महुआडांड़ में डिग्री कॉलेज खोलने पर सरकार करेगी विचार, पलामू टाइगर प्रोजेक्ट कार्यालय स्थानांतरण से फिलहाल इंकार

महुआडांड़ में डिग्री कॉलेज खोलने पर सरकार करेगी विचार, पलामू टाइगर प्रोजेक्ट कार्यालय स्थानांतरण से फिलहाल इंकार

author Akram Ansari
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#महुआडांड़ #विधानसभा_प्रश्न : मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह के सवाल पर सरकार ने दी स्थिति स्पष्ट।

झारखंड विधानसभा के चालू सत्र में मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न पर राज्य सरकार ने महुआडांड़ में डिग्री कॉलेज स्थापना पर विचार करने की बात कही है। सरकार ने माना कि क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में जाना पड़ता है। वहीं पलामू व्याघ्र परियोजना के कार्यालय को लातेहार स्थानांतरित करने की मांग पर फिलहाल सरकार ने इंकार कर दिया है।

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  • मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह ने विधानसभा में उठाया मुद्दा।
  • महुआडांड़ में डिग्री कॉलेज स्थापना पर सरकार ने विचार करने की बात कही।
  • इंटर के बाद छात्रों को मेदिनीनगर, लातेहार या गुमला जाना पड़ता है।
  • महुआडांड़ को लगभग 15 वर्ष पहले मिला था अनुमंडल का दर्जा
  • पलामू व्याघ्र परियोजना कार्यालय को लातेहार स्थानांतरित करने से सरकार का इंकार।

झारखंड विधानसभा के चालू अधिवेशन में मनिका विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचन्द्र सिंह द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने महुआडांड़ प्रखंड में डिग्री कॉलेज स्थापना की संभावना पर विचार करने की बात कही है। वहीं पलामू व्याघ्र परियोजना के कार्यालय को लातेहार स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया गया है।

छात्रों को पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है दूर

विधानसभा में दिए गए जवाब में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने स्वीकार किया कि लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड को लगभग 15 वर्ष पहले अनुमंडल का दर्जा मिलने के बावजूद वहां अब तक डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं हो सकी है।

इसके कारण इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को डिग्री की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। छात्रों को मेदिनीनगर लगभग 100 किलोमीटर, लातेहार करीब 110 किलोमीटर और गुमला लगभग 80 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है।

भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बनेगा प्रस्ताव

सरकार ने यह भी माना कि महुआडांड़ भौगोलिक दृष्टि से एक सुदूर और पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा हुआ है और यहां आवागमन की सुविधाएं भी सीमित हैं।

इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कहा है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर महुआडांड़ में डिग्री कॉलेज स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

टाइगर प्रोजेक्ट कार्यालय स्थानांतरण से इंकार

विधानसभा में पूछे गए एक अन्य तारांकित प्रश्न के जवाब में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने पलामू व्याघ्र परियोजना से जुड़ी स्थिति भी स्पष्ट की।

सरकार ने बताया कि पलामू व्याघ्र परियोजना का क्षेत्र लातेहार और गढ़वा दोनों जिलों में फैला हुआ है। ऐसे में प्रशासनिक दृष्टिकोण से क्षेत्रीय निदेशक और उपनिदेशक का कार्यालय मेदिनीनगर में स्थापित किया गया है, क्योंकि यह क्षेत्र के मध्य में स्थित है।

फिलहाल स्थानांतरण का कोई प्रस्ताव नहीं

सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि पलामू व्याघ्र परियोजना के कार्यालय को लातेहार जिला मुख्यालय, बेतला या गारू स्थानांतरित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

इस संबंध में विभाग ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त है, इसलिए फिलहाल किसी प्रकार के बदलाव की योजना नहीं बनाई गई है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं पर उठ रहे स्थानीय सवाल

महुआडांड़ जैसे सुदूर क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा का अभाव लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। यदि यहां डिग्री कॉलेज की स्थापना होती है तो इससे क्षेत्र के छात्रों को काफी राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक संस्थानों के स्थान को लेकर भी स्थानीय स्तर पर मांग और बहस लगातार जारी रहती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा सुविधा बढ़ाना जरूरी

ग्रामीण और सुदूर इलाकों में उच्च शिक्षा की सुविधाएं बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। यदि ऐसे क्षेत्रों में कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए जाते हैं तो इससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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