
#गिरिडीह #राजनीतिक_सम्मेलन : जिला कमिटी सम्मेलन में माले कार्यकर्ता, किसान, मजदूर, महिला और युवा संगठित शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की गिरिडीह जिला कमिटी का सम्मेलन अप्रैल माह में गिरिडीह मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में बीस से तीस हजार माले कार्यकर्ता, नेता और विभिन्न जनसंगठनों से जुड़े सदस्य शामिल होंगे। माले नेताओं के अनुसार यह सम्मेलन संगठन विस्तार, राजनीतिक दिशा और जनसंघर्ष की आगामी रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। सम्मेलन के जरिए गिरिडीह और गांडेय विधानसभा में लाल झंडे की मौजूदगी को और मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।
- अप्रैल माह में गिरिडीह मुख्यालय में माले जिला कमिटी सम्मेलन आयोजित होगा।
- सम्मेलन में 20 से 30 हजार कार्यकर्ता, नेता और जनसंगठन शामिल होंगे।
- राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने गिरिडीह विधानसभा को लाल झंडामय करने का संकल्प दोहराया।
- संगठन विस्तार के साथ नगर निगम चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा।
- फर्जी मुकदमों के खिलाफ आंदोलन से जवाब देने की बात कही गई।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने गिरिडीह जिला मुख्यालय में अप्रैल माह में जिला कमिटी सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी तेज कर दी है। इस सम्मेलन को लेकर संगठन के भीतर व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू हो चुकी है। माले नेताओं का दावा है कि इस सम्मेलन में न केवल पार्टी कार्यकर्ता, बल्कि महिला, किसान, मजदूर, छात्र और युवा संगठनों से जुड़े हजारों लोग हिस्सा लेंगे और अपनी संगठित शक्ति का एहसास कराएंगे।
गिरिडीह विधानसभा और लाल झंडे का इतिहास
माले नेताओं राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि गिरिडीह विधानसभा का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से लाल झंडे के प्रभाव वाला रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में सीपीआई के स्वर्गीय जगरनाथ मिश्रा तीन बार विधायक और स्वर्गीय ओमिलाल आजाद एक बार विधायक रह चुके हैं। उस दौर में भी गरीब, मजदूर और किसान वर्ग की संख्या अधिक थी और आज भी सामाजिक संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
2014 के बाद संगठन में तेजी
राजेश सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2014 में जब उन्होंने माले के नेतृत्व में गिरिडीह विधानसभा में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की, तब से संगठन लगातार तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि इस बढ़त को देखकर विरोधी ताकतों ने आंदोलन के दौरान फर्जी मुकदमे दर्ज कर माले को दबाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा:
“एक आंदोलन के दौरान माले समर्थित 19 लोगों को जेल भेजा गया और मुझे मुख्य आरोपी बनाया गया, जबकि घटना बरवाडीह में हुई थी और उस समय मैं पिकेट थाना में थाना प्रभारी के साथ मौजूद था।”
राजेश सिन्हा ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रशासन को अपनी गूगल लोकेशन सहित सभी साक्ष्य उपलब्ध कराए, लेकिन आज तक प्रशासन के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।
दबाव और संगठन की दोबारा मजबूती
माले नेताओं के अनुसार, फर्जी मुकदमों के बाद विरोधी नेताओं द्वारा माले समर्थकों को घर-घर जाकर धमकाया गया, जिससे कुछ समय के लिए सदस्यता पर असर पड़ा। हालांकि, वर्ष 2020 के बाद राजेश सिन्हा ने दोबारा संगठन विस्तार पर जोर दिया और पार्टी को फिर से मजबूत किया।
उन्होंने कहा:
“माले जैसे-जैसे अपना कद बढ़ाएगा, फर्जी मुकदमे होंगे ही, लेकिन माले हर फर्जी हमले का मुंहतोड़ जवाब देता रहेगा।”
संगठन विस्तार में नए नेतृत्व की भूमिका
