
#कोलेबिरा #वीरशहीद_तेलेंगा_खड़िया : स्वतंत्रता सेनानी की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि दी गई।
कोलेबिरा के देव नदी मोड़ में 9 फरवरी 2026 को वीर शहीद तेलेंगा खड़िया की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में अखिल भारतीय खड़िया समाज, तेलेंगा खड़िया समिति, कांग्रेस पार्टी और स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लिया। पूजा-अर्चना, माल्यार्पण और जीवनी परिचय के माध्यम से उनके बलिदान को याद किया गया। यह आयोजन उनकी वीरता और आदिवासी स्वाभिमान को सम्मानित करने के लिए महत्वपूर्ण था।
- कार्यक्रम का आयोजन 9 फरवरी 2026 को कोलेबिरा देव नदी मोड़ में किया गया।
- अखिल भारतीय खड़िया समाज, तेलेंगा खड़िया समिति और कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- तेलेंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी 1806 को सिसई के मूरगू ग्राम में हुआ था।
- सैलाहकार जेम्स पी केरकेट्टा ने उनके जीवन और क्रांतिकारी योगदान की जानकारी दी।
- सुलभ नेल्सन डुंगडुंग ने उनके साहस और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान की चर्चा की।
- तेलंगा स्मृति सहोर प्रदीप टेटे ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।
कोलेबिरा में वीर शहीद तेलेंगा खड़िया की जयंती का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, समाजिक और राजनीतिक पदाधिकारियों ने भाग लिया। तेलेंगा खड़िया के स्टैचू की पारंपरिक पूजा अर्चना की गई और फूलमालाएं चढ़ाई गई। वैशाली गाय का झंडा बदलने की परंपरा निभाई गई। इस अवसर पर उनकी जीवनी और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भी याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत और पूजा-अर्चना
सर्वप्रथम पहान पूजार के द्वारा तेलेंगा खड़िया के स्टैचू को पारंपरिक तरीके से पूजा अर्चना की गई।
पहान पूजार ने कहा: “तेलेंगा खड़िया की वीरता और बलिदान को याद रखना हमारे लिए गर्व की बात है।”
फूलमालाओं के साथ साथ वैशाली गाय का झंडा हर वर्ष की तरह बदल दिया गया। समिति और पदाधिकारी ने माल्यार्पण कर सम्मान व्यक्त किया।
तेलेंगा खड़िया का जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
सलाहकार जेम्स पी केरकेट्टा ने तेलेंगा खड़िया के जीवन पर प्रकाश डाला।
जेम्स पी केरकेट्टा ने कहा: “तेलेंगा खड़िया ने बचपन से ही अंग्रेजों और जमींदारी प्रथा के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया। उनका साहस आज भी आदिवासी समुदाय के लिए प्रेरणा है।”
तेलेंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी 1806 को सिसई के मूरगू ग्राम में हुआ। पिता दुइया खड़िया और माता पेतो खडियाईन थीं। बचपन से ही उन्होंने तीर, धनुष, तलवार और भाला चलाना सीखा और अन्य लोगों को भी प्रशिक्षण देने लगे। 23 अप्रैल 1880 को उनकी हत्या कर दी गई।
प्रखंड अध्यक्ष सुलभ नेल्सन डुंगडुंग ने कहा:
“वीर शहीद तेलेंगा खड़िया झारखंड के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1857 की क्रांति से पहले ही अंग्रेजों और जमींदारों के अन्याय के खिलाफ लड़ाई का बिगुल फूंक दिया।”
उन्होंने छोटा नागपुर के लोगों को संगठित किया और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया। कई वर्ष कोलकाता जेल में रहे और अंततः ब्रिटिश एजेंट के धोखे से उन्हें हत्या का सामना करना पड़ा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और समापन
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित थे:
नागपुर परगाना सोहोर जोन अगुस्टीन टेटे, सांसद प्रतिनिधि सह सांघ्रो सोहोर, अखिल भारतीय खड़िया महाडोकलो सुनील खड़िया, सलाहकार जेम्स पी केरकेट्टा, तेलेंगा स्मृति सोहोर प्रदीप टेटे, प्रखंड कांग्रेस कमेटी कोलेबिरा अध्यक्ष सुलभ नेल्सन डुंगडुंग, पश्चिम मंडल अध्यक्ष राकेश कोनगाडी, अनुप पहान, प्रेमलता पहनाईन, फिलिप पहान, भिन्सेंट पुजार, रंजीत सोरेंग, अनिल बिलूंग, संदीप केरकेट्टा, जितेन्द्र सिंह, रवी डुंगडुंग, मरियानुस बिलूंग, सरोज सोरेंग, कोरनेलियस टेटे, संजय टेटे।
तेलंगा स्मृति सहोर प्रदीप टेटे ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।

न्यूज़ देखो: कोलेबिरा में आदिवासी स्वाभिमान और वीरता की याद
इस कार्यक्रम से स्पष्ट हुआ कि आदिवासी समुदाय अपने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को जीवित रखने में संकल्पित है। वीर शहीद तेलेंगा खड़िया की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समाज और प्रशासन दोनों प्रयासरत हैं। यह आयोजन आदिवासी स्वाभिमान और संगठन की मजबूती का प्रतीक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सक्रिय नागरिक बनें और वीरता को याद रखें
सजग रहें, अपने समुदाय के वीरों के योगदान को याद करें और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाएं। इस जयंती पर अपने बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम की कहानियाँ सुनाएँ। कार्यक्रम की तस्वीरें और अनुभव साझा करें। कमेंट करें, इस खबर को दोस्तों तक पहुंचाएं और आदिवासी संस्कृति एवं वीरता के सम्मान को बढ़ावा दें।







