
#महुआडांड़ #शिक्षा_संकट : जर्जर भवन में पढ़ाई—दो वर्षों से खतरे के साये में बच्चे।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित राजकीय कृत प्राथमिक विद्यालय उड़ालखाड़ की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पिछले दो वर्षों से छात्र-छात्राएं कक्षाओं के बजाय बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने जल्द कार्रवाई की मांग की है।
- उड़ालखाड़ प्राथमिक विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में।
- पिछले दो वर्षों से बरामदे में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे।
- दीवारों और छत में गहरी दरारें, लगातार गिर रहा प्लास्टर।
- प्रभारी प्राचार्य जोयसी पन्ना ने कई बार दी शिकायत।
- ग्रामीणों ने कहा—कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।
महुआडांड़ प्रखंड के राजकीय कृत प्राथमिक विद्यालय उड़ालखाड़ की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और किसी भी समय ढह सकता है। इसके बावजूद बच्चे रोजाना उसी परिसर में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षाओं के बजाय बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी शिक्षा भी प्रभावित हो रही है और असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
जर्जर भवन बना खतरे का कारण
विद्यालय के कमरों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वहां पढ़ाई करना जोखिम भरा हो गया है। छत और दीवारों से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है और कई जगहों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं।
ऐसी स्थिति में बच्चों को कक्षाओं में बैठाना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। लेकिन बरामदे में भी पर्याप्त जगह और सुविधाएं नहीं हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है।
दो वर्षों से जारी है समस्या
यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब दो वर्षों से बच्चे इसी तरह असुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं। इतने लंबे समय तक समस्या बने रहने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
इस दौरान न तो भवन की मरम्मत कराई गई और न ही बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की गई।
प्राचार्य ने दी कई बार शिकायत
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य जोयसी पन्ना ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार विभाग और स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है।
जोयसी पन्ना ने कहा: “हमने कई बार अधिकारियों को विद्यालय की स्थिति से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।”
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों में आक्रोश
विद्यालय की इस स्थिति को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि या तो भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए या फिर बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
शिक्षा पर भी पड़ रहा असर
इस समस्या का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने से न तो उचित वातावरण मिल पा रहा है और न ही ध्यान केंद्रित कर पाना संभव हो रहा है।
इससे बच्चों के शैक्षणिक स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
न्यूज़ देखो: बच्चों की सुरक्षा से बड़ा क्या?
उड़ालखाड़ विद्यालय की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितना संवेदनशील है। दो वर्षों से लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा? अब समय है कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत हस्तक्षेप करें और बच्चों को सुरक्षित माहौल प्रदान करें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी
हर बच्चे को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का अधिकार है।
ऐसी परिस्थितियों में चुप रहना समस्या को और बढ़ावा देता है।
जरूरी है कि हम सभी मिलकर बच्चों के भविष्य के लिए आवाज उठाएं।
समय पर कार्रवाई ही बड़े हादसों को रोक सकती है।
आइए, इस मुद्दे को गंभीरता से लें, अपनी आवाज बुलंद करें और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाएं। खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट करें और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए आगे आएं।






