कराची के किलर कमोडोर बब्रूवाहन यादव की वीरगाथा: जिसने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की कमर तोड़ दी

कराची के किलर कमोडोर बब्रूवाहन यादव की वीरगाथा: जिसने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की कमर तोड़ दी

author News देखो Team
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#1971_युद्ध #भारतीय_नौसेना : ऑपरेशन ट्राइडेंट और पायथन के जरिए कराची पर निर्णायक हमला कर इतिहास रचने वाले महावीर चक्र विजेता कमोडोर बब्रूवाहन यादव की अद्भुत कहानी।
  • कमोडोर बब्रूवाहन यादव को मिला “किलर ऑफ कराची” का गौरव।
  • ऑपरेशन ट्राइडेंट ने कराची बंदरगाह को किया तबाह।
  • पीएनएस खैबर सहित कई पाकिस्तानी जहाज ध्वस्त।
  • केमारी तेल टर्मिनल में लगी आग से 60,000 टन तेल नष्ट।
  • भारतीय नौसेना का एक भी जहाज क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।

भारतीय नौसेना के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो साहस, रणनीति और देशभक्ति के प्रतीक बन गए हैं। इन्हीं में से एक नाम है कमोडोर बब्रूवाहन (बबरू) यादव का, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाया कि उन्हें “किलर ऑफ कराची” की उपाधि से नवाजा गया। उनके नेतृत्व में किया गया ऑपरेशन ट्राइडेंट न केवल युद्ध का निर्णायक मोड़ साबित हुआ, बल्कि विश्व नौसैनिक इतिहास में भी एक नया अध्याय जुड़ गया। यह ऑपरेशन भारतीय सैन्य रणनीति की श्रेष्ठता और हमारे नौसैनिकों की अदम्य वीरता का प्रमाण है।

1971 का युद्ध और समुद्री रणनीति

1971 का युद्ध भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ भारत को हस्तक्षेप करना पड़ा। 3 दिसंबर 1971 को जब पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के ठिकानों पर हमला किया, तब युद्ध आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। भारत को तीनों मोर्चों—थल, जल और वायु—पर एक साथ लड़ना था।

भारतीय नौसेना की योजना स्पष्ट थी—पाकिस्तान के प्रमुख बंदरगाह कराची को निशाना बनाकर उसकी सैन्य और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करना। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और जोखिमपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी कमोडोर बब्रूवाहन यादव को सौंपी गई।

ऑपरेशन ट्राइडेंट: साहस और सटीकता का अद्वितीय उदाहरण

दिसंबर 1971 की अंधेरी रात, जब पूरा कराची सो रहा था, तब भारतीय नौसेना के मिसाइल बोट स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के सबसे बड़े बंदरगाह पर अचानक हमला बोल दिया। 4–5 दिसंबर की इस रात को भारतीय नौसैनिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया गया।

कमोडोर बब्रूवाहन यादव के नेतृत्व में आईएनएस निपात, आईएनएस निर्घात और आईएनएस वीर ने दुश्मन के गढ़ में घुसकर कहर बरपा दिया। इनका सहयोग आईएनएस राजपूत, आईएनएस तलवार और आईएनएस त्रिशूल ने किया। रूसी निर्मित स्टाइक्स मिसाइलों ने कराची बंदरगाह पर तबाही मचा दी।

रात 10:45 बजे पहली मिसाइल दागी गई और पाकिस्तानी विध्वंसक पीएनएस खैबर कुछ ही मिनटों में डूब गया। लगभग 200 पाकिस्तानी नौसैनिक मारे गए। इसके अलावा पीएनएस मुहाफिज़ और व्यापारी जहाज एमवी हरमिटन भी नष्ट कर दिए गए।

आग का तांडव: कराची जल उठा

ऑपरेशन ट्राइडेंट की सबसे बड़ी सफलता रही केमारी तेल टर्मिनल को निशाना बनाना। विशाल तेल टैंकों में लगी आग कई दिनों तक जलती रही। कराची का आसमान लाल हो गया और 60,000 टन से अधिक तेल जलकर नष्ट हो गया। इससे पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति और अर्थव्यवस्था दोनों को गहरा आघात पहुंचा।

इस हमले के बाद पाकिस्तानी नौसेना युद्ध के शेष समय में बंदरगाह से बाहर निकलने का साहस नहीं कर सकी।

ऑपरेशन पायथन: दूसरी निर्णायक चोट

8–9 दिसंबर 1971 की रात को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन पायथन के तहत फिर से कराची पर हमला किया। पाकिस्तानी टैंकर पीएनएस डाक्का को डुबो दिया गया और तेल टर्मिनल को फिर आग के हवाले कर दिया गया। यह हमला पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता पर अंतिम प्रहार साबित हुआ।

विश्व नौसैनिक इतिहास में मील का पत्थर

ऑपरेशन ट्राइडेंट विश्व युद्ध के बाद पहला ऐसा अभियान था जिसमें युद्धपोत-रोधी मिसाइलों का इतना प्रभावी उपयोग हुआ। इसने सिद्ध किया कि छोटे लेकिन आधुनिक जहाज भी बड़े युद्धपोतों को नष्ट कर सकते हैं। दुनिया भर की नौसेनाओं ने इस अभियान से रणनीतिक सबक लिए।

सम्मान और विरासत

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद 4 दिसंबर को भारत में नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। कमोडोर बब्रूवाहन यादव को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे भारतीय जलसेना में महावीर चक्र प्राप्त करने वाले पहले अधिकारी बने।

हरियाणा के भाड़ावास गांव के इस वीर सपूत के नाम पर अब दिल्ली रोड का नाम “कोमोडोर बबरूभान यादव मार्ग” रखा गया है। 1971 के युद्ध में वीर अहीरों को 3 महावीर चक्र, 4 वीर चक्र और 8 सेना मेडल प्राप्त हुए, जो उनके अद्वितीय पराक्रम का प्रमाण है।

न्यूज़ देखो: इतिहास का स्वर्णिम अध्याय

कमोडोर बब्रूवाहन यादव की वीरगाथा केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारतीय रणनीति, साहस और नेतृत्व की मिसाल है। उनका योगदान 1971 के युद्ध में भारत की निर्णायक जीत का मजबूत स्तंभ बना। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पाठकों से अनुरोध है कि इस ऐतिहासिक गाथा को साझा करें, अपने विचार लिखें और उन वीरों को नमन करें जिनकी बदौलत भारत सुरक्षित और सशक्त है।

Guest Author
वरुण कुमार

वरुण कुमार

बिष्टुपुर, जमशेदपुर

वरुण कुमार, कवि और लेखक: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर के सदस्य हैं।

यह आलेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है और NewsDekho के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

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