
#मेदिनीनगर #मनरेगा_विवाद : मनरेगा कर्मचारी संघ की बैठक में नए कानून वीबीजी रामजी को लेकर भविष्य की अनिश्चितता पर आक्रोश प्रकट हुआ।
पलामू जिले के मेदिनीनगर में मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित नए कानून वीबीजी रामजी को लेकर मनरेगा कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई। कचहरी स्थित ताईद शेड में हुई इस बैठक में रोजगार सेवकों ने लंबित मानदेय और सेवा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। कर्मचारियों ने कहा कि मनरेगा जहां रोजगार का कानूनी अधिकार देता है, वहीं नया कानून अनिश्चितता पैदा कर रहा है। बैठक में आंदोलन की चेतावनी के साथ सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।
- मेदिनीनगर कचहरी ताईद शेड में पलामू जिला मनरेगा कर्मचारी संघ की बैठक।
- वीबीजी रामजी कानून को लेकर रोजगार सेवकों में गहरी असमंजस और आक्रोश।
- लंबित मानदेय भुगतान को बताया गया सबसे बड़ा संकट।
- जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने आंदोलन की दी चेतावनी।
- राज्य स्तर तक संघर्ष का लिया गया निर्णय।
ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी मानी जाने वाली मनरेगा योजना को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पलामू जिले के मेदिनीनगर में आयोजित मनरेगा कर्मचारी संघ की जिला स्तरीय बैठक में रोजगार सेवकों ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानून वीबीजी रामजी को लेकर खुलकर चिंता और नाराजगी जाहिर की। बैठक में यह स्पष्ट संदेश उभरा कि यदि मनरेगा की कानूनी गारंटी कमजोर हुई, तो इसका सीधा असर ग्रामीण गरीबों और योजना से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ेगा।
बैठक का आयोजन और उद्देश्य
पलामू जिला मनरेगा कर्मचारी संघ की यह बैठक मेदिनीनगर कचहरी स्थित ताईद शेड में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने की। इसमें जिले के लगभग सभी प्रखंडों से आए मनरेगा कर्मियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य मनरेगा के भविष्य, नए कानून वीबीजी रामजी की स्थिति, और कर्मचारियों के लंबित मानदेय जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करना था।
मनरेगा बनाम वीबीजी रामजी : अधिकार या अनिश्चितता
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार का कानूनी अधिकार है। इसके तहत 100 दिनों का रोजगार, पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। इसके विपरीत वीबीजी रामजी कानून को लेकर अभी तक न तो स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आए हैं और न ही यह साफ है कि रोजगार सेवकों की भूमिका, सेवा सुरक्षा और मानदेय का क्या स्वरूप होगा।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि नया कानून कहीं न कहीं रोजगार को अधिकार से हटाकर अनुग्रह बना सकता है, जिससे ग्रामीण समाज की आर्थिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होगा।
लंबित मानदेय ने बढ़ाई परेशानी
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा महीनों से लंबित मानदेय भुगतान का रहा। सभी प्रखंडों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जो कर्मचारी गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं को लागू करते हैं, वही आज आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। मानदेय भुगतान में लगातार हो रही देरी को सरकार की उदासीनता बताया गया।
कर्मचारियों का कहना था कि समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है, लेकिन इसके बावजूद उनसे योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपेक्षा की जा रही है।
संघ की दो टूक चेतावनी
जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा:
पंकज सिंह ने कहा: “यदि लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान नहीं हुआ और वीबीजी रामजी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो मनरेगा कर्मचारी संघ जिला से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा।”
उन्होंने कहा कि संघ अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और कार्रवाई चाहता है।
बैठक में उठे सवाल
बैठक के अंत में कुछ सवाल बार-बार गूंजते रहे—
क्या रोजगार अब कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि सरकार की कृपा बनता जा रहा है?
क्या ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय असहाय किया जा रहा है?
संघ के सदस्यों ने निर्णय लिया कि इन सवालों और मांगों को मजबूती के साथ सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों की उपस्थिति
इस बैठक में मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश संयोजक देवेन्द्र उपाध्याय, प्रदेश उपाध्यक्ष विकास पाण्डेय, कानूनी सलाहकार रामाकांत तिवारी, मनोज चौबे, मुकेश कुमार तिवारी, जगत प्रसाद मेहता, दिनेश कुमार, उमेश कुमार पाण्डेय, उपेन्द्र कुमार सिंह, भीष्म नारायण, संजय सूरज, अमोद कुमार सिंह, अभिमन्यु सिंह, अख्तर हुसैन, नागेंद्र कुमार पाण्डेय, मोहम्मद शकील, संजय कुमार, संजीव कुमार सहित बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी उपस्थित थे। बैठक का संचालन पप्पू जायसवाल ने किया।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण रोजगार पर गहराता संकट
पलामू की यह बैठक साफ संकेत देती है कि मनरेगा से जुड़े कर्मचारी और ग्रामीण समाज नए कानून को लेकर आशंकित हैं। रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होने की स्थिति में इसका व्यापक सामाजिक और आर्थिक असर पड़ सकता है। सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह स्पष्ट नीति और समयबद्ध समाधान के साथ स्थिति संभाले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रोजगार अधिकार की रक्षा के लिए सजग रहें
ग्रामीण भारत की मजबूती रोजगार सुरक्षा से जुड़ी है।
मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर हो रहे बदलावों को समझना और सवाल उठाना जरूरी है।
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