
#गिरिडीह #मजदूर_मुद्दा : फैक्ट्री से निकाले गए श्रमिकों की बहाली और समस्याओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।
गिरिडीह में बालमुकुंद स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों की समस्या को लेकर शुक्रवार को श्रम कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। सहायक श्रमायुक्त रवि शंकर और श्रम अधीक्षक की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रबंधन तथा मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। बैठक में मजदूरों को पुनः काम पर रखने के मुद्दे पर चर्चा की गई। इस मामले पर आगे की बातचीत के लिए 9 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे फिर बैठक तय की गई है।
- बालमुकुंद स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों के मुद्दे पर श्रम कार्यालय में बैठक।
- बैठक में सहायक श्रमायुक्त रवि शंकर और श्रम अधीक्षक की मौजूदगी रही।
- फैक्ट्री प्रबंधन और असंगठित मजदूर मोर्चा, भाकपा माले प्रतिनिधि भी वार्ता में शामिल।
- मजदूरों को दोबारा काम पर रखने को लेकर चर्चा।
- मामले पर अगली वार्ता 9 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे तय।
गिरिडीह में स्थित बालमुकुंद स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों की समस्या को लेकर शुक्रवार को श्रम कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सहायक श्रमायुक्त रवि शंकर, श्रम अधीक्षक, फैक्ट्री प्रबंधन के प्रतिनिधि और विभिन्न मजदूर संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य मजदूरों की समस्याओं को सुनना और उन्हें दोबारा काम पर रखने के मुद्दे पर समाधान तलाशना था।
श्रम कार्यालय में अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा
बैठक में सहायक श्रमायुक्त रवि शंकर और श्रम अधीक्षक की उपस्थिति में फैक्ट्री प्रबंधन और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मजदूरों की बहाली, काम की स्थिति और अन्य समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में असंगठित मजदूर मोर्चा के सचिव कन्हैया पांडेय, अध्यक्ष किशोर राय, भाकपा माले प्रखंड कमिटी सचिव मसूदन कोल्ह और भाकपा माले नगर के नेता राजेश सिन्हा भी मौजूद रहे।
बैठक में यह तय किया गया कि मजदूरों को दोबारा काम पर रखने के मुद्दे पर आगे की बातचीत जारी रखी जाएगी। इसके लिए 9 मार्च 2026 को दिन के 12 बजे फिर से बैठक आयोजित की जाएगी।
मजदूरों की बहाली को लेकर उठी मांग
बैठक में मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों को दोबारा काम पर रखने की मांग उठाई। उनका कहना था कि मजदूरों को बिना पर्याप्त कारण के काम से हटाया गया है, जिससे कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि श्रमिकों को उनके अधिकारों और सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मजदूरों को सुरक्षित कार्य वातावरण और उचित मानदेय मिलना जरूरी है।
असंगठित मजदूर मोर्चा के सचिव कन्हैया पांडेय ने कहा: “गिरिडीह की फैक्ट्रियों में मजदूरों के साथ लगातार उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है। बालमुकुंद फैक्ट्री में भी मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि फैक्ट्री में प्रदूषण की स्थिति भी चिंताजनक है, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
प्रदूषण और मजदूरों के मुद्दे पर उठे सवाल
बैठक के दौरान मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने फैक्ट्री से जुड़े प्रदूषण के मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है और इसका असर स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर पड़ रहा है।
कन्हैया पांडेय ने कहा: “प्रदूषण के मामले में इस फैक्ट्री की स्थिति सबसे खराब है, लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब मजदूर अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन करते हैं तो उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि वे न्यायालय का सम्मान करते हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूर विरोधी रवैये का आरोप
बैठक में भाकपा माले के नगर नेता राजेश सिन्हा ने भी फैक्ट्री प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों से काम तो करवाता है, लेकिन उन्हें उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं दी जाती हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री का मालिक और मैनेजमेंट दोनों मजदूर विरोधी रवैया अपना रहे हैं। मजदूरों से काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें बेहतर वेतन और सुविधाएं नहीं मिलती हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि गिरिडीह में प्रदूषण की समस्या को लेकर प्रशासन और कई जनप्रतिनिधि गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
उसरी नदी के पानी के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान राजेश सिन्हा ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि बाला जी प्लांट द्वारा रात में मोटर लगाकर उसरी नदी का पानी निकाला जा रहा है।
उनका कहना था कि इस मामले की भी जांच होनी चाहिए क्योंकि इससे पर्यावरण और जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
मजदूरों और जनता को मिलकर करना होगा संघर्ष
बैठक के अंत में मसूदन कोल्ह और किशोर राय ने कहा कि मजदूरों और आम जनता को मिलकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।
मसूदन कोल्ह और किशोर राय ने कहा: “लगभग सभी फैक्ट्रियों में मजदूरों की स्थिति समान है। इसलिए मजदूरों और जनता के बेहतर तालमेल से ही आंदोलन को मजबूत बनाया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास जरूरी है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
न्यूज़ देखो: मजदूरों के मुद्दों पर गंभीर पहल जरूरी
बालमुकुंद स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्री से जुड़े मजदूरों की समस्याएं केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति को भी उजागर करती हैं। मजदूरों को सुरक्षित काम का माहौल, उचित वेतन और सम्मानजनक व्यवहार मिलना बेहद जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभागों को इन मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि मजदूरों और उद्योगों के बीच संतुलन बना रहे।
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मजदूरों का सम्मान ही उद्योगों की असली ताकत
किसी भी उद्योग की सफलता उसके मजदूरों की मेहनत पर टिकी होती है। यदि मजदूरों को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी तो उद्योगों का विकास भी संभव नहीं है।
इसलिए जरूरी है कि मजदूरों के अधिकारों और समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां श्रमिक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम कर सकें।
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