
#गिरिडीह #धार्मिक_आस्था : नववर्ष के अवसर पर विशेष पूजा, हवन और भंडारे में जुटे सैकड़ों श्रद्धालु।
गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध मुंडरो पहाड़ी मंदिर में नववर्ष के अवसर पर गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भंडारे का आयोजन किया गया। बगोदर, बरकट्ठा और सरिया प्रखंड के विभिन्न गांवों से श्रद्धालु यहां पहुंचे और नववर्ष की शुरुआत आस्था व भक्ति के साथ की। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
- मुंडरो पहाड़ी मंदिर में नववर्ष पर विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन।
- बगोदर, बरकट्ठा और सरिया प्रखंडों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु।
- पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन।
- आयोजन में त्यागी बाबा सहित कई सामाजिक व धार्मिक लोग शामिल।
- महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी।
नववर्ष के पावन अवसर पर गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था का केंद्र मुंडरो पहाड़ी मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति का साक्षी बना। गुरुवार की सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने नववर्ष की शुरुआत भगवान के दर्शन, पूजा-अर्चना और हवन के साथ कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर दूर-दराज के गांवों के लोगों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
परंपरा के अनुसार हुआ विशेष पूजा और हवन
प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी नववर्ष के मौके पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। पुजारियों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई, जिसके बाद सामूहिक हवन का आयोजन हुआ। हवन के दौरान मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति देकर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी ने पूरे श्रद्धा भाव से अनुष्ठानों में भाग लिया।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु
इस धार्मिक आयोजन में केवल बगोदर ही नहीं, बल्कि बरकट्ठा और सरिया प्रखंड के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कुछ श्रद्धालु तो तड़के सुबह ही मंदिर पहुंच गए थे, ताकि नववर्ष का पहला दिन भगवान के दर्शन के साथ शुरू कर सकें। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा की, वहीं युवाओं और बच्चों में भी खास उत्साह देखा गया।
भंडारे में दिखी सेवा और समर्पण की भावना
पूजा-अर्चना और हवन के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। आयोजन समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर सेवा भाव से भंडारे का संचालन किया। श्रद्धालुओं ने इसे आपसी भाईचारे और सामूहिकता का प्रतीक बताया।
आयोजन में शामिल रहे कई गणमान्य लोग
इस अवसर पर कई सामाजिक, धार्मिक और स्थानीय स्तर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में त्यागी बाबा, शिव शंकर मोदी, पूर्व पंचायत समिति सदस्य जगदीश प्रसाद महतो, छोटी प्रसाद, वासुदेव महतो, हरी पंडित, शंकर मोदी, बबीता देवी, जितनी देवी, फूलमती कुमारी, कलावती देवी, कुसुम देवी, जगन्नाथ महतो, लाल कुमार, राजेश कुमार, छोटी कुमार महतो, रतन कुमार, विनोद कुमार महतो, दशरथ महतो सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
श्रद्धालुओं ने साझा किए अपने अनुभव
श्रद्धालुओं का कहना था कि मुंडरो पहाड़ी मंदिर में नववर्ष पर पूजा करने से मन को विशेष शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कई लोगों ने बताया कि वे हर साल नववर्ष पर यहां आकर पूजा करते हैं। उनका मानना है कि वर्ष की शुरुआत यदि पूजा और सेवा के साथ की जाए, तो पूरे साल जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी मिल रहा बढ़ावा
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। नववर्ष पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आसपास के गांवों में चहल-पहल बढ़ जाती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।

न्यूज़ देखो: आस्था से जुड़कर समाज को जोड़ता मुंडरो पहाड़ी मंदिर
मुंडरो पहाड़ी मंदिर में नववर्ष पर आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि आज भी ग्रामीण अंचलों में धार्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने का मजबूत माध्यम हैं। सामूहिक पूजा, हवन और भंडारा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी हैं। ऐसे आयोजनों से सांस्कृतिक विरासत जीवंत रहती है और नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ नए साल की सकारात्मक शुरुआत
नववर्ष का स्वागत यदि भक्ति, सेवा और सामूहिकता के साथ किया जाए, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं।
आप भी अपनी परंपराओं से जुड़ें, ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करें और खबर को साझा कर दूसरों तक पहुंचाएं। अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और आस्था व एकता के इस संदेश को आगे बढ़ाएं।




