
#गिरिडीह #बजट_विरोध : भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने केंद्रीय बजट को गरीब और मजदूर विरोधी बताया।
गिरिडीह में भाकपा माले ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को जनविरोधी करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, छात्र, महिला और मजदूर वर्ग के हितों की अनदेखी करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में पूंजीपतियों को खुलकर लाभ पहुंचाया गया है, जबकि आम जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया गया। इस बयान के बाद जिले में बजट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
- केंद्रीय बजट को भाकपा माले ने बताया जनविरोधी।
- राजेश सिन्हा, भाकपा माले नेता, ने गिरिडीह में किया विरोध।
- गरीब, किसान, छात्र, महिला और मजदूर वर्ग की उपेक्षा का आरोप।
- बजट में पूंजीपतियों को अधिक लाभ देने की बात कही गई।
- केंद्र सरकार पर आम जनता के हित न सोचने का आरोप।
- भाकपा माले ने बजट के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष तेज करने के संकेत दिए।
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए बजट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में गिरिडीह में भाकपा माले ने बजट के खिलाफ तीखा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि यह बजट समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्गों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। बजट को लेकर उठे सवाल अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बनते जा रहे हैं।
बजट को बताया गरीब और किसान विरोधी
भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट पूरी तरह जनविरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। राजेश सिन्हा ने कहा:
राजेश सिन्हा ने कहा: “यह बजट गरीब, किसान, छात्र, महिला और मजदूर विरोधी है। इससे साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए कुछ भी सोचती नहीं है।”
उनका कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट से जूझ रहे लोगों को इस बजट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में ऐसे कोई ठोस कदम नजर नहीं आते।
छात्रों और महिलाओं की अनदेखी का आरोप
राजेश सिन्हा ने यह भी कहा कि बजट में छात्रों और महिलाओं के लिए कोई विशेष राहत या नई योजना नहीं दिखाई देती। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश न होने से भविष्य में सामाजिक असमानता और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि छात्र पहले से ही बढ़ती फीस और बेरोजगारी से परेशान हैं, जबकि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए बजट में मजबूत प्रावधान जरूरी थे।
मजदूर वर्ग को राहत नहीं, पूंजीपतियों को फायदा
भाकपा माले नेता ने आरोप लगाया कि यह बजट मजदूर वर्ग के हितों के खिलाफ है। न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर बजट खामोश है। इसके विपरीत बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को टैक्स राहत और अन्य आर्थिक लाभ दिए गए हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा:
राजेश सिन्हा ने कहा: “भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों के लिए दिल खोलकर फायदा पहुंचाने का काम किया है। बजट में साफ तौर पर पूंजीपतियों को लाभ दिया गया है।”
उनका कहना है कि इससे आर्थिक असमानता और गहरी होगी और आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल
भाकपा माले ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता नहीं, बल्कि बड़े कॉरपोरेट घराने हैं। बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता न देना इसी सोच को दर्शाता है।
राजेश सिन्हा ने यह भी कहा कि सरकार बार-बार विकास की बात करती है, लेकिन विकास का लाभ समाज के एक छोटे वर्ग तक सीमित रह जाता है। इससे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की भावना कमजोर होती है।
भाकपा माले ने जताया विरोध, संघर्ष तेज करने के संकेत
गिरिडीह में भाकपा माले ने बजट के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए संकेत दिया है कि पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और जनआंदोलन तेज कर सकती है। पार्टी का कहना है कि बजट के खिलाफ जनता को जागरूक किया जाएगा और गरीबों, किसानों व मजदूरों के हित में आवाज बुलंद की जाएगी।
राजेश सिन्हा ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक पार्टी की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जो इस बजट से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर बजट की सच्चाई जनता के सामने रखें।
न्यूज़ देखो: बजट पर बढ़ता राजनीतिक टकराव
केंद्रीय बजट को लेकर भाकपा माले का विरोध यह दिखाता है कि बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव रखने वाला विषय है। विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवाल सरकार की नीतियों की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर बहस को तेज करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कमजोर वर्गों के लिए कोई ठोस कदम सामने आते हैं।
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बजट पर सवाल, जनता की भागीदारी जरूरी
बजट का असर हर नागरिक के जीवन पर पड़ता है, चाहे वह किसान हो, मजदूर हो, छात्र हो या महिला। इसलिए बजट पर सवाल उठाना और उस पर चर्चा करना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। जागरूक समाज ही जवाबदेह सरकार की नींव रखता है।
जरूरी है कि लोग बजट के प्रावधानों को समझें, अपने हितों की पहचान करें और अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठाएं।
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