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तेनार गांव में जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा, निकरा परियोजना के तहत अरहर और सरसों का प्रक्षेत्र दिवस आयोजित

#गढ़वा #जलवायुअनुकूलकृषि : निकरा परियोजना अंतर्गत किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत तेनार गांव में 21 फरवरी 2026 को जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निकरा परियोजना के तहत प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों के बीच अरहर प्रभेद आईपीए 203 और सरसों के उन्नत बीज का प्रत्यक्षण किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र गढ़वा और भाकृअनुप केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के सहयोग से किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई।

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  • 21 फरवरी 2026 को ग्राम तेनार, प्रखण्ड मेराल, जिला गढ़वा में प्रक्षेत्र दिवस आयोजित।
  • निकरा परियोजना के तहत अरहर प्रभेद आईपीए 203 का प्रत्यक्षण।
  • सरसों का उन्नत बीज प्रभेद आरएच 761 एवं पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर।
  • कार्यक्रम में लगभग 80 किसान हुए शामिल।
  • मुख्य भूमिका में केवीके गढ़वा के एसआरएफ नवलेश कुमार, वार्ड सदस्य विजय सिंह, प्रगतिशील किसान अशोक राम

गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित अंगीकृत ग्राम तेनार में जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। जलवायु अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (निकरा) परियोजना के अंतर्गत आयोजित प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज और पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम भाकृअनुप-केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद द्वारा संपोषित निकरा योजना के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को बदलते जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती के लिए तैयार करना है।

निकरा परियोजना के तहत हुआ प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन अंगीकृत ग्राम तेनार, पंचायत तेनार, प्रखंड मेराल, जिला गढ़वा में किया गया, जहां किसानों के बीच अरहर के उन्नत प्रभेद आईपीए 203 का प्रत्यक्षण कराया गया। प्रक्षेत्र दिवस के माध्यम से किसानों को यह दिखाया गया कि उन्नत किस्मों का उपयोग कर कम संसाधनों में अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

इस कार्यक्रम को भाकृअनुप-केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद द्वारा संपोषित किया गया, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से सीधे जोड़ने का अवसर मिला।

कृषि विज्ञान केन्द्र गढ़वा ने दी विस्तृत तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) गढ़वा के एसआरएफ श्री नवलेश कुमार ने निकरा परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक विधि से खेती करने, उन्नत बीज के चयन तथा पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा:

“जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए जलवायु अनुकूल खेती अपनाना समय की जरूरत है और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है।”

सरसों के उन्नत बीज और पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष जोर

निकरा योजना के तहत किसानों को सरसों के उन्नत बीज प्रभेद आरएच 761 का प्रत्यक्षण भी कराया गया। साथ ही पोषक तत्व प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

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प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने सूक्ष्म पोषक तत्व के रूप में सल्फर के उपयोग की भी जानकारी प्राप्त की और उसे खेतों में प्रयोग कर बेहतर फसल उत्पादन की तकनीक सीखी। किसानों ने सरसों के उन्नत प्रभेद का सफल प्रत्यक्षण कर कार्यक्रम के प्रति उत्साह दिखाया।

जनप्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने किया किसानों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम में वार्ड सदस्य विजय सिंह ने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी बनाएं। उन्होंने कहा कि जलवायु अनुकूल खेती आने वाले समय में किसानों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी।

वहीं प्रगतिशील किसान नवलेश कुमार ने किसानों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से बचने के उपाय बताते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का समावेश करने से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है।

संचालन और प्रचार-प्रसार पर दिया गया विशेष ध्यान

कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रगतिशील किसान अशोक राम ने उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के बीजों और तकनीकों को अन्य गांवों तक भी पहुंचाया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण में मिली जानकारी को व्यवहार में लागू करने की सलाह दी।

बड़ी संख्या में किसानों की सक्रिय भागीदारी

इस प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम में लगभग 80 किसानों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रमुख रूप से सरस्वती देवी, शिवशंकर राम, उदय सिंह, कुंदन राम सहित तेनार गांव के अनेक किसान उपस्थित रहे। किसानों ने कार्यक्रम के दौरान तकनीकी जानकारी प्राप्त की और जलवायु अनुकूल खेती के प्रति गहरी रुचि दिखाई।

किसानों ने बताया कि उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक तकनीकों से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार संभव है।

न्यूज़ देखो: बदलते मौसम में जलवायु अनुकूल खेती ही किसानों का सहारा

तेनार गांव में आयोजित यह प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक और जलवायु अनुकूल तकनीकों का समन्वय बेहद आवश्यक है। निकरा परियोजना जैसे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इस मॉडल को अन्य गांवों में भी लागू किया जाए तो कृषि उत्पादन में स्थिरता लाई जा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

वैज्ञानिक खेती अपनाएं, सुरक्षित भविष्य की खेती करें

बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के बीच जागरूक किसान ही सफल किसान बनते हैं।
उन्नत बीज, संतुलित पोषण और नई तकनीक से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
जरूरी है कि किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर नई जानकारी को खेतों में लागू करें।
गांव-गांव तक वैज्ञानिक खेती का विस्तार ही कृषि समृद्धि का मार्ग है।
आप भी ऐसी सकारात्मक कृषि पहल की जानकारी अधिक किसानों तक साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर जागरूकता फैलाएं।

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