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पांकी के उकसू शिव मंदिर में पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ सम्पन्न, अंतिम दिन पार्किंग विवाद से बिगड़े हालात

#पलामू #पांकी #उकसूशिवमंदिर : भव्य महायज्ञ शांतिपूर्वक सम्पन्न, अंत में पार्किंग को लेकर तनाव।

पांकी के उकसू स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर में पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान सह रुद्र महायज्ञ का कार्यक्रम सम्पन्न हो गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुआ। हालांकि अंतिम दिन गाड़ी पार्किंग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। सूचना पर प्रशासन ने पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया और शांति बहाल की।

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  • उकसू, पांकी में पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा सह रुद्र महायज्ञ सम्पन्न।
  • बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धार्मिक अनुष्ठान में भाग।
  • अंतिम दिन पार्किंग विवाद के बाद मारपीट की घटना।
  • सूचना पर प्रशासन पहुंचा, स्थिति पर पाया नियंत्रण।
  • मंजुलता दुबे ने भविष्य में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की।

पांकी के उकसू स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान सह रुद्र महायज्ञ का पांच दिवसीय कार्यक्रम धार्मिक उत्साह और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। क्षेत्र में इसे ऐतिहासिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आसपास के गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम जारी रहा। हालांकि समापन दिवस पर एक विवाद ने माहौल को कुछ समय के लिए तनावपूर्ण बना दिया।

भक्ति और आस्था से भरा पांच दिवसीय आयोजन

उकसू के नवनिर्मित शिव मंदिर में आयोजित इस महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के तहत मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव की मूर्ति की स्थापना की गई। पांच दिनों तक चले इस धार्मिक कार्यक्रम में ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।

आयोजन समिति की ओर से व्यवस्थाएं की गई थीं, जिनकी स्थानीय लोगों ने सराहना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान क्षेत्र में मेले जैसा वातावरण देखने को मिला।

मंजुलता दुबे ने दी बधाई

इस अवसर पर पांकी भाजपा नेत्री फाइटर मंजुलता दुबे ने आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह का भव्य आयोजन क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

मंजुलता दुबे ने कहा: “सभी समिति सदस्य बधाई के पात्र हैं। इस ऐतिहासिक अनुष्ठान में मुझे भी पुण्य का भागी बनने का अवसर मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”

उन्होंने आयोजन की सफलता पर आभार व्यक्त किया और श्रद्धालुओं की सहभागिता को सराहा।

अंतिम दिन पार्किंग को लेकर विवाद

महायज्ञ के अंतिम दिन गाड़ी पार्किंग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहनों की व्यवस्था को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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स्थानीय लोगों ने वर्ष 2023 जैसी स्थिति की आशंका जताई। विवाद की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट हो गया और मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस बल की तैनाती के बाद हालात सामान्य किए गए। कुछ समय के लिए क्षेत्र में कर्फ्यू जैसी स्थिति की चर्चा भी रही, हालांकि प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा।

प्रशासनिक सतर्कता पर उठे सवाल

घटना के बाद मंजुलता दुबे ने प्रशासन से भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की मांग की। उनका कहना था कि बड़े धार्मिक आयोजनों, महायज्ञ, जागरण या अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पहले से पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती होनी चाहिए।

मंजुलता दुबे ने कहा: “यदि पहले से पुलिस बल मौजूद रहता तो इस तरह की मारपीट की घटना टाली जा सकती थी। प्रशासन को ऐसे आयोजनों में पहले से सतर्क और तैनात रहना चाहिए।”

उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि शांति और सौहार्द बना रहे।

शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील

घटना के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शांति बनाए रखने की अपील की। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद आयोजन की मूल भावना को प्रभावित करता है।

फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है और प्रशासन की निगरानी जारी है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

न्यूज़ देखो: आस्था के आयोजनों में सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी

उकसू का यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक एकता और सहभागिता का उदाहरण है, लेकिन अंतिम दिन का विवाद यह संकेत देता है कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा प्रबंधन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक तैयारी और ट्रैफिक प्रबंधन पहले से सुनिश्चित हो तो कई विवाद टाले जा सकते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों की पवित्रता तभी बनी रह सकती है जब व्यवस्था और अनुशासन साथ चले। आगे प्रशासन किस तरह की रणनीति बनाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी

धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम हैं।
इनमें शांति, सहयोग और आपसी सम्मान सबसे बड़ी पूंजी है।
छोटी-सी असहमति भी बड़ा विवाद बन सकती है, इसलिए संयम आवश्यक है।
प्रशासन और जनता मिलकर ही सुरक्षित आयोजन सुनिश्चित कर सकते हैं।

आइए, हर आयोजन को सौहार्द का उत्सव बनाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और शांति व व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।

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