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तीसीबार के झारखण्ड विश्वनाथ मंदिर में भव्य कलश यात्रा के साथ गूंजा हर हर भोले का जयघोष

#तीसीबार #कलश_यात्रा : सैकड़ों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट से जल उठाकर भक्ति का संदेश दिया।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार गांव स्थित झारखण्ड विश्वनाथ मंदिर में भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर से निकली शोभायात्रा त्रिवेणी घाट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पवित्र जल उठाया। कार्यक्रम में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में हर हर भोले के जयघोष गूंजते रहे। चार दिवसीय धार्मिक आयोजन के तहत भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है।

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  • तीसीबार स्थित झारखण्ड विश्वनाथ मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकली।
  • त्रिवेणी घाट से श्रद्धालुओं ने विधिवत पवित्र जल उठाया।
  • कार्यक्रम में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
  • मंदिर संरक्षक विनय कुमार दुबे ने चार दिवसीय आयोजन की जानकारी दी।
  • आयोजन में दिनेश कुमार, रामा शंकर पांडेय, सोना दुबे, अविनाश सिंह, रंजू प्रसाद, जितेंद्र प्रसाद सहित कई लोग उपस्थित रहे।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार गांव में रविवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। झारखण्ड विश्वनाथ मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर मंदिर से त्रिवेणी घाट तक पहुंचे। पूरे मार्ग में “हर हर भोले” और “बम बम भोले” के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

मंदिर परिसर से विधिवत प्रारंभ हुई कलश यात्रा

झारखण्ड विश्वनाथ मंदिर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ की गई। पुजारी द्वारा वैदिक रीति से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कलश उठाए। शोभायात्रा मंदिर परिसर से निकलकर निर्धारित मार्ग से होते हुए त्रिवेणी घाट पहुंची।

त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरा और पुनः मंदिर परिसर में लौटकर उसे स्थापित किया। इस दौरान अनुशासन और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखा गया। ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया, जिससे आयोजन और भी भव्य हो उठा।

चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन

मंदिर में चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस दौरान भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक चेतना को प्रबल करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना बताया गया।

मंदिर संरक्षक विनय कुमार दुबे ने कहा:
“ऐसे धार्मिक आयोजनों से लोगों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है। समाज से जुड़कर काम करना बहुत अच्छा लगता है।”

उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी दिनों में विशेष भजन संध्या और सामूहिक पूजा का कार्यक्रम रखा गया है।

गणमान्य लोगों की रही सक्रिय भागीदारी

इस धार्मिक आयोजन में तीसीबार पंचायत के पूर्व मुखिया दिनेश कुमार, मंदिर के पुजारी रामा शंकर पांडेय, सोना दुबे, अविनाश सिंह, रंजू प्रसाद तथा जितेंद्र प्रसाद सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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स्थानीय युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली, जिससे आयोजन में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ। ग्रामीणों ने व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया, जिसके कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

क्षेत्र में बना धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का माहौल

कलश यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की अनुशासित सहभागिता और ग्रामीणों का सहयोग आयोजन की सफलता का प्रमुख कारण रहा। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर पर्याप्त तैयारी की गई थी।

चार दिवसीय कार्यक्रम के चलते तीसीबार और आसपास के गांवों में धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है। भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के माध्यम से लोगों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी संदेश दे गया।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का सशक्त संदेश

तीसीबार में आयोजित यह कलश यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे को मजबूत करते हैं। स्थानीय स्तर पर सामूहिक भागीदारी यह दर्शाती है कि धार्मिक आयोजन सामाजिक संरचना को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब देखना यह होगा कि इस चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान और कितनी व्यापक सहभागिता देखने को मिलती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

भक्ति से बढ़ता है समाज का विश्वास और आपसी जुड़ाव

धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं। जब गांव के लोग एक साथ मिलकर आयोजन को सफल बनाते हैं, तो आपसी विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

ऐसे कार्यक्रमों में युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भविष्य के सामाजिक नेतृत्व का संकेत देती है।

आप भी अपने क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक आयोजनों की जानकारी साझा करें। अपनी राय कमेंट में लिखें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक पहल को बढ़ावा दें।
सजग रहें, सक्रिय बनें और भक्ति के साथ सामाजिक एकता का संदेश फैलाएं।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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