
#सिमडेगा #रेंगारी_चर्च : उपायुक्त ने ऐतिहासिक धरोहर का निरीक्षण कर संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल की।
सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने ठेठईटांगर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक रेंगारी चर्च का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का अवलोकन किया। वर्ष 1965 में निर्मित इस चर्च की संरचना और परिसर में मौजूद धरोहरों को देखते हुए उन्होंने संरक्षण और विकास पर जोर दिया। उपायुक्त ने परिसर में स्थित सेंट एंथनी स्कूल के ऐतिहासिक भवन का भी निरीक्षण किया। साथ ही रेंगारी चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
- उपायुक्त कंचन सिंह ने ठेठईटांगर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक रेंगारी चर्च का किया निरीक्षण।
- चर्च के निर्माण वर्ष 1965 और इसके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।
- परिसर में स्थित 1926 में बने सेंट एंथनी स्कूल भवन का भी किया अवलोकन।
- चर्च परिसर में पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं के विकास का निर्देश।
- रेंगारी चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक रेंगारी चर्च का उपायुक्त कंचन सिंह ने दौरा कर उसके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने चर्च परिसर की संरचना, धार्मिक महत्व और यहां मौजूद पुरानी धरोहरों को देखा। इस दौरान चर्च के पल्ली पुरोहित ने उन्हें चर्च के निर्माण, इतिहास और यहां की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उपायुक्त ने इस स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
ऐतिहासिक रेंगारी चर्च का निरीक्षण
उपायुक्त कंचन सिंह ने ठेठईटांगर प्रखंड के रेंगारी गांव स्थित चर्च परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। यह चर्च वर्ष 1965 ईस्वी में निर्मित हुआ था और क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है।
भ्रमण के दौरान उन्होंने चर्च परिसर की वास्तुकला और इसके आसपास के वातावरण का भी अवलोकन किया। इस दौरान पल्ली पुरोहित ने चर्च के इतिहास और यहां से जुड़े सामाजिक तथा धार्मिक महत्व की जानकारी साझा की।
चर्च के पल्ली पुरोहित ने कहा: “रेंगारी चर्च क्षेत्र के ईसाई समुदाय के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है और इसके साथ कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।”
कोनपाला के प्रथम चर्च का भी किया अवलोकन
भ्रमण के दौरान उपायुक्त ने कोनपाला में स्थित क्षेत्र के प्रथम चर्च का भी अवलोकन किया। उन्होंने वहां के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की और स्थानीय लोगों से बातचीत भी की।
उपायुक्त ने कहा कि इस प्रकार के ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि ये क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को दर्शाते हैं। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे स्थलों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का सुझाव दिया।
सेंट एंथनी स्कूल भवन का किया निरीक्षण
चर्च परिसर में मौजूद सेंट एंथनी स्कूल के भवन का भी उपायुक्त ने निरीक्षण किया। यह भवन अंग्रेज शासनकाल के दौरान वर्ष 1926 में निर्मित हुआ था और आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए है।
उपायुक्त ने भवन की संरचना और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसके संरक्षण और रखरखाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की ऐतिहासिक इमारतें आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर होती हैं।
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा: “ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को हमारे इतिहास से जोड़ने का काम करता है।”
बुनियादी सुविधाओं के विकास का निर्देश
भ्रमण के दौरान उपायुक्त ने चर्च परिसर में मौजूद बुनियादी सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिसर में पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रस्ताव भेजा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि इन सुविधाओं का बेहतर विकास किया जाता है तो यहां आने वाले लोगों को अधिक सुविधा मिलेगी और स्थल का महत्व भी बढ़ेगा।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना
उपायुक्त ने रेंगारी चर्च को एक ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उनका मानना है कि यदि इस स्थल का सही तरीके से विकास किया जाए तो यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि इस दिशा में योजना बनाकर प्रस्ताव तैयार किया जाए ताकि भविष्य में यहां पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।
कई अधिकारी और स्थानीय लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर ठेठईटांगर प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, चर्च के पल्ली पुरोहित तथा कई स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
स्थानीय लोगों ने भी उम्मीद जताई कि यदि इस स्थल को पर्यटन से जोड़ा जाता है तो इससे क्षेत्र के विकास और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
न्यूज़ देखो: इतिहास और पर्यटन को जोड़ने की पहल
सिमडेगा का रेंगारी चर्च सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे स्थलों का संरक्षण और विकास क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है।
उपायुक्त द्वारा इस स्थल का निरीक्षण और इसे पर्यटन से जोड़ने की पहल निश्चित रूप से सकारात्मक कदम माना जा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से ठोस योजना बनाकर उसे लागू किया जाता है।
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अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को पहचानें और सुरक्षित रखें
हमारे आसपास कई ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं, जिनकी पहचान और संरक्षण बेहद जरूरी है। यदि इन धरोहरों को सही तरीके से संरक्षित और विकसित किया जाए तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व का विषय बन सकते हैं।
ऐसे प्रयास न केवल इतिहास को जीवित रखते हैं बल्कि स्थानीय विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देते हैं। इसलिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर इन धरोहरों को बचाने और आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।






