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सिमडेगा के तामड़ा गांव में 25 नवम्बर से 112वीं तामड़ा जतरा महोत्सव का भव्य शुभारंभ

#सिमडेगा #तामड़ा_जतरा : सिमडेगा के प्राचीन तामड़ा गांव में 112 वर्षों से लगातार लगने वाला ऐतिहासिक जतरा मेला 25 नवम्बर से दो दिवसीय रूप में शुरू होगा
  • तामड़ा जतरा मेला 25 नवम्बर को विधिवत उपायुक्त कंचन सिंह और एसपी एम. अर्शी द्वारा उद्घाटित किया जाएगा।
  • मेला 112 वर्षों से लगातार लग रहा है और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
  • एक सप्ताह पहले झाली मांगने की परंपरा बच्चों द्वारा घर-घर जाकर धान और चूड़ा संग्रहण के साथ निभाई जाएगी।
  • इस वर्ष कठपुतली नाच को पुनर्जीवित कर कुल्लूकेरा से प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है।
  • दो दिवसीय मेला में पारंपरिक नृत्य, झारखंड के कलाकार इग्नेस, चिंता देवी सुमन गुप्ता, पंचम राम, शखि यादव और पाइका नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे।
  • मेला स्थल के संरक्षण हेतु पर्यटन संवर्धन समिति ने जिला प्रशासन से स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।

तामड़ा गांव का ऐतिहासिक जतरा मेला 25 नवम्बर को विधिवत शुरू होगा। मेला दो दिवसीय आयोजन में परिवर्तित हो चुका है और इस वर्ष विशेष रूप से पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बच्चों की झाली मांगने की परंपरा पर जोर दिया जाएगा। उपायुक्त कंचन सिंह और एसपी एम. अर्शी द्वारा उद्घाटन किया जाएगा। मेला की तैयारियों में खेल-तमाशा, बच्चों के मनोरंजन के साधन, मिठाई और विभिन्न वस्तुओं की दुकानें शामिल हैं।

112 वर्षों की गौरवशाली परंपरा

तामड़ा जतरा मेला 1913 से आयोजित हो रहा है। इसे शुरू करने वाले गांव के प्रमुख लोग थे जागेश्वर सिंह, महावीर साव, रामलाल साव, शिवलाल साव, श्री साव, बबन श्रीवास्तव, दुर्गा साव, फिरू लोहरा, जगन साव, रामचन्द्र साव और सीतराम साव। शुरुआत में यह छोटा मेला फसल की अच्छी पैदावार और ग्रामीणों को एक सूत्र में बांधने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। समय के साथ मेल की लोकप्रियता बढ़ी और यह बड़ा ऐतिहासिक मेला बन गया।

झाली मांगने की परंपरा

मेला से एक सप्ताह पूर्व बच्चों द्वारा झाली मांगना शुरू होता है। छोटे बच्चे घर-घर जाकर पारंपरिक गीत गाते हुए धान और चूड़ा संग्रह करते हैं। यह परंपरा 112 वर्षों से निरंतर चल रही है और स्थानीय समुदाय इसे उत्साहपूर्वक निभाता है।

सांस्कृतिक आकर्षण और कठपुतली नाच

पहले मेला का सबसे प्रमुख आकर्षण कठपुतली नाच था, जिसे बीरू नायक समुदाय के लोग प्रस्तुत करते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा समाप्त हो गई थी। इस वर्ष 2025 में कुल्लूकेरा से कठपुतली नाच का आयोजन कर इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया है।

दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम

पहले दिन 25 नवम्बर को मेला का भव्य उद्घाटन होगा और पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं द्वारा नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होगा। दूसरे दिन 26 नवम्बर को रात्रि में झारखंड के प्रमुख कलाकारों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें इग्नेस, चिंता देवी सुमन गुप्ता, पंचम राम, शखि यादव और पाइका नृत्य मुख्य आकर्षण होंगे। उद्घाटन झारखंड प्रदेश मजदूर यूनियन के नेता राजेश कुमार सिंह करेंगे।

मेला संरक्षण और प्रशासनिक पहल

मेला स्थल निजी भूमि पर होने के कारण भविष्य में इसकी सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो रही है। आयोजक समिति ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मेला के लिए पास के सरकारी भूमि को स्थायी रूप से उपलब्ध कराया जाए। आयोजन समिति के प्रमुख संरक्षक और पदाधिकारी इस वर्ष भी मेला को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं। इनमें शखी ग्वाला, हीरा राम, लाल महतो, कुबेर कैथवार, संतोष साहू, राहुल मिश्रा, विकास साहू, अरविंद कैथवार, राहुल कैथवार, मनीष केशरी, रिजवान खलीफा, छोटा साहू, किशोर मांझी, ब्रजनाथ कैथवार, मुकेश गोप, अजय बैठा, मुरली, सचिन, विक्की, दसरथ सचिन केशरी, अभिषेक, मनोज सिंह, शत्रुघन श्रीवास्तव, फूलचंद ठाकुर, जितेंद्र पुरी, मुकेश मिश्रा, अशोक गुप्ता, रामकुमार, दिनेश राम, कृतलोचन राम शामिल हैं। मीडिया प्रभारी अमन मिश्रा और राजन सिंह भी तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।

न्यूज़ देखो: तामड़ा जतरा मेला सिमडेगा की सांस्कृतिक धरोहर

112 वर्षों से लगातार आयोजित तामड़ा जतरा मेला सिमडेगा जिले की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रतीक है। बच्चों की झाली मांगने की परंपरा, कठपुतली नाच और पारंपरिक नृत्य जैसी गतिविधियाँ स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। प्रशासन और समिति के प्रयासों से मेला स्थायी रूप से संरक्षित होकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जानें और बढ़ावा दें

स्थानीय मेलों और पारंपरिक कार्यक्रमों में भाग लेकर सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता फैलाएँ। परिवार और मित्रों के साथ इस ऐतिहासिक मेला का आनंद लें। अपनी राय कमेंट करें, मेला की खबर साझा करें और 112 वर्षों की परंपरा को सुरक्षित रखने में मदद करें।

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Birendra Tiwari

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