-आचार्याओं के साथ भैया-बहनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ना और उन्हें जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना रहा।
पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर पूरे विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक और प्रेरणादायी वातावरण बना रहा। विद्यार्थियों ने श्रद्धाभाव के साथ स्वामी विवेकानंद को नमन किया और उनके विचारों को स्मरण किया। आयोजन की शुरुआत ने कार्यक्रम को एक गंभीर और उद्देश्यपूर्ण दिशा प्रदान की।
आचार्य-आचार्याओं ने रखा स्वामी विवेकानंद के विचारों का महत्व
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के आचार्य-आचार्याओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों, उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और चरित्र निर्माण का मार्ग दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि आज के विद्यार्थियों के लिए विवेकानंद के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।
आचार्य-आचार्याओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना है। स्वामी विवेकानंद का जीवन इसी विचार का सशक्त उदाहरण है, जहां उन्होंने सेवा भाव और राष्ट्रभक्ति को जीवन का आधार बनाया।
“उठो, जागो” के संदेश से विद्यार्थियों को मिली दिशा
कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के प्रेरक वचनों, विशेषकर “उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको” पर विशेष चर्चा की गई। आचार्यों ने विद्यार्थियों को समझाया कि यह संदेश केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। इससे विद्यार्थियों में लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस विकसित होता है।
भैया-बहनों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के भैया-बहनों ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। उन्होंने समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने तथा सदैव सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का अनुशासित और श्रद्धापूर्ण व्यवहार आयोजन की गरिमा को दर्शाता रहा।
नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की भावना हुई सुदृढ़
विद्यालय परिवार के समस्त आचार्य-आचार्याओं एवं भैया-बहनों की गरिमामयी उपस्थिति से यह आयोजन अत्यंत सफल और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने बच्चों में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम और आत्मविकास की भावना को और अधिक मजबूत किया। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण का संदेश
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा। स्वामी विवेकानंद के विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा के साथ संस्कार और सेवा भाव का समन्वय ही समाज को सही दिशा दे सकता है।
न्यूज़ देखो: संस्कारयुक्त शिक्षा की मजबूत पहल
सलडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में मनाई गई स्वामी विवेकानंद जयंती यह दर्शाती है कि विद्यालय स्तर पर संस्कारयुक्त शिक्षा को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। ऐसे आयोजन बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों को बच्चों के जीवन से जोड़ना भविष्य के समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण की यह पहल अनुकरणीय है।
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विचारवान बालक ही बनाते हैं सशक्त राष्ट्र
बचपन में मिले संस्कार जीवन भर दिशा देते हैं।
स्वामी विवेकानंद के आदर्श बच्चों को आत्मविश्वास और सेवा भाव सिखाते हैं।
विद्यालयों में ऐसे आयोजन भविष्य की पीढ़ी को मजबूत बनाते हैं।
जरूरत है कि शिक्षा के साथ मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाए।




