
#कुरडेग #शिक्षा_संकट : जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, छत से गिरता प्लास्टर और खुली सरिया बनी खतरा।
कुरडेग प्रखंड के चापाबरी गांव स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय की जर्जर स्थिति सामने आने के बाद जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छत से झरता प्लास्टर, बाहर निकली सरिया और उखड़ा हुआ ढांचा देखकर दोनों जनप्रतिनिधि व्यथित दिखीं। विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई है। मामले ने ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की बुनियादी संरचना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- चापाबरी राजकीयकृत मध्य विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर स्थिति में।
- छत से गिरता प्लास्टर और बाहर निकली सरिया बच्चों के लिए खतरा।
- जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने स्वयं पहुंचकर किया निरीक्षण।
- प्रधानाध्यापिका सुचिता टोप्पो ने कई बार विभाग को दी है सूचना।
- भय के कारण अभिभावक बच्चों को अन्य स्कूलों में भेजने को मजबूर।
कुरडेग प्रखंड अंतर्गत पंचायत हेठमा के ग्राम चापाबरी स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय इन दिनों गंभीर खतरे की जद में है। विद्यालय भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां बच्चों को पढ़ाना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। हर दिन सैकड़ों बच्चे इसी खस्ताहाल भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। विद्यालय की बदहाली की सूचना मिलने पर जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
छत से झरता प्लास्टर, खुली सरिया बनी जानलेवा
विद्यालय भवन की छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है। कई स्थानों पर सरिया पूरी तरह बाहर निकल आई है और छत का बड़ा हिस्सा उखड़ चुका है। कक्षाओं के भीतर बैठकर पढ़ने वाले बच्चे हर पल खतरे में रहते हैं। शिक्षकों का कहना है कि तेज हवा या बारिश के दौरान हालात और भी भयावह हो जाते हैं। विद्यालय परिसर में भय का माहौल बना हुआ है।
शिक्षकों की चिंता, डर के साये में पढ़ाई
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुचिता टोप्पो एवं सहायक शिक्षिका दीपमति कुमारी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में बच्चों को कक्षा में बैठाकर पढ़ाना बेहद जोखिम भरा है।
प्रधानाध्यापिका ने कहा:
सुचिता टोप्पो ने कहा: “इस हालत में बच्चों को पढ़ाना सुरक्षित नहीं है। शिक्षक और छात्र दोनों भय के माहौल में हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।”
जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने जताई गहरी चिंता
विद्यालय की बदहाल स्थिति की जानकारी मिलने पर जिला परिषद अध्यक्ष एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष स्वयं विद्यालय पहुंचीं। टूटती छत, झरता प्लास्टर और नंगी सरिया देखकर दोनों जनप्रतिनिधि गंभीर रूप से व्यथित और भावुक हो गईं। उन्होंने मौके पर ही इस स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया।
जिला परिषद अध्यक्ष का बयान
जिला परिषद अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
जिला परिषद अध्यक्ष ने कहा: “इस विद्यालय की स्थिति बेहद गंभीर है। छत से प्लास्टर गिर रहा है और सरिया खुली हुई है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाना उनकी जान से खिलवाड़ है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
उन्होंने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने और नए विद्यालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
उपाध्यक्ष ने उठाए सिस्टम पर सवाल
वहीं जिला परिषद उपाध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा:
जिला परिषद उपाध्यक्ष ने कहा: “जब बच्चे डर के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हों, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। इस स्कूल की हालत देखकर मन बेहद दुखी हुआ है।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन को बिना देरी किए ठोस निर्णय लेना चाहिए।
घट रही छात्र संख्या, अभिभावकों में डर
विद्यालय में सैकड़ों की संख्या में बच्चे नामांकित हैं, लेकिन जर्जर भवन और संभावित हादसे के डर से कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने लगे हैं। इसका सीधा असर विद्यालय की छात्र संख्या पर पड़ रहा है, जो लगातार घट रही है। यह स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
कई बार दी गई सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रधानाध्यापिका सुचिता टोप्पो ने बताया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग को लिखित और मौखिक रूप से विद्यालय की जर्जर स्थिति से अवगत कराया है। विद्यालय की मरम्मत और नए भवन निर्माण के लिए बार-बार अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे विद्यालय प्रबंधन और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है।
बड़ा सवाल: हादसे का इंतजार क्यों?
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
न्यूज़ देखो: शिक्षा की नींव कमजोर तो भविष्य कैसे सुरक्षित
चापाबरी स्कूल की हालत केवल एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है। निरीक्षण और बयान के बाद अब ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है, सिर्फ आश्वासन की नहीं। बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो जिम्मेदारी तय होना तय है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों की सुरक्षा पहले, लापरवाही नहीं चलेगी
सरकारी स्कूल गरीब और ग्रामीण बच्चों के भविष्य की नींव होते हैं। यदि वही असुरक्षित हों, तो शिक्षा का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है। अब जरूरत है कि प्रशासन त्वरित निर्णय लेकर बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए।