इसी दौरान प्रीति भास्कर के माले से जुड़ने और जिला कमिटी में चुने जाने से संगठन को नई गति मिली। उनके साथ-साथ अजीत राय के पीरटांड़ क्षेत्र से जिला कमिटी में सक्रिय होने से उस इलाके में भी संगठनात्मक गतिविधियां तेज हुईं।
राजेश सिन्हा ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में अब लाल झंडा पहले की तुलना में ज्यादा दिखने लगा है और संगठन की रफ्तार बढ़ी है।
नगर निगम चुनाव की तैयारी
माले नेताओं ने नगर निगम चुनाव को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पार्टी 10 से 15 वार्ड पार्षद सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
राजेश सिन्हा ने कहा कि 02 से 04 जनवरी के बीच प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए जाएंगे। वहीं, माले समर्थित मेयर प्रत्याशी के नाम की घोषणा भी जल्द की जाएगी। उन्होंने बताया कि देरी का मुख्य कारण शहरी इलाकों में चुनाव लड़ने को तैयार कार्यकर्ताओं की कमी है, क्योंकि गरीबी और रोजी-रोटी के कारण कई साथी समय नहीं दे पाते।
शहरी और ग्रामीण इलाकों में कार्य
कन्हाई पांडेय और उनके साथियों के नेतृत्व में संगठन विस्तार तेजी से हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में कई गुना तेजी से सदस्यता बढ़ रही है।
राजेश सिन्हा ने बताया कि जनसहयोग से 11 चापानल, सिंचाई के लिए तालाब निर्माण, अधिकारियों से समन्वय और सरकारी योजनाओं पर चर्चा जैसे कार्यों के माध्यम से संगठन का विस्तार हो रहा है।
वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन
संगठन विस्तार में वरिष्ठ नेता पूरन महतो, पूर्व विधायक राजकुमार यादव, पूर्व विधायक विनोद सिंह और जिला कमिटी के अन्य वरिष्ठ साथियों की अहम भूमिका बताई गई।
पूरन महतो ने कहा:
“मैं 24 घंटे गिरिडीह और गांडेय विधानसभा में उपलब्ध रहूंगा। आप संगठन पर काम करें, जनता के सवालों पर मुखर होकर लड़ाई लड़ें।”
हालिया कार्यशालाओं से बढ़ा उत्साह
हाल ही में महुवाटांड़ में गिरिडीह और गांडेय विधानसभा का संयुक्त कार्यालय उद्घाटन हुआ, जहां पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद ने संगठन विस्तार की विस्तृत रणनीति समझाई।
उन्होंने कहा:
“गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं, छात्र और नौजवानों को संगठित कर जनता की आवाज बुलंद करनी होगी, तभी विधानसभा में बेहतर प्रदर्शन संभव है।”
महिला और युवा भागीदारी पर जोर
राज्य कमिटी सदस्य और एप्वा नेत्री जयंती चौधरी ने कहा कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा:
“सिर्फ पुरुषों के सहारे आज की राजनीति नहीं की जा सकती, महिलाओं की संख्या पर विशेष ध्यान देना होगा।”
संगठन का दावा और आगे की राह
गांडेय विधानसभा से शंकर पांडेय, मेहताब अली मिर्जा, रामलाल मुर्मू, शेखर सिंह, मसूदन कोल, किशोर राय, दारा सिंह सहित कई अनुभवी साथी संगठन को दिशा दे रहे हैं।
माले नेताओं का दावा है कि आने वाले एक वर्ष में गिरिडीह मुख्यालय और आसपास के इलाकों में लाल झंडा और अधिक मजबूती से दिखाई देगा।
न्यूज़ देखो: गिरिडीह में माले की रणनीतिक तैयारी
अप्रैल में प्रस्तावित जिला कमिटी सम्मेलन माले के लिए सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच होगा। जनसंगठनों की बड़ी भागीदारी यह संकेत देती है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। नगर निगम चुनाव और विधानसभा क्षेत्र में गतिविधियां तेज होने से स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ना तय है। अब देखना होगा कि माले की यह तैयारी चुनावी और जनआंदोलनों में कितना प्रभाव डाल पाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संगठित संघर्ष से ही बदलेगा राजनीतिक परिदृश्य
राजनीति में बदलाव तभी संभव है, जब जनता संगठित होकर अपने सवाल उठाए। किसान, मजदूर, महिला और युवा की भागीदारी से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
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