
#लातेहार #आश्रम_विद्यालय : महुआडांड़ के बोहटा में निर्माण कार्य अधूरा — ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के बोहटा में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा आश्रम विद्यालय पिछले पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। गरीब और आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए शुरू की गई इस परियोजना का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से जांच की मांग की है।
- महुआडांड़ प्रखंड के बोहटा में करोड़ों की लागत से बन रहा आश्रम विद्यालय 5 साल से अधूरा।
- निर्माण का तैयार हिस्सा भी देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगा।
- ग्रामीणों ने जेई और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप लगाया।
- डीसी उत्कर्ष गुप्ता और डीडीसी डॉ. सैय्यद से जांच और कार्रवाई की मांग।
- स्कूल शुरू नहीं होने से आसपास के सैकड़ों आदिवासी बच्चों की शिक्षा प्रभावित।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत बोहटा गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा आश्रम विद्यालय पिछले पांच वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। जिस विद्यालय का निर्माण क्षेत्र के गरीब और आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा था, वह अब तक पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना पर भारी राशि खर्च होने के बावजूद विद्यालय का संचालन शुरू नहीं किया जा सका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय का जो हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है, वह भी लंबे समय से उपयोग और रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। कई जगहों पर भवन की स्थिति खराब होने लगी है, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं यह भवन समय के साथ पूरी तरह खंडहर में न बदल जाए।
निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय निर्माण कार्य में कई तरह की अनियमितताएं बरती गई हैं। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्य की गति दोनों ही संदिग्ध दिखाई देते हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण स्थल की नियमित निगरानी नहीं की जाती है। आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी शायद ही कभी मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं। इसी वजह से निर्माण कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो पा रहा है।
कुछ ग्रामीणों ने विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) और ठेकेदार के बीच मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निगरानी की कमी के कारण ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर रहा है, जिसके चलते पांच वर्षों के बाद भी विद्यालय का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है।
शिक्षा से वंचित हो रहे सैकड़ों बच्चे
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आश्रम विद्यालय के शुरू होने से आसपास के कई गांवों के बच्चों को शिक्षा का बेहतर अवसर मिल सकता था। विशेष रूप से आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इससे काफी लाभ मिलने की उम्मीद थी।
ग्रामीणों के अनुसार यदि विद्यालय समय पर बनकर तैयार हो जाता तो क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा मिल सकती थी। लेकिन निर्माण कार्य में देरी और लापरवाही के कारण बच्चे आज भी बेहतर शिक्षा की उम्मीद लगाए हुए हैं।
जिला प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने जिले के उपायुक्त (डीसी) उत्कर्ष गुप्ता और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) डॉ. सैय्यद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की बर्बादी और बढ़ सकती है। उन्होंने मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की गई राशि की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
आरोपों के बीच जारी है निर्माण कार्य
हैरानी की बात यह है कि इतने आरोपों और सवालों के बावजूद निर्माण कार्य अभी भी जारी बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की सही तरीके से निगरानी नहीं की गई तो भविष्य में भी इस परियोजना के समय पर पूरा होने को लेकर संदेह बना रहेगा।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही जांच कराएगा और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई करेगा, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से आम लोगों तक पहुंच सके।
न्यूज़ देखो: विकास योजनाओं में पारदर्शिता क्यों जरूरी
महुआडांड़ के बोहटा में अधूरा पड़ा आश्रम विद्यालय केवल एक निर्माण परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े कई सवाल भी खड़े करता है। जब शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं, तो उसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आश्रम विद्यालय जैसे संस्थान शिक्षा के अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य में देरी या अनियमितता की शिकायतें सामने आना चिंताजनक है। यह जरूरी है कि प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के जरूरतमंद वर्ग तक पहुंच सके।
जागरूक समाज से ही बदलती है व्यवस्था
जब नागरिक अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हैं और प्रशासन से जवाबदेही मांगते हैं, तभी व्यवस्था में सुधार की संभावना बढ़ती है। विकास योजनाओं की निगरानी में जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
जरूरी है कि समाज के लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और जनहित के मुद्दों को रचनात्मक तरीके से उठाएं। आपकी जागरूकता ही बेहतर व्यवस्था की दिशा में पहला कदम है।
अगर आपके क्षेत्र में भी ऐसी कोई समस्या है, तो हमें जरूर बताएं। आपकी आवाज को मंच देने के लिए ‘न्यूज़ देखो’ हमेशा आपके साथ है।






