केतुंगा धाम की ऐतिहासिक बुद्ध प्रतिमा को नहीं हटाने का निर्णय, ग्राम सभा ने सरकार से विकास की मांग उठाई

केतुंगा धाम की ऐतिहासिक बुद्ध प्रतिमा को नहीं हटाने का निर्णय, ग्राम सभा ने सरकार से विकास की मांग उठाई

author Shivnandan Baraik
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#बानो #सिमडेगा #ऐतिहासिकधरोहर : ग्राम सभा ने बुद्ध प्रतिमा को सुरक्षित रखने और स्थल विकास की मांग की।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित कुरुचड़ेगा गांव में केतुङ्गा धाम न्यास समिति और ग्राम सभा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में ऐतिहासिक गौतम बुद्ध प्रतिमा को अन्यत्र स्थानांतरित नहीं करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। साथ ही सरकार से इस प्राचीन स्थल के विकास की मांग भी उठाई गई।

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  • कुरुचड़ेगा गांव में ग्राम सभा और न्यास समिति की बैठक आयोजित।
  • गौतम बुद्ध की ऐतिहासिक प्रतिमा को नहीं हटाने का सर्वसम्मति निर्णय।
  • प्रतिमा को बताया गया 261 ईसा पूर्व की धरोहर
  • सरकार से केतुंगा धाम के विकास की मांग उठी।
  • बैठक में कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत ग्राम कुरुचड़ेगा में केतुङ्गा धाम न्यास समिति एवं ग्राम सभा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम सभा अध्यक्ष सुकरा केरकेट्टा ने की। इस दौरान ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी गौतम बुद्ध की प्रतिमा को लेकर अहम निर्णय लिया गया।

बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि केतुङ्गा धाम के ठरकी टॉड में स्थित गौतम बुद्ध की ऐतिहासिक प्रतिमा को किसी भी परिस्थिति में अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र की पहचान और सांस्कृतिक विरासत बताया।

ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण पर जोर

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यह प्रतिमा न केवल बानो बल्कि पूरे क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर है। ग्रामीणों के अनुसार, इस प्रतिमा का संबंध प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है।

बताया गया कि कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया था और उसी दौरान वापसी के समय वे अपनी सेना के साथ कुछ समय के लिए केतुङ्गा धाम के पास रुके थे। उसी समय यहां गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कराई गई थी, जो आज भी मौजूद है।

पुरातत्व विभाग में पंजीकृत, फिर भी विकास नहीं

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह स्थल पुरातत्व विभाग में पंजीकृत है, लेकिन इसके बावजूद अब तक यहां कोई ठोस विकास कार्य नहीं किया गया है। वर्तमान में स्थल पर कई पत्थर के अवशेष बिखरे पड़े हैं, जो इसकी उपेक्षा को दर्शाते हैं।

ग्राम सभा के सदस्यों ने कहा: “यह हमारे क्षेत्र की पहचान है, इसे सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

सरकार से विकास की मांग

बैठक में यह मांग उठाई गई कि सरकार इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केतुङ्गा धाम का समुचित विकास किया जाता है, तो इससे न केवल इस धरोहर की रक्षा होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से पंचायत समिति सदस्य रेशमा बडिंग, उप मुखिया सोमरा बडिंग, उमेश साहू और फिरू बड़ाईक शामिल थे।

सभी ने एक स्वर में इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

क्षेत्र में बढ़ी जागरूकता

इस निर्णय के बाद क्षेत्र में ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखेंगे।

न्यूज़ देखो: विरासत बचाने की जिम्मेदारी

केतुंगा धाम का यह मामला दिखाता है कि स्थानीय लोग अपनी विरासत को लेकर कितने सजग हैं। यह प्रशासन के लिए भी एक संकेत है कि ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर गंभीरता से काम किया जाए। क्या अब सरकार इस दिशा में ठोस पहल करेगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी विरासत बचाएं, भविष्य सजाएं

ऐतिहासिक धरोहरें हमारी पहचान होती हैं, जिन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर हम आज सजग नहीं होंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास से वंचित हो जाएंगी।

अपने क्षेत्र की धरोहरों को पहचानें, उन्हें संरक्षित करने के लिए आगे आएं और जागरूकता फैलाएं।

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और अपनी विरासत को बचाने की मुहिम का हिस्सा बनें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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