
#लातेहार #वन्यजीव_संरक्षण : बेतला पार्क में बाघ दिखने के बाद सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था हुई और सख्त।
लातेहार जिले के बेतला नेशनल पार्क में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। रांची से आए पर्यटकों द्वारा बाघ देखे जाने की सूचना के बाद पीटीआर नॉर्थ के निर्देश पर रिसर्च यूनिट को सक्रिय किया गया है। आधुनिक तकनीकों की मदद से बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग का कहना है कि बाघ, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- बेतला नेशनल पार्क के रोड नंबर दो में बाघ देखे जाने की पुष्टि।
- पीटीआर नॉर्थ के निर्देश पर रिसर्च यूनिट सक्रिय।
- जीपीएस कॉलर, ट्रैप कैमरा और ड्रोन से निगरानी।
- पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ाई गई गश्त।
- वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से सकारात्मक संकेत।
लातेहार जिले का प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है पार्क क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी। बीते सोमवार को रांची से आए पर्यटकों द्वारा बाघ देखे जाने के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। यह सूचना मिलते ही पीटीआर नॉर्थ के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना के निर्देश पर विभागीय रिसर्च यूनिट को सक्रिय कर दिया गया है, जो लगातार बाघ की मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है।
पर्यटकों की सूचना से हुआ खुलासा
सोमवार को रांची से आए पर्यटक जैनब फलक, महताब अहमद, फहद हसन, इलिना और फातिमा बेतला पार्क भ्रमण पर थे। इस दौरान उन्होंने रोड नंबर दो स्थित चतुरबथवा वाटर टब के पास झाड़ियों में आराम कर रहे बाघ को देखा। पर्यटकों ने बाघ की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल फोन में कैद कर तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही विभाग हरकत में आ गया।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने न केवल पार्क क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ कर दिया। पीटीआर नॉर्थ के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बाघ की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए।
24 घंटे निगरानी में रिसर्च यूनिट
बेतला पार्क में सक्रिय रिसर्च यूनिट बाघ की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है। इस टीम में तपस कर्माकर, अभय कुमार, ओमप्रकाश, संजीव शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है, जिससे बाघ की सटीक लोकेशन और मूवमेंट को ट्रैक किया जा सके।
आधुनिक तकनीक का सहारा
वन विभाग द्वारा निगरानी के लिए जीपीएस कॉलर, ट्रैप कैमरे और ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से टीम के सदस्यों ने बाघ की सटीक गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि हर संभावित स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
रेंजर का बयान
बेतला के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा:
“बाघ की सुरक्षा हमारे विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जा रहा है। गश्त बढ़ा दी गई है और एक विशेष टीम 24 घंटे निगरानी कर रही है।”
उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वनकर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए सतर्कता
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और पार्क भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों से ही आवाजाही करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन अधिकारियों को दें। बाघ की मौजूदगी के कारण कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से आवाजाही पर नियंत्रण भी किया जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि बेतला क्षेत्र में बाघ की नियमित मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से एक बेहद सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि जंगल का पारिस्थितिक तंत्र धीरे-धीरे संतुलित हो रहा है और बाघ जैसे शीर्ष शिकारी के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है।
न्यूज़ देखो: बेतला में बाघ की वापसी क्या संकेत देती है
बेतला नेशनल पार्क में बाघ की मौजूदगी यह दर्शाती है कि संरक्षण प्रयास सही दिशा में हैं। हालांकि, इसके साथ सुरक्षा प्रबंधन और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। क्या भविष्य में बेतला फिर से बाघों का मजबूत गढ़ बन पाएगा, यह सतत निगरानी और जिम्मेदार पर्यटन पर निर्भर करेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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