लोध जलप्रपात पर क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण पूर्ण पर्यटकों के लिए आठ माह बाद फिर खोला गया

लोध जलप्रपात पर क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण पूर्ण पर्यटकों के लिए आठ माह बाद फिर खोला गया

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #लोध_जलप्रपात : मरम्मत के बाद पुलिया फिर पर्यटकों हेतु खुली।

लातेहार जिले के महुआडांड़ स्थित लोध जलप्रपात पर क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण कार्य पूरा कर 13 फरवरी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। पिछले वर्ष भारी बारिश में क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थल आठ माह से बंद था। वन विभाग और इको विकास समिति की निगरानी में मरम्मत कार्य कराया गया। निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।

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  • लोध जलप्रपात, महुआडांड़ में पुलिया निर्माण कार्य पूर्ण।
  • पिछले वर्ष भारी बारिश में क्षतिग्रस्त, करीब 8 माह से बंद
  • वनरक्षक कुणाल सिंह की निगरानी में मरम्मत कार्य संपन्न।
  • निरीक्षण के बाद फीता काटकर दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया।
  • स्थानीय जनप्रतिनिधि व इको विकास समिति की उपस्थिति में उद्घाटन।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित लोध जलप्रपात, जिसे राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात माना जाता है, एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के दौरान यहां की पुलिया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया था। करीब आठ महीनों तक पर्यटकों की आवाजाही पर रोक रही। अब मरम्मत कार्य पूर्ण होने के बाद शुक्रवार को इसे औपचारिक रूप से फिर शुरू कर दिया गया।

बारिश में क्षतिग्रस्त हुई थी पुलिया

पिछले वर्ष क्षेत्र में हुई तेज बारिश के कारण लोध जलप्रपात परिसर की पुलिया को काफी नुकसान पहुंचा था। पुलिया क्षतिग्रस्त होने से पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने एहतियातन स्थल को बंद कर दिया था। यह निर्णय पर्यटकों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया था।

लोध जलप्रपात राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं।

मरम्मत कार्य में इको विकास समिति की भूमिका

पुलिया के पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य को लेकर इको विकास समिति ने सक्रिय भूमिका निभाई। वनरक्षक कुणाल सिंह के अथक प्रयास और सतत निगरानी में कार्य को आगे बढ़ाया गया। जानकारी के अनुसार, केरल से आए कुशल कारीगरों द्वारा तकनीकी रूप से मरम्मत कार्य पूरा किया गया।

मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के उपरांत इसे दोबारा पर्यटकों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया।

संयुक्त रूप से किया गया उद्घाटन

शुक्रवार को वनरक्षक कुणाल सिंह, उप प्रमुख अभय मिंज और चटकपुर पंचायत की मुखिया रेखा नगेसिया ने स्थल का निरीक्षण किया। संतोषजनक स्थिति पाए जाने के बाद संयुक्त रूप से फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर पुलिया को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।

इस अवसर पर बारेसाढ़ के विधायक प्रतिनिधि मनोज यादव, वनपाल परमजीत तिवारी, इको विकास समिति अध्यक्ष नंदकिशोर नगेसिया, सदस्य रामदयाल राम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस कार्य को पर्यटन विकास की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।

पर्यटकों में खुशी की लहर

पुलिया के पुनः चालू होने से पर्यटकों में उत्साह देखा गया। लंबे समय बाद स्थल के खुलने से स्थानीय व्यवसायियों को भी राहत मिली है, क्योंकि पर्यटन गतिविधियों से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।

पर्यटकों ने बताया कि लोध जलप्रपात पूरे परिवार के साथ घूमने के लिए एक आदर्श स्थान है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और साफ-सफाई मन को आकर्षित करती है। उन्होंने वन विभाग और इको विकास समिति के प्रयासों की सराहना की।

अतिरिक्त सुविधाओं की मांग

पर्यटकों ने यह भी सुझाव दिया कि जलप्रपात परिसर के आसपास बच्चों के लिए पार्क और झूले की व्यवस्था की जानी चाहिए। वर्तमान में जलप्रपात तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई करनी पड़ती है। वापस लौटने के बाद विश्राम या बच्चों के लिए मनोरंजन की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।

पर्यटकों का कहना है कि यदि पार्क और झूले जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो परिवार अधिक समय तक यहां रुककर प्रकृति का आनंद ले सकेंगे। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

न्यूज़ देखो: पर्यटन पुनर्जीवन की ओर बढ़ता कदम

लोध जलप्रपात पर पुलिया का पुनर्निर्माण केवल एक ढांचागत सुधार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आठ महीनों तक बंद रहने के बाद स्थल का खुलना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी राहत भरा है। अब आवश्यक है कि यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर इसे और सुरक्षित व आकर्षक बनाया जाए। क्या प्रशासन पर्यटकों की अतिरिक्त सुविधाओं की मांग पर भी विचार करेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति का सम्मान करें जिम्मेदार पर्यटक बनें

लोध जलप्रपात जैसी प्राकृतिक धरोहरें हमारी साझा संपत्ति हैं।
यहां की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
पर्यटन तभी टिकाऊ बनता है जब पर्यटक भी नियमों का पालन करें।
सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।

आप लोध जलप्रपात के विकास को लेकर क्या सुझाव देना चाहेंगे?
अपनी राय कमेंट में लिखें, खबर को साझा करें और जिम्मेदार पर्यटन का संदेश आगे बढ़ाएं।

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