शिक्षक जीवन निर्माण की सबसे मजबूत कड़ी: अनुपम तिवारी

शिक्षक जीवन निर्माण की सबसे मजबूत कड़ी: अनुपम तिवारी

author Tirthraj Dubey
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#झारखंड #शिक्षकदिवस : अनुपम तिवारी ने लिखा प्रेरक आलेख, गुरु के महत्व और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर गहन विचार
  • हर वर्ष 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
  • यह दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • शिक्षक केवल ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र और जीवन मूल्यों का निर्माण करते हैं।
  • अनुपम तिवारी ने कहा— गुरु जीवन निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
  • राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार में शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि मानी गई।

5 सितंबर को शिक्षक दिवस पूरे देश में आभार और सम्मान की भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन हम उन शिक्षकों को नमन करते हैं, जिन्होंने हमारी शिक्षा ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन को आकार देने और सही दिशा दिखाने का काम किया है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिन, शिक्षा और संस्कार दोनों के महत्व की याद दिलाता है।

शिक्षक का असली स्वरूप

लेखक अनुपम तिवारी, पीएम श्री +2 उच्च विद्यालय रत्नाग, पांडु ने अपने आलेख में बताया कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे नैतिक मूल्यों, जीवन कौशल और सामाजिक संस्कारों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वे हमारे लिए मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणा स्रोत होते हैं।

उन्होंने एक प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख किया—

“एक बालक का जितना सुधार मां के पास नहीं हो सकता उतना सुधार पिता के पास होता है और जितना सुधार पिता के पास नहीं हो सकता, उससे ज्यादा सुधार एक शिक्षक के पास होता है।”

यही कारण है कि शिक्षक को जीवन निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका

इतिहास गवाह है कि हर महान व्यक्तित्व के पीछे एक शिक्षक का हाथ होता है। चाहे विज्ञान हो, साहित्य, कला या राजनीति—हर क्षेत्र में किसी न किसी गुरु की प्रेरणा ने व्यक्तियों को महानता की ओर अग्रसर किया।

अनुपम तिवारी लिखते हैं कि शिक्षक केवल छात्रों के जीवन को नहीं संवारते, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को दिशा देते हैं। उनकी भूमिका शिक्षा तक सीमित नहीं होती, वे राष्ट्र निर्माण के वास्तविक शिल्पकार होते हैं।

गुरु का सम्मान क्यों ज़रूरी

समाज तभी मजबूत हो सकता है, जब शिक्षा की नींव मजबूत हो। और शिक्षा तभी फलती-फूलती है जब शिक्षक का आदर और सम्मान किया जाए। आज के दौर में यह आवश्यक है कि हम अपने शिक्षकों के योगदान को याद रखें और उन्हें उनका उचित स्थान दें।

न्यूज़ देखो: शिक्षा ही असली शक्ति

शिक्षक दिवस का यह संदेश है कि शिक्षा और गुरु का सम्मान किए बिना कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता। शिक्षक ही वह दीपक हैं जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गुरु को दें जीवन में सर्वोच्च स्थान

शिक्षक दिवस हमें याद दिलाता है कि गुरु का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन भर करना चाहिए। अब समय है कि हम अपने शिक्षकों की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारें और समाज को नई दिशा दें।
अपनी राय कमेंट करें और इस आलेख को साझा करें ताकि गुरु के महत्व का संदेश दूर-दूर तक पहुँचे।

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Written by

पांडु, पलामू

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