कुरडेग में सार्वजनिक शौचालय बंद होने से बढ़ी परेशानी, स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

कुरडेग में सार्वजनिक शौचालय बंद होने से बढ़ी परेशानी, स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

author Rakesh Kumar Yadav
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#कुरडेग #सिमडेगा #जनसुविधा_संकट : बस स्टैंड और प्रखंड कार्यालय परिसर के शौचालय लंबे समय से बंद।

सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड में सार्वजनिक शौचालयों के बंद रहने से आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड और प्रखंड कार्यालय परिसर में बने सरकारी शौचालय लंबे समय से ताले में बंद हैं, जिससे यात्रियों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कत हो रही है। कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रखंड अध्यक्ष ने इसे जनसुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। यह स्थिति स्वच्छता व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।

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  • कुरडेग बस स्टैंड और प्रखंड कार्यालय परिसर के शौचालय बंद।
  • बाजार के दिनों में जनता को अधिक परेशानी।
  • महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित।
  • ज़िशान फ़िरदौस ने प्रशासन से समाधान की मांग की।
  • स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर उठे सवाल।

कुरडेग प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली अब आम जनता के लिए रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। बस स्टैंड और प्रखंड कार्यालय परिसर जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर बने सरकारी शौचालय लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन पर ताले लटके होने के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों को मजबूरी में इधर-उधर जाना पड़ता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, विशेषकर साप्ताहिक बाजार के दिनों में जब दूर-दराज के ग्रामीण बड़ी संख्या में कुरडेग पहुंचते हैं, तब शौचालय की सुविधा न होना बेहद पीड़ादायक हो जाता है। कई महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर असुविधा झेलने को मजबूर हैं।

पूरे क्षेत्र में एक भी शौचालय चालू नहीं

सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान समय में पूरे कुरडेग क्षेत्र में एक भी सरकारी सार्वजनिक शौचालय चालू नहीं है। जिन शौचालयों का निर्माण आम जनता की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखकर किया गया था, वे ही अब अनुपयोगी बन चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालयों के बंद रहने से खुले में शौच की स्थिति बन रही है, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

तस्वीरों में दिखी बदहाली

मौके पर ली गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि शौचालयों पर ताले लगे हुए हैं। आसपास गंदगी फैली है और रख-रखाव का पूरी तरह अभाव नजर आता है। कई जगहों पर कूड़ा जमा है और लंबे समय से सफाई नहीं होने के संकेत मिलते हैं।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता को लेकर सरकारी दावों की भी पोल खोलती है।

ज़िशान फ़िरदौस ने उठाई जनता की आवाज

इस गंभीर समस्या को लेकर कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रखंड अध्यक्ष एवं समाजसेवी ज़िशान फ़िरदौस ने खुलकर प्रशासन के समक्ष आम जनता की परेशानी रखी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों का बंद रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

ज़िशान फ़िरदौस ने कहा:
“ये शौचालय आम लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए थे, लेकिन वर्षों से बंद पड़े हैं। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के बिल्कुल विपरीत है।”

प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

ज़िशान फ़िरदौस ने स्थानीय प्रशासन से इस समस्या के शीघ्र समाधान की मांग करते हुए कुछ प्रमुख बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि

  • कुरडेग बस स्टैंड और प्रखंड कार्यालय परिसर के शौचालयों को तत्काल खोला जाए।
  • शौचालयों की नियमित सफाई और रख-रखाव की स्थायी व्यवस्था की जाए।
  • देखरेख के लिए जिम्मेदार कर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इस मामले की शिकायत सीधे उपायुक्त से की जाएगी।

आम जनता में बढ़ता असंतोष

शौचालय बंद रहने से आम लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा।

कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर प्रखंड मुख्यालय जैसे स्थान पर ही शौचालयों की यह स्थिति है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी क्यों

कुरडेग में सार्वजनिक शौचालयों का बंद रहना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। स्वच्छता और जनसुविधा जैसी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक ठोस कार्रवाई करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

स्वच्छता के अधिकार के लिए आवाज उठाएं

सार्वजनिक शौचालय हर नागरिक की मूल आवश्यकता हैं। यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है, तो चुप न रहें। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और प्रशासन तक जनसरोकार की आवाज पहुंचाने में सहयोग करें।

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कुरडेग, सिमडेगा

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