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विद्यालय की दीवारों पर उभरी नन्हीं कल्पनाओं की रंगीन दुनिया, छात्राओं की पेंटिंग ने खींचा सबका ध्यान

#बानो #रचनात्मक_शिक्षा : कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं ने दीवारों पर बनाई जीवंत पेंटिंग।

सिमडेगा जिले के बानो स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं द्वारा दीवारों पर रचनात्मक पेंटिंग की अनूठी पहल की गई। कला गतिविधि के तहत छात्राओं ने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़े चित्र उकेरे। विद्यालय प्रबंधन ने रुचि रखने वाली छात्राओं को समूह बनाकर चित्रांकन का अवसर दिया। इस पहल ने न केवल विद्यालय परिसर को आकर्षक बनाया बल्कि बालिकाओं की सृजनात्मक प्रतिभा को भी मंच प्रदान किया।

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  • पीएम श्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बानो में छात्राओं ने दीवारों पर बनाई पेंटिंग।
  • चित्रों में नदी-नाला, आदिवासी नृत्य दल, ढोल-नगाड़े, फुलवारी का जीवंत चित्रण।
  • फिजीकल शिक्षक अनास्टसिया मिंज के मार्गदर्शन में समूहों में हुआ चित्रांकन।
  • बेहतर पेंटिंग करने वाली छात्राओं को विद्यालय की ओर से पुरस्कार देने की घोषणा
  • राहगीर भी रुककर दीवारों पर बनी आकर्षक पेंटिंग को देख रहे।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में इन दिनों रचनात्मक शिक्षा का एक प्रेरक दृश्य देखने को मिल रहा है। नन्हीं छात्राओं ने जब पेंटिंग ब्रश अपने हाथों में थामा, तो विद्यालय की दीवारें उनकी कल्पनाओं के रंगों से जीवंत हो उठीं। प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाती इन पेंटिंग्स ने न केवल विद्यालय परिसर को सुंदर बनाया है, बल्कि छात्राओं की प्रतिभा और कल्पनाशीलता को भी नई पहचान दी है।

छात्राओं की कल्पना से सजी विद्यालय की दीवारें

विद्यालय परिसर की दीवारों पर बनी पेंटिंग्स में नदी-नालों का दृश्य, पारंपरिक आदिवासी महिलाओं का नृत्य दल, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते लोगों का चित्रण तथा रंग-बिरंगी फुलवारी के आकर्षक दृश्य उकेरे गए हैं। इन चित्रों में ग्रामीण जीवन की झलक, प्रकृति के प्रति प्रेम और स्थानीय संस्कृति की झांकी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

छात्राओं ने अपनी कल्पना और रुचि के अनुसार अलग-अलग विषयों पर चित्र बनाकर यह साबित कर दिया कि कला केवल एक विषय नहीं बल्कि अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी है। दीवारों पर उभरती इन जीवंत पेंटिंग्स ने पूरे विद्यालय का वातावरण सकारात्मक और प्रेरणादायी बना दिया है।

रुचि आधारित समूह बनाकर कराया जा रहा चित्रांकन

विद्यालय की फिजीकल शिक्षक अनास्टसिया मिंज ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन छात्राओं को चित्रांकन में विशेष रुचि है, उन्हें उनकी पसंद और रुचि के अनुसार पेंटिंग बनाने का अवसर दिया गया है। छात्राओं को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित किया गया है ताकि वे मिलकर सामूहिक रूप से रचनात्मक कार्य कर सकें।

उन्होंने कहा:

“जिन छात्राओं को पेंटिंग में रुचि है, वे अपने मन की कल्पनाओं को दीवारों पर उकेर रही हैं। समूह में काम करने से उनमें सहयोग, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास हो रहा है।”

यह पहल छात्राओं के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ कला और सृजनात्मक गतिविधियों को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

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विद्यालय प्रबंधन ने किया छात्राओं को प्रोत्साहित

विद्यालय की वार्डन कमला बड़ाईक ने बताया कि छात्राओं की प्रतिभा को निखारने के लिए इस प्रकार की गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिन छात्राओं की पेंटिंग बेहतर और आकर्षक होगी, उन्हें विद्यालय की ओर से पुरस्कृत भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा:

“छात्राओं में छिपी कला प्रतिभा को सामने लाना हमारा उद्देश्य है। बेहतर पेंटिंग करने वाली छात्राओं को सम्मानित कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।”

विद्यालय प्रबंधन का यह निर्णय छात्राओं के उत्साह को और अधिक बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। छात्राएं पूरे मनोयोग से अपने चित्रों को और भी सुंदर बनाने में जुटी हुई हैं।

राहगीरों का भी आकर्षण का केंद्र बनी पेंटिंग

विद्यालय की दीवारों पर बन रही जीवंत पेंटिंग्स केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आने-जाने वाले राहगीरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। लोग कुछ पल रुककर इन चित्रों को देखते हैं और छात्राओं की कला की सराहना करते नजर आते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की रचनात्मक पहल से न केवल विद्यालय का वातावरण सुंदर बनता है, बल्कि बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को भी पहचान मिलती है। कई अभिभावकों ने भी इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि कला गतिविधियां बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

रचनात्मक शिक्षा से बढ़ रहा आत्मविश्वास

शिक्षाविदों का मानना है कि चित्रांकन जैसी गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। बानो स्थित इस विद्यालय में चल रही यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। छात्राएं जब अपनी बनाई पेंटिंग को दीवारों पर उभरते हुए देखती हैं, तो उनमें आत्मसंतोष और आत्मविश्वास दोनों का विकास होता है।

साथ ही, समूह में मिलकर कार्य करने से उनमें सहयोग की भावना, अनुशासन और टीम वर्क की भावना भी मजबूत होती है, जो उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक है।

न्यूज़ देखो: रचनात्मक गतिविधियां बना रही शिक्षा को जीवंत और प्रेरक

बानो के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की यह पहल दिखाती है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं बल्कि रचनात्मक गतिविधियों से भी समृद्ध होती है। छात्राओं को कला के माध्यम से अभिव्यक्ति का मंच देना सराहनीय कदम है, जो उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देता है। यदि ऐसे प्रयास सभी विद्यालयों में लागू हों तो शिक्षा और अधिक आनंददायी व प्रभावी बन सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

कला और रचनात्मकता से निखरेगा उज्ज्वल भविष्य

बच्चों की प्रतिभा को पहचानना और उसे सही मंच देना समाज की जिम्मेदारी है।
विद्यालयों में कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना समय की मांग है।
ऐसी पहल से छात्राओं में आत्मविश्वास, सृजनात्मक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
आइए, हम भी शिक्षा के साथ रचनात्मकता को महत्व दें और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
इस प्रेरणादायी पहल पर अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और प्रतिभाशाली छात्राओं का हौसला जरूर बढ़ाएं।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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