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कोनबीर के मॉन्फोर्ट स्कूल में कक्षा दसवीं का विदाई समारोह प्रेरणादायक संदेशों के साथ संपन्न

#कोनबीर #विदाई_समारोह : मॉन्फोर्ट स्कूल में दसवीं के विद्यार्थियों को दी गई उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

सिमडेगा जिले के कोनबीर स्थित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध मॉन्फोर्ट स्कूल में कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने विद्यार्थियों को जीवन में आत्मनिर्भर बनने और संघर्ष से न घबराने का संदेश दिया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में शिक्षक, अभिभावक और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण के समापन और नए भविष्य की शुरुआत का प्रतीक रहा।

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  • मॉन्फोर्ट स्कूल कोनबीर में कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह आयोजित हुआ।
  • कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना रहे।
  • विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता, अनुशासन और संघर्ष का महत्व बताया गया।
  • बोर्ड परीक्षा को जीवन का एक पड़ाव बताते हुए असफलता से सीखने पर जोर दिया गया।
  • विद्यालय के प्राचार्य ब्रदर बिनोय सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं और अभिभावक उपस्थित रहे।

कोनबीर स्थित प्रतिष्ठित मॉन्फोर्ट स्कूल परिसर में आयोजित इस विदाई समारोह का वातावरण उत्साह, भावनाओं और प्रेरणा से भरा हुआ था। कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम उनके स्कूली जीवन के यादगार क्षणों में से एक रहा। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्यक्रम को सादगीपूर्ण लेकिन गरिमामय ढंग से आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों की उपलब्धियों, अनुशासन और भविष्य की योजनाओं पर विशेष फोकस रहा। समारोह में विद्यार्थियों के अभिभावक भी मौजूद रहे, जिन्होंने अपने बच्चों की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि का प्रेरणादायक संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और मेहनत को सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने कहा:

अनिल कंडुलना ने कहा: “मंजिल उन्हीं को मिलती है जो अपने पैरों पर खड़े होकर संघर्ष करना सीखते हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय के समाप्त होने और नए सपनों की शुरुआत का संकेत है। उन्होंने विद्यालय से मिले अनुभवों को जीवन की पूंजी बताते हुए छात्रों से इन्हें कभी न भूलने की अपील की।

शिक्षा के साथ संस्कारों का महत्व

अपने संबोधन में अनिल कंडुलना ने कहा कि मॉन्फोर्ट स्कूल ने विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी भी सिखाई है। उन्होंने कहा कि यही मूल्य आगे चलकर विद्यार्थियों को समाज में एक बेहतर नागरिक बनाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी है।

बोर्ड परीक्षा जीवन की अंतिम मंज़िल नहीं

मुख्य अतिथि ने बोर्ड परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में व्याप्त तनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का एक पड़ाव मात्र है, न कि अंतिम मंज़िल। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, जो विद्यार्थी असफलता से सीख लेते हैं, वही आगे चलकर वास्तविक सफलता हासिल करते हैं।

बेहतर इंसान बनने का संदेश

अनिल कंडुलना ने विद्यार्थियों से भविष्य के लक्ष्यों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी या समाजसेवक बन सकते हैं, लेकिन इन सभी भूमिकाओं से पहले एक अच्छा इंसान बनना सबसे जरूरी है। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों के सम्मान को जीवन की आधारशिला बताते हुए समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने की अपील की।

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विद्यालय परिवार और अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर विद्यालय के प्रिंसिपल ब्रदर बिनोय, डायरेक्टर ब्रदर अमर, ब्रदर जॉन, ब्रदर फिलिप सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में झामुमो के केंद्रीय सदस्य नोवास केरकेट्टा, फिरोज अली और संजु डांग की भी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके परिश्रम और लगन की सराहना की।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से आत्मनिर्भर समाज की नींव

मॉन्फोर्ट स्कूल में आयोजित यह विदाई समारोह शिक्षा के साथ संस्कारों के समन्वय को दर्शाता है। जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों द्वारा विद्यार्थियों को दिया गया मार्गदर्शन बताता है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करते हैं। भविष्य में भी विद्यालयों से इसी तरह के सकारात्मक प्रयासों की अपेक्षा की जाती है।
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सपनों की उड़ान के लिए तैयार होती नई पीढ़ी

विदाई समारोह विद्यार्थियों के लिए भावनात्मक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी रहा। यह समय है जब वे अपने सपनों को नई दिशा देंगे और समाज में अपनी पहचान बनाएंगे। शिक्षा, संस्कार और संघर्ष के साथ आगे बढ़ने वाले विद्यार्थी ही एक सशक्त समाज का निर्माण करते हैं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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