कुष्ठ उन्मूलन के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ी: बानो प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला में मिली जागरूकता की सीख

कुष्ठ उन्मूलन के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ी: बानो प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला में मिली जागरूकता की सीख

author Shivnandan Baraik
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#सिमडेगा #स्वास्थ्य_जागरूकता : डॉ. मनोरंजन कुमार ने बताया रोग पहचान और उपचार की प्रक्रिया।
  • बानो प्रखंड स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षकों के साथ कुष्ठ रोग उन्मूलन पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की।
  • डॉ. मनोरंजन कुमार ने शिक्षकों से अपील की कि संदिग्ध व्यक्तियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजें।
  • 10 से 26 नवंबर तक विशेष कुष्ठ उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है।
  • कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण बताए गए – सुन्न अंग, टेढ़ापन, लाल दाग आदि
  • कार्यक्रम में दुति उरांव, विकास सरन, बालगोविंद पटेल, गणेश गोंझु समेत कई शिक्षक शामिल हुए।

बानो प्रखंड के शिक्षकों के बीच आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और शिक्षकों को इस अभियान में सक्रिय सहयोगी बनाना था। स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

शिक्षकों से की गई अपील

कार्यशाला को संबोधित करते हुए चिकित्सा प्रभारी डॉ. मनोरंजन कुमार ने कहा कि शिक्षकों का समाज में गहरा प्रभाव होता है, इसलिए वे गाँवों में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में कुष्ठ रोग के लक्षण — जैसे हाथ-पैर का सुन्न होना, अंगों का टेढ़ा हो जाना, या त्वचा पर लाल दाग दिखाई देना — दिखे, तो तुरंत उसे स्वास्थ्य उपकेंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजें।

डॉ. मनोरंजन कुमार ने कहा: “10 से 26 नवंबर तक पूरे प्रखंड में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस दौरान संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें मुफ्त और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षकों की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है।”

समाजिक जिम्मेदारी की पहल

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी इस अभियान में पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। दुति उरांव, विकास सरन, बालगोविंद पटेल और गणेश गोंझु सहित कई शिक्षकों ने कहा कि वे अपने विद्यालयों और आसपास के गाँवों में विद्यार्थियों और अभिभावकों को कुष्ठ रोग से संबंधित जानकारी देंगे।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन और शिक्षा जगत मिलकर काम करते हैं, तो जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रभावशाली परिवर्तन संभव होता है। ग्रामीण इलाकों में अब भी कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियाँ और सामाजिक दूरी बनी हुई है, जिसे समाप्त करने के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं।

न्यूज़ देखो: जनजागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज

कुष्ठ रोग आज भी ग्रामीण समाज में गलतफहमियों और छिपे डर का कारण है। स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान न केवल रोग पहचान और उपचार का माध्यम है, बल्कि समाज को एकजुट होकर रोग के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा भी देता है। शिक्षकों की भागीदारी इस प्रयास को और मजबूत बनाती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग समाज ही स्वस्थ समाज

अब समय है कि हम सभी मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता को गाँव-गाँव तक पहुँचाएं। शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मिलकर इस अभियान को सफल बना सकते हैं। सजग रहें, समय पर जांच कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और इस जागरूकता अभियान का हिस्सा बनें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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