
#गढ़वा #रुद्र_महायज्ञ : जोबरईया ग्राम में नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन — रुद्राभिषेक और श्रीराम कथा से गूंजा मंदिर परिसर।
गढ़वा जिला मुख्यालय के समीप जोबरईया ग्राम स्थित बंडा पहाड़ के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ का आयोजन जारी है। 08 मार्च से शुरू यह धार्मिक अनुष्ठान 16 मार्च 2026 तक चलेगा। यज्ञ के चौथे दिन कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से हुई। इसके बाद हवन, यज्ञ और संध्या में श्रीराम कथा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
- गढ़वा के जोबरईया ग्राम स्थित बंडा पहाड़ में नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में महायज्ञ जारी।
- 08 मार्च से 16 मार्च 2026 तक चल रहा नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ।
- चौथे दिन की शुरुआत भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से हुई।
- शाम में आचार्य पंकज शांडिल्य जी ने श्रीराम कथा का श्रवण कराया।
- कार्यक्रम में मुख्य यजमान जितेंद्र कुमार पाल सहित कई श्रद्धालु शामिल।
गढ़वा जिला मुख्यालय के समीप जोबरईया ग्राम स्थित बंडा पहाड़ के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ का धार्मिक वातावरण पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना रहा है। 08 मार्च 2026 से प्रारंभ यह महायज्ञ 16 मार्च तक चलेगा और प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान तथा आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
महायज्ञ के चौथे दिन की शुरुआत प्रातःकाल भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक के साथ हुई। रुद्राभिषेक के दौरान आचार्यगण के मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव से इस दिव्य अनुष्ठान में शामिल हुए।
मंत्रोच्चार के बीच प्रारंभ हुआ हवन और यज्ञ
रुद्राभिषेक के बाद यज्ञस्थल में मंत्रोच्चार के साथ आहुतियों का क्रम शुरू हुआ। इस दौरान मुख्य यजमान जितेंद्र कुमार पाल सहित सभी यजमानों ने विधि-विधान से हवन और यज्ञ में भाग लिया।
यह धार्मिक अनुष्ठान महायज्ञ के यज्ञाधीश आचार्य श्री श्री आशीष वैद्य जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है। आचार्यगण की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ यज्ञ कार्य में भाग लिया और भगवान से क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
संध्या में शुरू हुई श्रीराम कथा
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संध्या 6 बजे सभी यजमानों ने संयुक्त रूप से व्यास पीठ का पूजन किया। इसके साथ ही पावन श्रीराम कथा के चौथे दिन का शुभारंभ हुआ।
कथा का वाचन परम पूज्य आचार्य पंकज शांडिल्य जी ने किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के नाम की महिमा बताते हुए कहा कि कलियुग में नाम संकीर्तन का विशेष महत्व है।
आचार्य पंकज शांडिल्य जी ने कहा: “विकट कलिकाल में नाम संकीर्तन का विशेष महत्व है। हम भगवान का नाम लेकर इस भव बंधन से पार हो सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा का श्रवण करने से कलियुग के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन
कथा के दौरान आचार्य पंकज शांडिल्य जी ने भगवान श्रीराम के बाल चरित्र का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बाल लीलाओं के माध्यम से भगवान ने भक्तों को भक्ति का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने ताड़का और सुबाहु जैसे अत्याचारी राक्षसों का वध कर यज्ञ की रक्षा की, जो धर्म और न्याय की स्थापना का प्रतीक है।
कथा के दौरान बीच-बीच में संगीतमय भजनों और प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कई श्रद्धालु भक्ति संगीत पर झूमते नजर आए।
दिव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं को किया मंत्रमुग्ध
कथा के समापन पर दिव्य झांकियों का भी दर्शन कराया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। धार्मिक झांकियों के माध्यम से भगवान की विभिन्न लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया।
आयोजन समिति ने व्यवस्थाओं पर दिया जोर
महायज्ञ के प्रधान संयोजक राकेश पाल ने आयोजन समिति के सदस्यों से पूरे कार्यक्रम के दौरान सतर्क रहने और श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी सदस्य मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हुए हैं।
अतिथियों को किया गया सम्मानित
आज के कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शिक्षक अनूप कुमार अग्रवाल, रविरंजन सिंह तथा सलेमपुर पलामू से आए सब इंस्पेक्टर विवेक पाल उपस्थित रहे। इन सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से व्यास पीठ का सम्मान किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री श्री आशीष वैद्य जी महाराज ने अतिथियों को अंग वस्त्र प्रदान कर उनका स्वागत और आभार व्यक्त किया।
आयोजन में कई लोगों की रही सक्रिय भागीदारी
पूरे कार्यक्रम में जागृति युवा क्लब महायज्ञ आयोजन समिति के कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें उपाध्यक्ष सत्येंद्र पाल, सचिव विनय पाल, उदय पाल, पंकज पाल, चंदन पाल, आनंद चंद्रवंशी, जितेंद्र पाल गुड्डू, हरिपाल, धनंजय चंद्रवंशी, राजन, अनिल सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
न्यूज़ देखो: आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक
गढ़वा के बंडा पहाड़ स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में आयोजित यह विराट श्री रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा देने के साथ समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से ही बनती है समाज की शक्ति
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर लोग आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं और परंपराओं से जुड़े रहते हैं।
जरूरी है कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसे आयोजन हो रहे हैं तो उनकी जानकारी साझा करें और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने में योगदान दें।
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।






