दुमका जिले में हैंडपंपों की मरम्मती के लिए पेयजल विभाग ने निकाली अति अल्पकालीन निविदा

दुमका जिले में हैंडपंपों की मरम्मती के लिए पेयजल विभाग ने निकाली अति अल्पकालीन निविदा

author Saroj Verma
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#दुमका #पेयजल_संकट : ग्रामीण इलाकों में इंडिया मार्क-II हैंडपंपों की मरम्मत और अनुरक्षण के लिए 17 नवम्बर तक आवेदन मांगे गए।
  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड सरकार ने ग्रामीण हैंडपंपों की मरम्मत हेतु निविदा आमंत्रित की।
  • कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल संख्या–2, दुमका के कार्यालय से जारी की गई सूचना।
  • निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 17 नवम्बर, दोपहर 3:30 बजे तक तय।
  • निविदा खोलने की तिथि 18 नवम्बर, शाम 4:00 बजे निर्धारित।
  • 8 योजनाओं के लिए अनुमानित राशि ₹6.7 लाख से ₹30 लाख तक रखी गई।

दुमका जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट को दूर करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने हैंडपंप मरम्मत और अनुरक्षण कार्य की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभाग ने एक अति अल्पकालीन निविदा जारी की है, जिसके तहत इंडिया मार्क-II हैंडपंपों की मरम्मत और देखरेख की जाएगी। ग्रामीणों की पेयजल समस्या को लेकर प्रशासन इस बार गंभीर नजर आ रहा है, क्योंकि गर्मी और सूखे के मौसम में कई गांवों में हैंडपंप सूखने या खराब होने से लोग परेशान रहते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुधार की दिशा में कदम

कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल संख्या–2, दुमका की ओर से जारी निविदा के अनुसार, विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके तहत उन हैंडपंपों की मरम्मती की जाएगी, जो लंबे समय से खराब पड़े हैं या जिनमें जलप्रवाह बाधित हो चुका है। मरम्मत के साथ-साथ नियमित अनुरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा ताकि आने वाले महीनों में किसी भी गांव में पानी की समस्या न हो।

जल्दबाजी में जारी हुई अति अल्पकालीन निविदा

विभाग ने निविदा को अति अल्पकालीन बताते हुए बहुत कम समय सीमा में आवेदन आमंत्रित किए हैं। निविदा 17 नवम्बर दोपहर 3:30 बजे तक जमा की जा सकती है, जबकि इसे 18 नवम्बर शाम 4:00 बजे खोला जाएगा। इतनी कम अवधि में प्रक्रिया पूरी करने की वजह से स्पष्ट है कि विभाग तेजी से कार्यारंभ करना चाहता है। दुमका के कई प्रखंडों में ग्रामीणों की शिकायत रही है कि हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ता है।

आठ योजनाओं में लाखों रुपये खर्च होंगे

इस निविदा में कुल 8 योजनाएं शामिल की गई हैं, जिनके लिए अनुमानित राशि ₹6.7 लाख से लेकर ₹30 लाख तक रखी गई है। यह राशि हैंडपंप के मेजर और माइनर रिपेयर, पुर्जों की अदला-बदली, साइट सर्विसिंग और नियमित रखरखाव पर खर्च की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्य पूरा होने के बाद जिले के अधिकांश गांवों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

विभाग की प्राथमिकता – हर गांव तक स्वच्छ जल

झारखंड सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचे। इस दिशा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन फील्ड स्तर पर रखरखाव की कमी के कारण अक्सर हैंडपंप बंद हो जाते हैं। विभाग का मानना है कि नियमित अनुरक्षण और समय पर मरम्मत से इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है।

न्यूज़ देखो: प्यासे गांवों के लिए उम्मीद की किरण

दुमका के ग्रामीण इलाकों में हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर विभाग की तत्परता स्वागतयोग्य है। अगर यह काम समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी। हालांकि इतनी कम अवधि में निविदा प्रक्रिया पूरी करना पारदर्शिता और निष्पादन की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी खड़े करता है। ग्रामीणों की उम्मीद है कि इस बार योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखेंगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पानी ही जीवन है

ग्रामीण भारत में पानी की समस्या केवल सुविधा नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है। दुमका में हैंडपंपों की मरम्मत की यह पहल तभी सफल मानी जाएगी जब हर घर तक साफ पानी पहुंचे और कोई गांव प्यासा न रहे।
अब वक्त है कि हम सभी पेयजल संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों की देखरेख में सक्रिय भूमिका निभाएं।
अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि यह संदेश उन तक पहुंचे, जिनके गांवों में अब भी पानी की बूंदें इंतजार में हैं।

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Written by

दुमका/देवघर

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