
#दुमका #नगरपरिषदचुनाव : अंतिम दिन नामांकन से खुला मैदान, आरक्षण बदलाव बना अहम कारण।
दुमका नगर परिषद के वार्ड नंबर 14 में नामांकन के अंतिम दिन अचानक चुनावी तस्वीर बदल गई। मंगलवार तक जहां इस वार्ड से एक भी नामांकन नहीं हुआ था, वहीं अंतिम दिन चार प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल कर मुकाबले को रोचक बना दिया। आरक्षण में बदलाव के चलते पुराने समीकरण टूटे और नए दावेदार सामने आए। अब संवीक्षा और नाम वापसी के बाद ही अंतिम मुकाबले की स्थिति स्पष्ट होगी।
- वार्ड नंबर 14 में अंतिम दिन चार प्रत्याशियों ने किया नामांकन।
- मंगलवार तक एक भी नामांकन नहीं होने से बना था असमंजस।
- आरक्षण बदलने से पुराने दावेदार चुनाव से बाहर।
- पूर्व वार्ड पार्षद तरुण कुमार साहा ने फिर ठोकी दावेदारी।
- गौतम जय, मो. जाहिद इमाम और विकास कुमार ठाकुर भी मैदान में।
दुमका नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 14 सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया के शुरुआती दिनों में जहां इस वार्ड से कोई भी प्रत्याशी सामने नहीं आया था, वहीं नामांकन के अंतिम दिन अचानक चार प्रत्याशियों के उतरने से चुनावी माहौल पूरी तरह बदल गया।
अंतिम दिन खुला चुनावी मैदान
मंगलवार तक वार्ड 14 से किसी भी प्रत्याशी द्वारा नामांकन दाखिल नहीं किए जाने से यह आशंका जताई जा रही थी कि कहीं यह वार्ड निर्विरोध न रह जाए। लेकिन अंतिम दिन स्थिति पूरी तरह बदल गई और चार प्रत्याशियों ने संबंधित निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया।
इन प्रत्याशियों ने भरा नामांकन
अंतिम दिन जिन प्रत्याशियों ने नामांकन किया, उनमें
पूर्व वार्ड पार्षद तरुण कुमार साहा,
गौतम जय,
मो. जाहिद इमाम,
विकास कुमार ठाकुर शामिल हैं।
इन चारों प्रत्याशियों के नामांकन के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि वार्ड 14 में अब सीधा और रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा।
आरक्षण बदलने से बदला राजनीतिक समीकरण
इस बार वार्ड नंबर 14 को अत्यंत पिछड़ा वर्ग–1 (अन्य) के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण में हुए इस बदलाव ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह पलट दिया है। इसी कारण पूर्व वार्ड पार्षद मनोज कुमार दारूका इस वार्ड से चुनाव लड़ने में असमर्थ रहे।
प्रत्याशियों में बढ़ा उत्साह
अचानक खुले मैदान में उतरने से प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया। अंतिम दिन नामांकन के दौरान वार्ड में राजनीतिक हलचल तेज रही। अब सभी प्रत्याशी जनसंपर्क और रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
आगे क्या?
चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत अब नामांकन पत्रों की संवीक्षा और नाम वापसी के बाद ही यह साफ होगा कि वार्ड 14 में अंतिम रूप से कितने प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहेंगे। इसके बाद प्रचार की दिशा और दशा भी स्पष्ट हो जाएगी।
न्यूज़ देखो: वार्ड 14 बना अप्रत्याशित मुकाबले का केंद्र
वार्ड 14 में अंतिम दिन हुआ यह घटनाक्रम दिखाता है कि नगर परिषद चुनाव में समीकरण कितनी तेजी से बदल सकते हैं। आरक्षण व्यवस्था ने जहां पुराने दावेदारों को बाहर किया, वहीं नए चेहरों को मौका मिला। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जनता किस प्रत्याशी पर भरोसा जताती है और कौन विकास के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा पाता है।
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लोकतंत्र की मजबूती जनता की भागीदारी से
नगर परिषद चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने वार्ड के भविष्य को दिशा देने का अवसर है। वार्ड 14 में बढ़ती चुनावी सक्रियता यह दर्शाती है कि जनता की भागीदारी से ही स्वस्थ लोकतंत्र मजबूत होता है। अब यह जिम्मेदारी मतदाताओं की है कि वे प्रत्याशियों के वादों और सोच को परखें।
अपने वार्ड के भविष्य को लेकर जागरूक बनें, सही जानकारी साझा करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। अपनी राय कमेंट में रखें, खबर को साझा करें और दूसरों को भी जागरूक करें।



