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लावालौंग-पांकी मुख्य सड़क का शिलान्यास तीन माह बाद भी लंबित, 22 करोड़ की योजना पर उठे सवाल

#लावालौंग #सड़क_निर्माण : 22 करोड़ की लागत वाली सड़क का 15 जनवरी को शिलान्यास कराने का वादा अब तक अधूरा, ग्रामीणों में नाराजगी।

चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र में वर्षों से जर्जर पड़ी लावालौंग-पांकी मुख्य सड़क के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की उम्मीदें फिर अधूरी रह गई हैं। करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का खरमास समाप्त होते ही 15 जनवरी को शिलान्यास कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न तो शिलान्यास हुआ और न ही निर्माण कार्य शुरू हो सका है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।

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  • लावालौंग-पांकी मुख्य सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी।
  • करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण की मिली थी स्वीकृति।
  • 15 जनवरी को शिलान्यास कराने का किया गया था वादा
  • तीन माह बाद भी शिलान्यास तक नहीं हो सका, निर्माण कार्य शुरू नहीं।
  • ग्रामीणों ने चेतावनी दी — जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो होगा जन आंदोलन

चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र में लावालौंग-पांकी मुख्य सड़क के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वर्षों से खराब हालत में पड़ी इस सड़क के निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब जल्द ही उनकी परेशानी खत्म होगी।

करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का खरमास समाप्त होते ही 15 जनवरी को शिलान्यास कर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन तय समय बीतने के करीब तीन महीने बाद भी शिलान्यास नहीं हो सका है।

जर्जर सड़क से रोजाना होती है परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़क के कारण आवागमन बेहद कठिन हो गया है।

बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है। कई स्थानों पर सड़क दलदल में बदल जाती है, जिससे वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्कूली बच्चों और मरीजों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत

स्थानीय लोगों के अनुसार इस सड़क की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों पर पड़ता है।

कई बार ऐसा भी हुआ है कि सड़क खराब होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।

आंदोलन के बाद मिली थी निर्माण की मंजूरी

ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण के लिए लंबे समय तक आंदोलन और जनदबाव बनाया गया था। इसके बाद जाकर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली थी।

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स्वीकृति मिलने के बाद जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था कि खरमास समाप्त होते ही 15 जनवरी को शिलान्यास कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो होगा आंदोलन

ग्रामीणों ने कहा कि अब तक शिलान्यास नहीं होने से लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ रही है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिलान्यास कर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे

विकास की जीवनरेखा है यह सड़क

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवनरेखा है।

इस सड़क के बनने से आसपास के गांवों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में काफी सुविधा होगी।

न्यूज़ देखो विश्लेषण: वादों और हकीकत के बीच फंसी विकास योजनाएं

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं विकास की आधारशिला मानी जाती हैं। लेकिन कई बार योजनाओं की स्वीकृति के बाद भी समय पर काम शुरू नहीं होने से लोगों की उम्मीदें टूट जाती हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट समयसीमा तय कर कार्य शुरू करना चाहिए, ताकि विकास योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें।

विकास तभी संभव जब योजनाएं समय पर जमीन पर उतरें

किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं जरूरी होती हैं। यदि स्वीकृत योजनाओं का कार्य समय पर शुरू हो और तय समय में पूरा हो, तभी आम लोगों को वास्तविक लाभ मिल सकता है।

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Binod Kumar

लावालोंग, चतरा

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