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रात के अंधेरे में फल-फूल रहा बालू का काला कारोबार, हुसैनाबाद अनुमंडल में अवैध खनन पर सवालों की बौछार

#हुसैनाबाद #अवैधबालूखनन : सीमावर्ती क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर नदियों से हो रहा गैरकानूनी बालू उठाव।

पलामू जिले के बिहार–झारखंड सीमावर्ती हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में अवैध बालू खनन का कारोबार लगातार बेलगाम होता जा रहा है। सरकारी रोक, स्पष्ट नियम और निगरानी व्यवस्था के बावजूद कोयल और सोन नदियों से रात के अंधेरे में बालू का गैरकानूनी उठाव जारी है। बिना नीलामी और बिना अधिकृत भंडारण स्थल के बालू का खुलेआम उपयोग प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब, पर्यावरण और कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है।

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  • कोयल और सोन नदी से रात में हो रहा अवैध बालू खनन।
  • कोई वैध बालू घाट या नीलामी नहीं होने के बावजूद खुलेआम आपूर्ति।
  • हुसैनाबाद, हैदरनगर, देवरी ओपी, दंगवार ओपी क्षेत्रों में बालू के ढेर।
  • कार्रवाई सिर्फ औपचारिक, बड़े नेटवर्क पर नहीं पड़ रहा असर।
  • बालू की कीमत तीन से चार हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर तक पहुंची।

हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में अवैध बालू खनन का मामला अब केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर भी सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, रात ढलते ही नदियों के किनारे गतिविधियां तेज हो जाती हैं और ट्रैक्टरों के जरिए बालू की ढुलाई शुरू हो जाती है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब क्षेत्र में किसी भी बालू घाट की विधिवत नीलामी नहीं हुई है।

बिना नीलामी कैसे हो रहा बालू का उठाव

नियमों के अनुसार, बालू खनन और परिवहन के लिए घाट की नीलामी, पर्यावरणीय स्वीकृति और भंडारण स्थल का चिन्हांकन आवश्यक है। लेकिन हुसैनाबाद अनुमंडल में इन प्रक्रियाओं के अभाव के बावजूद बालू का उठाव और भंडारण जारी है। मुख्य सड़कों से लेकर गली–मोहल्लों, निजी मकान निर्माण स्थलों और सरकारी योजनाओं के तहत बन रही पीसीसी सड़कों व नालियों में इसी अवैध बालू का उपयोग साफ तौर पर देखा जा सकता है।

कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कभी–कभार एक–दो बालू लदे ट्रैक्टर पकड़कर कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है। बताया जाता है कि अक्सर वही वाहन पकड़े जाते हैं, जो तय ‘प्रक्रिया’ या अवैध नेटवर्क से बाहर होकर बालू उठाते हैं। जबकि संगठित रूप से चल रहे बड़े खेप बिना किसी डर के निकल जाते हैं।

पहले भी हुए प्रयास, लेकिन नतीजा सिफर

पूर्व में अनुमंडल प्रशासन द्वारा अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए नदी घाटों पर दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति, खनन टास्क फोर्स की बैठकें और चिन्हित स्थानों पर नाका लगाने जैसे कदम उठाए गए थे। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इन प्रयासों से स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा। जानकारों का कहना है कि छापेमारी से पहले ही सूचना लीक हो जाने के कारण कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पाती।

आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

अवैध खनन का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। बालू की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है। जो बालू पहले एक से डेढ़ हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर आसानी से मिल जाता था, वही अब चोरी–छिपे रात में तीन से चार हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर तक बिक रहा है। इससे घर बनाने वाले लोग, छोटे ठेकेदार और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलने को मजबूर हैं।

कई इलाकों में खुलेआम बालू का भंडारण

हुसैनाबाद के साथ–साथ हैदरनगर, देवरी ओपी और दंगवार ओपी क्षेत्रों में जगह–जगह बालू के ढेर इस बात की गवाही देते हैं कि अवैध कारोबार किस पैमाने पर चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सख्त निगरानी होती, तो इतने बड़े पैमाने पर भंडारण संभव नहीं होता।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के समय–समय पर दिए गए सख्त बयानों के बावजूद अब तक किसी थानेदार या जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई न होना व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। लोगों का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक अवैध खनन पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।

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पर्यावरण और कानून व्यवस्था पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों से अंधाधुंध बालू खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है। इससे नदी की धारा, भूजल स्तर और आसपास के कृषि क्षेत्र प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही कानून के शासन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि नियमों का खुलेआम उल्लंघन आम नागरिकों में गलत संदेश देता है।

न्यूज़ देखो: अवैध खनन पर सख्ती कब

हुसैनाबाद अनुमंडल में अवैध बालू खनन की स्थिति यह दर्शाती है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सख्ती से पालन कराना भी उतना ही जरूरी है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करेगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह कारोबार और अधिक मजबूत होगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में बने भागीदार

नदियां केवल बालू का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। अवैध खनन रोकना प्रशासन के साथ–साथ समाज की भी जिम्मेदारी है।
यदि आप अपने इलाके में अवैध गतिविधियां देख रहे हैं, तो आवाज उठाइए और जिम्मेदारों तक बात पहुंचाइए।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और जागरूकता फैलाकर पर्यावरण और कानून की रक्षा में योगदान दें।

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Yashwant Kumar

हुसैनाबाद, पलामू

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