
#गढ़वा #तालाब_सफाई : धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की पहल शुरू हुई।
गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या छह अंतर्गत सोनपुरवा स्थित रामबांध तालाब में लंबे समय से जमी गंदगी हटाने के लिए सफाई अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान कन्या विवाह एवं विकास संस्था के सचिव विकास माली के निर्देश पर शुरू हुआ। तालाब धार्मिक विसर्जन और सामाजिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र है, लेकिन गंदगी के कारण इसकी स्थिति खराब हो गई थी। सफाई से स्थानीय नागरिकों को राहत मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक संदेश गया है।
- सोनपुरवा रामबांध तालाब में चरणबद्ध सफाई अभियान की शुरुआत।
- कन्या विवाह एवं विकास संस्था द्वारा अभियान का संचालन।
- विकास माली के निर्देश पर पहले दिन गंदगी और कचरा हटाया गया।
- विसर्जन स्थल होने के कारण तालाब का धार्मिक और सामाजिक महत्व।
- स्थानीय नागरिकों ने पहल को बताया नगर के लिए आवश्यक कदम।
गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या छह अंतर्गत स्थित सोनपुरवा रामबांध तालाब की साफ-सफाई को लेकर लंबे समय से स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता बनी हुई थी। नगर के कई वार्डों से प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए इसी तालाब का उपयोग किया जाता है, लेकिन समय के साथ तालाब और उसके आसपास गंदगी, कचरा और अवांछित सामग्री जमा हो गई थी। इससे न केवल धार्मिक आयोजनों में परेशानी होती थी, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। इसी को देखते हुए अब एक ठोस पहल सामने आई है।
विकास माली के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान
कन्या विवाह एवं विकास संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था के सचिव विकास माली के निर्देश पर रामबांध तालाब की साफ-सफाई का निर्णय लिया गया। उनका स्पष्ट कहना था कि यदि नगर की पहचान से जुड़े स्थलों की समय रहते देखभाल नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इसी सोच के साथ संस्था ने बिना देर किए सफाई अभियान की शुरुआत कर दी।
पहले दिन दिखा बदलाव, हटाई गई वर्षों की गंदगी
अभियान के पहले दिन तालाब के किनारों पर जमी वर्षों पुरानी गंदगी, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अवांछित सामग्री को हटाया गया। इसके साथ ही तालाब के आसपास की गलियों और संपर्क मार्गों की भी साफ-सफाई की गई। सफाई के बाद पूरे क्षेत्र का वातावरण पहले की तुलना में काफी स्वच्छ और व्यवस्थित नजर आने लगा। स्थानीय लोगों ने भी माना कि एक ही दिन में किए गए प्रयासों से सकारात्मक बदलाव साफ दिखाई देने लगा है।
चरणबद्ध तरीके से चलेगा सफाई कार्य
संस्था की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि यह अभियान अभी प्रारंभिक चरण में है। एक-दो दिन के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरे रामबांध तालाब और आसपास के क्षेत्र की व्यापक सफाई की जाएगी। लक्ष्य यह है कि तालाब को पूरी तरह स्वच्छ, सुंदर और उपयोगी बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन के दौरान लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ा है तालाब
रामबांध तालाब का महत्व केवल एक जलस्रोत तक सीमित नहीं है। यह नगर के सामाजिक और धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ पर्व सहित कई अवसरों पर प्रतिमाओं का विसर्जन इसी तालाब में किया जाता है। ऐसे में तालाब की स्वच्छता सीधे तौर पर लोगों की आस्था और भावनाओं से जुड़ी हुई है। लंबे समय से उपेक्षा के कारण तालाब की स्थिति खराब हो रही थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास शुरू हुआ है।
स्थानीय नागरिकों ने की पहल की सराहना
स्थानीय नागरिकों ने इस सफाई अभियान की खुले दिल से सराहना की है। लोगों का कहना है कि रामबांध तालाब नगर की पहचान है और इसकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है। समय पर साफ-सफाई से न केवल धार्मिक आयोजनों में सुविधा होगी, बल्कि मच्छर, बदबू और जलजनित बीमारियों से भी राहत मिलेगी। कई नागरिकों ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में नगर परिषद और अन्य सामाजिक संगठन मिलकर इस तरह के अभियानों को नियमित रूप से चलाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों और जलस्रोतों की सफाई पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ तालाब भूजल स्तर बनाए रखने, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रामबांध तालाब की सफाई से न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।
न्यूज़ देखो: जब पहल समाज से शुरू होती है
यह खबर बताती है कि यदि समाज के लोग आगे आएं, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है। विकास माली और उनकी संस्था की पहल यह दिखाती है कि प्रशासन पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक प्रयास से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अभियान को निरंतरता कैसे दी जाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वच्छता से ही संवरता है शहर का भविष्य
शहर और गांव तभी सुंदर बनते हैं, जब लोग अपने आसपास की जिम्मेदारी खुद लेते हैं। रामबांध तालाब की सफाई एक उदाहरण है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। अगर समाज, संस्था और प्रशासन मिलकर काम करें, तो गढ़वा को और स्वच्छ व सुंदर बनाया जा सकता है।
आप भी अपने इलाके में ऐसी पहल का हिस्सा बनें, स्वच्छता के लिए आवाज उठाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और दूसरों को भी जागरूक करें।





