
#बोलबा #नववर्ष_उत्सव : दनगद्दी और मां वनदुर्गे मंदिर में श्रद्धा, पर्यटन और सुरक्षा के बीच सौहार्दपूर्ण नववर्ष आयोजन।
नववर्ष के अवसर पर सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड स्थित दनगद्दी पर्यटक स्थल और मां वनदुर्गे मंदिर में श्रद्धालुओं व सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। झारखंड के विभिन्न प्रखंडों सहित ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। लोगों ने नववर्ष की शुरुआत पूजा-अर्चना और पारिवारिक पिकनिक के साथ की। प्रशासन की सतर्क व्यवस्था के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रहा।
- दनगद्दी पर्यटक स्थल और मां वनदुर्गे मंदिर में नववर्ष पर भारी भीड़।
- ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित कई जिलों से पहुंचे श्रद्धालु व पर्यटक।
- दर्शन-पूजन के बाद दनगद्दी में पारिवारिक पिकनिक का आयोजन।
- डीजे, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक संगीत से गूंजा क्षेत्र।
- थाना प्रभारी देवीदास मुर्मू और अंचलाधिकारी सुधांशु पाठक रहे मुस्तैद।
नववर्ष के पहले दिन सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड में उत्सव, आस्था और पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिला। मालसाड़ा पंचायत स्थित प्रसिद्ध दनगद्दी पर्यटक स्थल और मां वनदुर्गे मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों का तांता लगा रहा। लोग परिवार और मित्रों के साथ नववर्ष का स्वागत करने पहुंचे और पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।
मां वनदुर्गे मंदिर में श्रद्धा के साथ नववर्ष की शुरुआत
नववर्ष की शुरुआत लोगों ने मां वनदुर्गे मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ की। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। भक्तों ने मां वनदुर्गे के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां हर वर्ग और आयु के लोग आस्था के साथ उपस्थित नजर आए।
दनगद्दी पर्यटक स्थल बना उत्सव का केंद्र
पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालु और पर्यटक दनगद्दी पर्यटक स्थल पहुंचे, जहां नववर्ष पिकनिक का आयोजन किया गया। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस स्थल पर परिवारों और युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। डीजे साउंड, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक संगीत की धुनों पर लोग झूमते और नववर्ष का आनंद लेते नजर आए। एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए लोगों ने पूरे दिन उत्साहपूर्ण माहौल बनाए रखा।
बाहरी राज्यों से भी पहुंचे सैलानी
दनगद्दी और मां वनदुर्गे मंदिर की प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिमडेगा जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचे। कई लोग आसपास के जिलों से भी परिवार सहित आए, जिससे क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखा गया।
सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क
नववर्ष के मौके पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। थाना प्रभारी देवीदास मुर्मू और अंचलाधिकारी सुधांशु पाठक अपने दलबल के साथ दोनों स्थलों पर लगातार मौजूद रहे। सुबह से ही वे क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस बल की तैनाती से श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने स्वयं को सुरक्षित और निश्चिंत महसूस किया।
प्रशासन की अपील और लोगों का सहयोग
प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित लोगों से भयमुक्त, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से नववर्ष मनाने की अपील की। साथ ही सभी से स्वच्छता बनाए रखने, प्राकृतिक वातावरण को नुकसान न पहुंचाने और आपसी भाईचारे के साथ उत्सव मनाने का संदेश दिया गया। लोगों ने भी प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सहयोग दिखाया, जिससे पूरा आयोजन अनुशासित और सुरक्षित बना रहा।
शांतिपूर्ण और यादगार बना नववर्ष उत्सव
प्रशासन की सतर्कता और आम लोगों के सहयोग का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि नववर्ष का यह आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और यादगार बन गया। न तो किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने आई और न ही अव्यवस्था की स्थिति बनी। दनगद्दी पर्यटक स्थल और मां वनदुर्गे मंदिर एक बार फिर क्षेत्रीय आस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे।
न्यूज़ देखो: आस्था और प्रशासनिक सतर्कता का संतुलित उदाहरण
यह खबर दर्शाती है कि जब आस्था, पर्यटन और प्रशासनिक सतर्कता साथ चलते हैं, तो बड़े आयोजन भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकते हैं। दनगद्दी और मां वनदुर्गे मंदिर में नववर्ष का आयोजन स्थानीय पर्यटन की क्षमता को भी उजागर करता है। प्रशासन की मुस्तैदी और लोगों के सहयोग ने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नववर्ष, नई ऊर्जा और सामूहिक जिम्मेदारी
नववर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी समय है।
आस्था और पर्यटन स्थलों की गरिमा बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।
सहयोग, अनुशासन और सौहार्द से ही ऐसे आयोजन सफल होते हैं।
प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है।






