Palamau

फुलिया–बरवाही मार्ग पर बन रहा बांकी नदी पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा, घटिया निर्माण से ग्रामीणों में उबाल

#पाण्डु #पुल_निर्माण : बांकी नदी पर बन रहे पुल में मानकों की अनदेखी का आरोप, जांच की मांग।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड में फुलिया और बरवाही पंचायत को जोड़ने वाले बांकी नदी पुल निर्माण में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी मानकों को नजरअंदाज कर घटिया सामग्री से निर्माण कराया जा रहा है। लगातार आपत्ति के बावजूद काम जारी रहने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता गया। मामला सामने आने के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोके जाने की बात कही गई है, लेकिन ग्रामीण उच्चस्तरीय जांच की मांग पर अड़े हैं।

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  • पाण्डु प्रखंड की कुटमू पंचायत में बांकी नदी पर बन रहा है पुल।
  • फुलिया–बरवाही मार्ग को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना।
  • ग्रामीणों ने घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी का लगाया आरोप।
  • बार-बार विरोध के बावजूद संवेदक द्वारा काम जारी रखने का दावा।
  • भविष्य में दुर्घटना की आशंका जताते हुए जांच की मांग।
  • कनीय अभियंता संजीव कुमार ने त्रुटि स्वीकारते हुए काम रोकने की बात कही।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत कुटमू पंचायत की बरवाही और फुलिया पंचायत को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण फुलिया–बरवाही मार्ग पर बन रहा बांकी नदी पुल इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह बहुप्रतीक्षित पुल भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। पुल निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सरकारी मानकों की अनदेखी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह पुल क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से बरवाही, फुलिया सहित आसपास के कई गांवों का संपर्क सुदृढ़ होगा। खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान होगी। लेकिन जिस तरीके से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, उससे लोगों को डर है कि यह पुल बनने से पहले ही खतरे का कारण बन सकता है।

घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमेंट, बालू और गिट्टी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में न तो तय मापदंडों का पालन किया जा रहा है और न ही तकनीकी मानकों को ध्यान में रखा जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उन्होंने संवेदक और मौके पर मौजूद कर्मियों को निर्माण में खामियों की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता चला गया और उन्होंने इसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार करार दिया।

भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह मानकों से समझौता कर पुल का निर्माण किया गया, तो यह भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ता है और कमजोर निर्माण पुल की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जनता की सुविधा और सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार होगा तो इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ सकता है।

प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी संवेदक के खिलाफ सख्त कार्रवाई, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच और भविष्य में पारदर्शी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक पुल का मामला नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और सरकारी धन के दुरुपयोग का सवाल है।

कनीय अभियंता ने क्या कहा

मामले को लेकर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे कनीय अभियंता (JE) संजीव कुमार से जब संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन पर बताया कि निर्माण कार्य में मिस्त्री से कुछ त्रुटि हो गई थी। उन्होंने कहा:

“काम में तकनीकी गलती सामने आई है। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और सुधार के बाद ही आगे का कार्य शुरू किया जाएगा।”

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि जानबूझकर गुणवत्ता से समझौता किया गया है। उनका आरोप है कि जब तक ग्रामीणों ने विरोध नहीं किया, तब तक निर्माण कार्य बेरोकटोक चलता रहा।

संवेदक की भूमिका पर सवाल

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पुल निर्माण में लगे संवेदक की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि संवेदक ने मुनाफे के लिए गुणवत्ता से समझौता किया और सरकारी नियमों को ताक पर रखकर काम कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे संवेदक भविष्य में भी अन्य योजनाओं में इसी तरह की गड़बड़ियां करेंगे।

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घटिया और असुरक्षित निर्माण किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पुल निर्माण जैसे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

न्यूज़ देखो: विकास योजनाओं में गुणवत्ता से समझौता क्यों?

फुलिया–बरवाही मार्ग का यह पुल ग्रामीण विकास की अहम कड़ी है, लेकिन आरोपों ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी। प्रशासन की अगली कार्रवाई इस मामले में भरोसा बहाल करेगी या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित निर्माण, सुरक्षित भविष्य की जरूरत

पुल और सड़कें केवल ढांचा नहीं, लोगों की जिंदगी से जुड़ी जिम्मेदारी होती हैं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है।
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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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