News dekho specials
Dumka

बासुकीनाथ धाम में पंचशूल उतारे जाने से शुरू हुआ चार दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव, श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था

#बासुकीनाथ #महाशिवरात्रि_महोत्सव : परंपरागत विधि से पंचशूल उतार चार दिवसीय अनुष्ठान प्रारंभ।

सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल बासुकीनाथ धाम में फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी से चार दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत हो गई। परंपरा के अनुसार शिव और पार्वती मंदिर के गुंबद से पंचशूल सहित अन्य पवित्र प्रतीकों को विधि-विधान से उतारा गया। मंदिर न्यास समिति की देखरेख में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरे धाम परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • बासुकीनाथ धाम में फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी से महोत्सव आरंभ।
  • शिव एवं पार्वती मंदिर के गुंबद से पंचशूल उतारा गया।
  • पंचशूल के साथ कलश, त्रिशूल, ध्वजा, गठबंधन और पगड़ी भी उतारी गई।
  • मंदिर न्यास समिति की देखरेख में संपन्न हुआ अनुष्ठान।
  • विदकारी सोखी कुंवर के परिजनों ने निभाई परंपरागत जिम्मेदारी।
  • महाशिवरात्रि के दिन पुनः मंदिर शिखर पर स्थापित किए जाएंगे प्रतीक।

सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल बासुकीनाथ धाम में महाशिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हो गई है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी के अवसर पर शिव एवं पार्वती मंदिर के गुंबद पर स्थापित पंचशूल को विधि-विधान से उतारा गया। इस रस्म के साथ ही चार दिवसीय महोत्सव का औपचारिक आगाज हुआ। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

पंचशूल उतारने की परंपरा निभाई गई

महाशिवरात्रि से पूर्व बासुकीनाथ धाम में पंचशूल उतारने की विशेष परंपरा है। इसी क्रम में शिव एवं पार्वती मंदिर के गुंबद पर स्थापित पंचशूल को उतारा गया। यह कार्य विधिवत मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया गया।

पंचशूल के साथ पवित्र कलश, त्रिशूल, ध्वजा, गठबंधन और पगड़ी भी सावधानीपूर्वक नीचे उतारी गई। यह सभी प्रतीक महाशिवरात्रि तक विशेष पूजन के बाद पुनः मंदिर शिखर पर स्थापित किए जाएंगे।

परिजनों ने निभाई पारंपरिक जिम्मेदारी

इस धार्मिक अनुष्ठान में विदकारी सोखी कुंवर के परिजनों ने परंपरा के अनुसार गुंबद पर चढ़कर पंचशूल उतारने की जिम्मेदारी निभाई। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन श्रद्धा और अनुशासन के साथ किया गया।

मंदिर न्यास समिति की देखरेख में पूरा कार्यक्रम सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। पंडा, पुरोहित और मंदिर कर्मियों की उपस्थिति में सभी रस्में पूरी की गईं।

एक पुरोहित ने बताया: “महाशिवरात्रि से पहले पंचशूल उतारना यहां की प्राचीन परंपरा है। निर्धारित तिथि पर विधि-विधान से इसे पुनः स्थापित किया जाता है।”

अन्य मंदिरों से भी उतारे गए प्रतीक

धाम परिसर के अन्य मंदिरों के शिखरों से भी कलश और त्रिशूल उतारे गए। यह प्रक्रिया भी धार्मिक विधि से संपन्न की गई। पूरे परिसर में भजन, मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।

News dekho specials

श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या इस अनुष्ठान की साक्षी बनी। कई श्रद्धालु दूर-दराज से इस विशेष अवसर पर धाम पहुंचे।

महाशिवरात्रि पर पुनः स्थापना

मंदिर प्रबंधन के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन सभी प्रतीकों को पुनः मंदिर शिखर पर स्थापित किया जाएगा। उस दिन विशेष पूजा-अर्चना और भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के दौरान विभिन्न अनुष्ठान और पूजा कार्यक्रम संपन्न होंगे।

बासुकीनाथ धाम में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पंचशूल उतारने की यह रस्म महोत्सव का आधिकारिक संकेत मानी जाती है।

न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का जीवंत केंद्र

बासुकीनाथ धाम में पंचशूल उतारने की परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मंदिर न्यास समिति और परंपरागत परिवारों की सहभागिता इस धरोहर को जीवित रखे हुए है। महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है ताकि श्रद्धालुओं को सुगम व्यवस्था मिल सके। यह आयोजन आस्था, अनुशासन और सामूहिक भागीदारी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

महादेव की भक्ति में जुड़ें, परंपरा को आगे बढ़ाएं

धार्मिक परंपराएं केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होतीं, वे समाज को जोड़ने का माध्यम बनती हैं। बासुकीनाथ धाम का यह महोत्सव हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

त्योहारों के अवसर पर अनुशासन, स्वच्छता और सहयोग की भावना बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। श्रद्धा के साथ-साथ व्यवस्था और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।

अगर आप भी इस महोत्सव के साक्षी बने हैं, तो अपने अनुभव साझा करें। खबर को अपने मित्रों और परिवार तक पहुंचाएं और सकारात्मक धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में भागीदार बनें।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Saroj Verma

दुमका/देवघर

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: