
#पलामू #शैक्षणिक_कार्यक्रम : महाविद्यालय परिसर में दीप प्रज्वलन संग विवेकानंद के विचारों पर हुआ प्रेरक विमर्श।
पलामू जिले के रेहला स्थित संत तुलसीदास महाविद्यालय परिसर में आज स्वामी विवेकानंद जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की, जबकि संचालन राकेश शुक्ला ने किया। शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने पर जोर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण और आत्मविकास की दिशा में प्रेरित करना रहा।
- संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला में आयोजित हुआ स्वामी विवेकानंद जयंती कार्यक्रम।
- प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने विवेकानंद के विचारों को जीवन में उतारने की बात कही।
- डॉ श्याम मिश्रा ने स्वामी विवेकानंद को भारत का सच्चा महापुरुष बताया।
- शिक्षकों और दर्जनों छात्र-छात्राओं ने अपने विचार साझा किए।
- मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ।
पलामू जिले के रेहला प्रखंड स्थित संत तुलसीदास महाविद्यालय के प्रांगण में सोमवार को स्वामी विवेकानंद जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों, आदर्शों और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराना था, ताकि वे अपने जीवन में सकारात्मक दिशा अपनाकर समाज और देश के लिए योगदान दे सकें।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में शैक्षणिक वातावरण के साथ प्रेरणादायक चर्चा देखने को मिली। शिक्षकगण और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने विवेकानंद के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताया।
अध्यक्षीय संबोधन में विवेकानंद के विचारों पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके विचार आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, अनुशासन और कर्तव्यबोध के बिना जीवन में आगे बढ़ना संभव नहीं है।
प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने कहा:
“स्वामी विवेकानंद के विचारों और जीवन को आत्मसात कर ही व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है। सभी छात्र-छात्राओं को उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करना चाहिए।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज सेवा को भी अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।
विवेकानंद के विचार अनुकरणीय: डॉ श्याम मिश्रा
कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ श्याम मिश्रा ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।
डॉ श्याम मिश्रा ने कहा:
“स्वामी विवेकानंद के विचार इतने गहन और प्रेरक हैं कि एक-एक विचार पढ़ने के बाद भी आगे पढ़ने और समझने की जिज्ञासा बनी रहती है। सही अर्थों में वे भारत के सच्चे महापुरुष थे।”
उन्होंने युवाओं से विवेकानंद के ग्रंथों और भाषणों को पढ़ने की अपील की और कहा कि इससे आत्मबल और राष्ट्रप्रेम दोनों मजबूत होते हैं।
शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में महाविद्यालय के कई शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपस्थित प्रमुख लोगों में डॉ सुनील यादव, शशि रंजन सिंह, रंजन दुबे, संतोष शुक्ला, प्रधान सहायक अमित कुमार, रामेश्वर राम, संगीता कुमारी, जितेंद्र पाठक, सुधीर यादव और गुंजन पासवान शामिल थे।
सभी ने अपने विचारों के माध्यम से छात्रों को आत्मनिर्भर, अनुशासित और राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
छात्र-छात्राओं ने रखे प्रेरक विचार
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। अंजली कुमारी, सौरव कुमार, पीयूष रंजन दुबे, अनामिका कुमारी, शोभा कुमारी, रीना कुमारी सहित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन, युवाओं की भूमिका और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।
छात्रों ने कहा कि विवेकानंद के विचार उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने का साहस प्रदान करते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना कार्यक्रम
पूरा कार्यक्रम अनुशासन, श्रद्धा और प्रेरणा के वातावरण में संपन्न हुआ। वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद को केवल एक संत नहीं, बल्कि युवा चेतना का प्रतीक बताया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यदि युवा वर्ग विवेकानंद के विचारों को अपनाए, तो समाज और राष्ट्र दोनों का सकारात्मक रूप से निर्माण हो सकता है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण का संदेश
संत तुलसीदास महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की भी सीख देता है। विवेकानंद जयंती जैसे आयोजन छात्रों को आत्मचिंतन और लक्ष्य निर्धारण की दिशा में प्रेरित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता शिक्षा संस्थानों में आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
युवा चेतना को दिशा देने का संकल्प
स्वामी विवेकानंद का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत। युवाओं को चाहिए कि वे आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का आधार बनाएं। अपनी राय साझा करें, इस प्रेरक खबर को आगे बढ़ाएं और सकारात्मक विचारों की लौ को समाज तक पहुंचाएं।





